मैदान पर नहीं दिखेंगे पाकिस्तान के सबसे बड़े फैन 'चाचा क्रिकेट', PAK vs AUS सीरीज के बाद लेंगे रिटायरमेंट
मैदान पर नहीं दिखेंगे पाकिस्तान के सबसे बड़े फैन 'चाचा क्रिकेट', PAK vs AUS सीरीज के बाद लेंगे रिटायरमेंट
पाकिस्तान क्रिकेट के सबसे बड़े समर्थक 'चाचा क्रिकेट' (अब्दुल जलील) ने स्टेडियम से विदाई लेने का ऐलान किया है। 77 वर्षीय चाचा क्रिकेट अगले हफ्ते लाहौर ...और पढ़ें

पाकिस्तान के सबसे बड़े फैन चाचा क्रिकेट
पाकिस्तान क्रिकेट के सबसे बड़े समर्थकों में गिने जाने वाले 'चाचा क्रिकेट' अब स्टेडियमों से विदाई लेने जा रहे हैं। 77 वर्षीय अब्दुल जलील अगले हफ्ते लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली जाने वाली वनडे सीरीज के बाद देश में मैचों के दौरान टीम को चीयर करना छोड़ देंगे।
हरे कुर्ते, टोपी और हाथ में पाकिस्तान का झंडा लिए चाचा क्रिकेट पिछले कई दशकों से टीम की पहचान बने हुए हैं। उन्होंने सिर्फ जीत के जश्न ही नहीं देखे, बल्कि हार के दर्द को भी करीब से महसूस किया है।
पुराना है रिश्ता
क्रिकेट से उनका रिश्ता 1968-69 में शुरू हुआ जब उन्होंने लाहौर में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच देखा। इसके बाद खेल के प्रति उनका जुनून इतना बढ़ा कि नौकरी के लिए यूएई में रहने के बावजूद पाकिस्तान के मैच देखने के लिए लंबी यात्राएं किया करते थे।
उनकी लोकप्रियता बढ़ती गई और 1996 में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने उन्हें टीम का आधिकारिक शुभंकर घोषित कर दिया। दो साल बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और खुद को पूरी तरह पाकिस्तान क्रिकेट के नाम कर दिया।
हर जगह पहुंचे चाचा क्रिकेट
1999 वर्ल्ड कप से लेकर दुनिया के लगभग हर बड़े क्रिकेट मैदान तक, चाचा क्रिकेट पाकिस्तान का झंडा लेकर मौजूद रहे। उनका सपना 500 मैचों में टीम का समर्थन करने का था, जो अब पूरा हो चुका है। अब वे सियालकोट में एक रेस्टोरेंट और क्रिकेट म्यूजियम खोलना चाहते हैं जहां वर्षों से जुटाई गईं क्रिकेट यादों को संजोकर रखा जाएगा।
देखे कई ऐतिहासिक पल
चाचा क्रिकेट ने पाकिस्तान क्रिकेट के कई ऐतिहासिक पल देखे हैं। 1986 में जावेद मियांदाद का आखिरी गेंद पर लगाया गया छक्का आज भी उनकी यादों में ताजा है। वहीं 2011 वर्ल्ड कप में मोहाली की हार और 2024 टी20 वर्ल्ड कप में भारत के खिलाफ मिली शिकस्त उन्हें अब भी परेशान करती है।
हालांकि, हाल के वर्षों में टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है, लेकिन चाचा क्रिकेट का नजरिया नहीं बदला। उनका कहना है, "कभी खुशी, कभी गम... कभी तुम, कभी हम। खेल में ऐसा होता है।"
यही सोच उन्हें एक साधारण प्रशंसक से कहीं बढ़कर बनाती है। चाचा क्रिकेट अब सिर्फ एक फैन नहीं, बल्कि पाकिस्तान क्रिकेट के इतिहास का जीवित हिस्सा हैं।
पाकिस्तान क्रिकेट के सबसे बड़े समर्थक 'चाचा क्रिकेट' (अब्दुल जलील) ने स्टेडियम से विदाई लेने का ऐलान किया है। 77 वर्षीय चाचा क्रिकेट अगले हफ्ते लाहौर ...और पढ़ें

पाकिस्तान के सबसे बड़े फैन चाचा क्रिकेट
पाकिस्तान क्रिकेट के सबसे बड़े समर्थकों में गिने जाने वाले 'चाचा क्रिकेट' अब स्टेडियमों से विदाई लेने जा रहे हैं। 77 वर्षीय अब्दुल जलील अगले हफ्ते लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली जाने वाली वनडे सीरीज के बाद देश में मैचों के दौरान टीम को चीयर करना छोड़ देंगे।
हरे कुर्ते, टोपी और हाथ में पाकिस्तान का झंडा लिए चाचा क्रिकेट पिछले कई दशकों से टीम की पहचान बने हुए हैं। उन्होंने सिर्फ जीत के जश्न ही नहीं देखे, बल्कि हार के दर्द को भी करीब से महसूस किया है।
पुराना है रिश्ता
क्रिकेट से उनका रिश्ता 1968-69 में शुरू हुआ जब उन्होंने लाहौर में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच देखा। इसके बाद खेल के प्रति उनका जुनून इतना बढ़ा कि नौकरी के लिए यूएई में रहने के बावजूद पाकिस्तान के मैच देखने के लिए लंबी यात्राएं किया करते थे।
उनकी लोकप्रियता बढ़ती गई और 1996 में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने उन्हें टीम का आधिकारिक शुभंकर घोषित कर दिया। दो साल बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और खुद को पूरी तरह पाकिस्तान क्रिकेट के नाम कर दिया।
हर जगह पहुंचे चाचा क्रिकेट
1999 वर्ल्ड कप से लेकर दुनिया के लगभग हर बड़े क्रिकेट मैदान तक, चाचा क्रिकेट पाकिस्तान का झंडा लेकर मौजूद रहे। उनका सपना 500 मैचों में टीम का समर्थन करने का था, जो अब पूरा हो चुका है। अब वे सियालकोट में एक रेस्टोरेंट और क्रिकेट म्यूजियम खोलना चाहते हैं जहां वर्षों से जुटाई गईं क्रिकेट यादों को संजोकर रखा जाएगा।
देखे कई ऐतिहासिक पल
चाचा क्रिकेट ने पाकिस्तान क्रिकेट के कई ऐतिहासिक पल देखे हैं। 1986 में जावेद मियांदाद का आखिरी गेंद पर लगाया गया छक्का आज भी उनकी यादों में ताजा है। वहीं 2011 वर्ल्ड कप में मोहाली की हार और 2024 टी20 वर्ल्ड कप में भारत के खिलाफ मिली शिकस्त उन्हें अब भी परेशान करती है।
हालांकि, हाल के वर्षों में टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है, लेकिन चाचा क्रिकेट का नजरिया नहीं बदला। उनका कहना है, "कभी खुशी, कभी गम... कभी तुम, कभी हम। खेल में ऐसा होता है।"
यही सोच उन्हें एक साधारण प्रशंसक से कहीं बढ़कर बनाती है। चाचा क्रिकेट अब सिर्फ एक फैन नहीं, बल्कि पाकिस्तान क्रिकेट के इतिहास का जीवित हिस्सा हैं।
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