'UAPA मुकदमों को तेजी से पूरा करना एक चुनौती', चीफ जस्टिस ने सुनवाई में देरी पर जताई चिंता
UAPA मुकदमों को तेजी से पूरा करना एक चुनौती', चीफ जस्टिस ने सुनवाई में देरी पर जताई चिंता
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने UAPA मामलों में ट्रायल में हो रही देरी पर चिंता व्यक्त की है। ...और पढ़ें

UAPA मुकदमों में तेजी से सुनवाई की जरूरत-CJI (फाइल फोटो)
CJI ने UAPA मामलों में ट्रायल में देरी पर चिंता व्यक्त की।
UAPA, PMLA, NDPS मामलों के लिए विशेष अदालतें बनाने पर जोर।
देश में 5 करोड़ से अधिक मामले लंबित, न्यायपालिका के लिए चुनौती।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली दंगों और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत जेल में बंद उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य आरोपियों के ट्रायल में हो रही देरी के बीच सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में ट्रायल जल्द पूरा होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सबूतों पर आखिरी फैसले से लंबे समय तक जेल में रहने के बावजूद जमानत न मिलने की शिकायतों का समाधान हो सकेगा। सीजेआई ने किसी खास मामले या बिना किसी आरोपी का जिक्र किए कहा कि यह एक ऐसा क्षेत्र है जिस पर न्यायिक पक्ष से ध्यान देने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि इस समस्या का एक हिस्सा एक समानांतर न्यायिक प्रक्रिया के ज़रिए प्रभावी ढंग से हल किया गया है, जिसके जरिए मैंने केंद्र सरकार को UAPA, PMLA और NDPS मामलों में ट्रायल के लिए खास स्पेशल कोर्ट बनाने के लिए राजी किया है।
सरकार के सहमत होने के बाद UAPA, PMLA और NDPS मामलों के लिए स्पेशल कोर्ट बनाना शुरू कर दिया है। अगर एक सा के भीतर या तेजी से हम ट्रायल को पूरा कर पाते हैं, तो यह विवाद खत्म हो जाएगा। आने वाले सालों में ट्रायल को तेज करने के नतीजे मिलने लगेंगे और आरोपियों की शिकायत का समाधान होगा।
सीजेआई ने कहा कि लंबित मामलों से निपटना सबसे बड़ी चुनौती है। देश में ट्रायल कोर्ट में कुल लंबित मामलों की संख्या पांच करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है। इन मामलों में 1.1 करोड़ सिविल और 3.9 क्रिमिनल मामले शामिल हैं।
उन्होंने दूसरी चुनौती के बारे बात करते हुए कहा कि आम आदमी और सुप्रीम कोर्ट के बीच की दूरी को खत्म करना बड़ी चुनौती है। बार को बेंच के साथ मिलकर सक्रिय भूमिका निभानी होगी। लोगों तक पहुंचने के लिए लीडरशिप की भूमिका निभाते हुए इस जिम्मेदारी को पूरा करना होगा।
उन्होंने कहा कि आम आदमी के लिए सुप्रीम कोर्ट की छवि आमतौर पर डरावनी होती है। उन्हें डर होता है कि उनका मामला बिना सुनवाई के लंबित रह सकता है या वे वकील का खर्च नहीं उठा सकते। इन नकारात्मक भावनाओं को खत्म किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में, कानूनी सहायता सेवाओं में काबिल वकीलों को शामिल करने से गरीब मुकदमों से जुड़े लोगों को मिलने वाली मुफ्त कानूनी मदद में उल्लेखनीय और गुणात्मक बदलाव आया है।
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने UAPA मामलों में ट्रायल में हो रही देरी पर चिंता व्यक्त की है। ...और पढ़ें

UAPA मुकदमों में तेजी से सुनवाई की जरूरत-CJI (फाइल फोटो)
CJI ने UAPA मामलों में ट्रायल में देरी पर चिंता व्यक्त की।
UAPA, PMLA, NDPS मामलों के लिए विशेष अदालतें बनाने पर जोर।
देश में 5 करोड़ से अधिक मामले लंबित, न्यायपालिका के लिए चुनौती।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली दंगों और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत जेल में बंद उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य आरोपियों के ट्रायल में हो रही देरी के बीच सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में ट्रायल जल्द पूरा होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सबूतों पर आखिरी फैसले से लंबे समय तक जेल में रहने के बावजूद जमानत न मिलने की शिकायतों का समाधान हो सकेगा। सीजेआई ने किसी खास मामले या बिना किसी आरोपी का जिक्र किए कहा कि यह एक ऐसा क्षेत्र है जिस पर न्यायिक पक्ष से ध्यान देने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि इस समस्या का एक हिस्सा एक समानांतर न्यायिक प्रक्रिया के ज़रिए प्रभावी ढंग से हल किया गया है, जिसके जरिए मैंने केंद्र सरकार को UAPA, PMLA और NDPS मामलों में ट्रायल के लिए खास स्पेशल कोर्ट बनाने के लिए राजी किया है।
सरकार के सहमत होने के बाद UAPA, PMLA और NDPS मामलों के लिए स्पेशल कोर्ट बनाना शुरू कर दिया है। अगर एक सा के भीतर या तेजी से हम ट्रायल को पूरा कर पाते हैं, तो यह विवाद खत्म हो जाएगा। आने वाले सालों में ट्रायल को तेज करने के नतीजे मिलने लगेंगे और आरोपियों की शिकायत का समाधान होगा।
सीजेआई ने कहा कि लंबित मामलों से निपटना सबसे बड़ी चुनौती है। देश में ट्रायल कोर्ट में कुल लंबित मामलों की संख्या पांच करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है। इन मामलों में 1.1 करोड़ सिविल और 3.9 क्रिमिनल मामले शामिल हैं।
उन्होंने दूसरी चुनौती के बारे बात करते हुए कहा कि आम आदमी और सुप्रीम कोर्ट के बीच की दूरी को खत्म करना बड़ी चुनौती है। बार को बेंच के साथ मिलकर सक्रिय भूमिका निभानी होगी। लोगों तक पहुंचने के लिए लीडरशिप की भूमिका निभाते हुए इस जिम्मेदारी को पूरा करना होगा।
उन्होंने कहा कि आम आदमी के लिए सुप्रीम कोर्ट की छवि आमतौर पर डरावनी होती है। उन्हें डर होता है कि उनका मामला बिना सुनवाई के लंबित रह सकता है या वे वकील का खर्च नहीं उठा सकते। इन नकारात्मक भावनाओं को खत्म किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में, कानूनी सहायता सेवाओं में काबिल वकीलों को शामिल करने से गरीब मुकदमों से जुड़े लोगों को मिलने वाली मुफ्त कानूनी मदद में उल्लेखनीय और गुणात्मक बदलाव आया है।
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