हजारीबाग जिला परिषद में गजब का खेल, रिटायरमेंट के 8 साल बाद भी उसी कुर्सी पर जमे हैं कैशियर जमालउद्दीन
हजारीबाग जिला परिषद में गजब का खेल, रिटायरमेंट के 8 साल बाद भी उसी कुर्सी पर जमे हैं कैशियर जमालउद्दीन
हजारीबाग जिला परिषद कार्यालय में कैशियर जमालउद्दीन अपनी सेवानिवृत्ति के 8 साल बाद भी उसी पद पर संविदा के आधार पर कार्यरत हैं। ...और पढ़ें

हजारीबाग जिला परिषद में गजब का खेल
कैशियर जमालउद्दीन 8 साल बाद भी पद पर।
सेवानिवृत्ति के बाद संविदा पर लगातार सेवा विस्तार।
वित्तीय पद पर पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवाल।
विनय, हजारीबाग। सरकारी नौकरी में एक समय ऐसा भी आता है, जब कर्मचारी सेवा पूरी कर सम्मानपूर्वक विदा हो जाता है। लेकिन, हजारीबाग जिला परिषद कार्यालय में एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां सेवानिवृत्ति के आठ साल बाद भी एक कर्मचारी उसी कुर्सी पर बैठकर जिम्मेदारी निभा रहा है। यह मामला अब पूरे विभाग में चर्चा का विषय बन गया है और व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर रहा है।
जिला परिषद के कार्यपालक अभियंता कार्यालय में कैशियर के पद पर कार्यरत जमालउद्दीन की नियुक्ति वर्ष 1987 में हुई थी। उन्होंने करीब 31 वर्षों तक इसी कार्यालय में इसी पद पर काम किया।
संविदा के आधार पर लगातार सेवा विस्तार
वर्ष 2018 में वह सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो गए, लेकिन इसके बाद भी उनकी जिम्मेदारी खत्म नहीं हुई। बताया जा रहा है कि आज भी वही कार्यालय, वही टेबल और वही कैशियर की जिम्मेदारी उनके पास है।
उन्हें संविदा के आधार पर लगातार सेवा विस्तार मिलता गया। सरकारी विभागों में कर्मचारियों का समय-समय पर स्थानांतरण और पदस्थापन सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है।
तीन दशक तक एक ही पद पर
वित्तीय मामलों से जुड़े संवेदनशील पदों पर तो पारदर्शिता बनाए रखने के लिए समय-समय पर बदलाव की व्यवस्था भी की जाती है। ऐसे में किसी कर्मचारी का तीन दशक तक एक ही पद पर बने रहना और फिर सेवानिवृत्ति के वर्षों बाद भी उसी जिम्मेदारी का निर्वहन करना कई सवाल खड़े कर रहा है।
कैशियर का पद किसी भी कार्यालय में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। टेंडर से जुड़े भुगतान, सरकारी राशि का रखरखाव, बिलों का निष्पादन और अन्य वित्तीय लेन-देन जैसे कार्य इसी पद से जुड़े होते हैं। ऐसे में विभागीय नियमों और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है।
अब तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं
विभाग से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि यदि सेवानिवृत्ति के बाद किसी कर्मचारी की संविदा या अन्य व्यवस्था के तहत सेवा ली जा रही है, तो उसके संबंध में स्पष्ट आदेश और नियम सार्वजनिक होने चाहिए।
वहीं कुछ कर्मचारियों का मानना है कि वित्तीय कार्यों में लंबे अनुभव और कार्यालय की आवश्यकता को देखते हुए उन्हें जिम्मेदारी दी गई होगी। हालांकि इस संबंध में विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
कर्मचारियों का नियमित रूप से स्थानांतरण
जिला परिषद कार्यालय आने वाले लोगों का भी कहना है कि जब अन्य कर्मचारियों का नियमित रूप से स्थानांतरण होता है, तो फिर इतने लंबे समय तक एक ही व्यक्ति का एक ही वित्तीय पद पर बने रहना जांच और स्पष्टता का विषय है।
इस संबंध में जिला परिषद के कार्यपालक अभियंता आशीष आनंद से उनका पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। इसलिए उनका पक्ष समाचार प्रकाशित होने तक प्राप्त नहीं हो सका।
हजारीबाग जिला परिषद कार्यालय में कैशियर जमालउद्दीन अपनी सेवानिवृत्ति के 8 साल बाद भी उसी पद पर संविदा के आधार पर कार्यरत हैं। ...और पढ़ें

हजारीबाग जिला परिषद में गजब का खेल
कैशियर जमालउद्दीन 8 साल बाद भी पद पर।
सेवानिवृत्ति के बाद संविदा पर लगातार सेवा विस्तार।
वित्तीय पद पर पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवाल।
विनय, हजारीबाग। सरकारी नौकरी में एक समय ऐसा भी आता है, जब कर्मचारी सेवा पूरी कर सम्मानपूर्वक विदा हो जाता है। लेकिन, हजारीबाग जिला परिषद कार्यालय में एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां सेवानिवृत्ति के आठ साल बाद भी एक कर्मचारी उसी कुर्सी पर बैठकर जिम्मेदारी निभा रहा है। यह मामला अब पूरे विभाग में चर्चा का विषय बन गया है और व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर रहा है।
जिला परिषद के कार्यपालक अभियंता कार्यालय में कैशियर के पद पर कार्यरत जमालउद्दीन की नियुक्ति वर्ष 1987 में हुई थी। उन्होंने करीब 31 वर्षों तक इसी कार्यालय में इसी पद पर काम किया।
संविदा के आधार पर लगातार सेवा विस्तार
वर्ष 2018 में वह सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो गए, लेकिन इसके बाद भी उनकी जिम्मेदारी खत्म नहीं हुई। बताया जा रहा है कि आज भी वही कार्यालय, वही टेबल और वही कैशियर की जिम्मेदारी उनके पास है।
उन्हें संविदा के आधार पर लगातार सेवा विस्तार मिलता गया। सरकारी विभागों में कर्मचारियों का समय-समय पर स्थानांतरण और पदस्थापन सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है।
तीन दशक तक एक ही पद पर
वित्तीय मामलों से जुड़े संवेदनशील पदों पर तो पारदर्शिता बनाए रखने के लिए समय-समय पर बदलाव की व्यवस्था भी की जाती है। ऐसे में किसी कर्मचारी का तीन दशक तक एक ही पद पर बने रहना और फिर सेवानिवृत्ति के वर्षों बाद भी उसी जिम्मेदारी का निर्वहन करना कई सवाल खड़े कर रहा है।
कैशियर का पद किसी भी कार्यालय में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। टेंडर से जुड़े भुगतान, सरकारी राशि का रखरखाव, बिलों का निष्पादन और अन्य वित्तीय लेन-देन जैसे कार्य इसी पद से जुड़े होते हैं। ऐसे में विभागीय नियमों और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है।
अब तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं
विभाग से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि यदि सेवानिवृत्ति के बाद किसी कर्मचारी की संविदा या अन्य व्यवस्था के तहत सेवा ली जा रही है, तो उसके संबंध में स्पष्ट आदेश और नियम सार्वजनिक होने चाहिए।
वहीं कुछ कर्मचारियों का मानना है कि वित्तीय कार्यों में लंबे अनुभव और कार्यालय की आवश्यकता को देखते हुए उन्हें जिम्मेदारी दी गई होगी। हालांकि इस संबंध में विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
कर्मचारियों का नियमित रूप से स्थानांतरण
जिला परिषद कार्यालय आने वाले लोगों का भी कहना है कि जब अन्य कर्मचारियों का नियमित रूप से स्थानांतरण होता है, तो फिर इतने लंबे समय तक एक ही व्यक्ति का एक ही वित्तीय पद पर बने रहना जांच और स्पष्टता का विषय है।
इस संबंध में जिला परिषद के कार्यपालक अभियंता आशीष आनंद से उनका पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। इसलिए उनका पक्ष समाचार प्रकाशित होने तक प्राप्त नहीं हो सका।
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