बीसीसीएल की 12 घाटे वाली खदानों पर बंदी का खतरा, 3100 करोड़ के नुकसान के बाद प्रबंधन ने कर ली बड़ी तैयारी
बीसीसीएल की 12 घाटे वाली खदानों पर बंदी का खतरा, 3100 करोड़ के नुकसान के बाद प्रबंधन ने कर ली बड़ी तैयारी
Coal India: बीसीसीएल की 12 खदानें 2025-26 में 3100 करोड़ रुपये से अधिक के भारी घाटे में हैं, जिसके कारण प्रबंधन ने इन्हें बंद करने, विलय करने या पुनर् ...और पढ़ें

कोयला खदान का निरीक्षण करते हुए बीसीसीएल सीएमडी मनोज अग्रवाल। (फाइल फोटो)
HIGHLIGHTS
बीसीसीएल की 12 खदानें 3100 करोड़ से अधिक घाटे में।
प्रबंधन घाटे वाली खदानों को बंद करने, विलय करने की तैयारी में।
उत्पादन लागत वृद्धि और कम ऑफटेक मुख्य कारण।
आशीष अंबष्ठ, धनबाद। Bharat Coking Coal Limited लगातार बढ़ते उत्पादन लागत और घटते आफटेक के कारण भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) की 12 खदानें और पैच वित्त वर्ष 2025-26 में भारी घाटे में चली गई हैं। जीएल लिंक्ड कास्ट शीट के अनुसार इन परियोजनाओं को कुल मिलाकर 3100 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
सबसे अधिक घाटा 572 करोड़ रुपये का रहा, जबकि सबसे कम 125 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया। इस स्थिति को देखते हुए बीसीसीएल प्रबंधन ने घाटे वाली खदानों को चरणबद्ध तरीके से बंद करने, कुछ का विलय करने तथा पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर ली है।
रविवार को सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई फंक्शनल डायरेक्टरों की बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करने की रणनीति तय की गई। हालांकि प्रबंधन इसको पूरी तरह से गोपनीय रखकर काम कर रही है।
कास्ट शीट के विश्लेषण में सामने आया है कि सबसे अधिक नुकसान ओपनकास्ट खदानों में हुआ है। ओवरबर्डन रिमूवल (ओबीआर) की अत्यधिक लागत, अपेक्षाकृत कम उत्पादन और कमजोर आफटेक के कारण प्रति टन उत्पादन लागत कई परियोजनाओं में चार से पांच हजार रुपये तक पहुंच गई।
प्रबंधन का मानना है कि अब केवल लाभ देने वाली खदानों का ही संचालन जारी रखा जाएगा, जबकि घाटे वाली परियोजनाओं को बंद करने, विलय करने अथवा आउटसोर्सिंग मॉडल पर निजी कंपनियों को सौंपने का विकल्प अपनाया जाएगा।
साथ ही इन खदानों की मशीनरी और जनशक्ति को लाभदायक परियोजनाओं में स्थानांतरित करने की भी योजना है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 तक कुल घाटे में 50 प्रतिशत कमी लाने का लक्ष्य रखा है।
सबसे अधिक 572 करोड़ रुपये का घाटा कतरास क्षेत्र की एकेडब्ल्यूएमसी डिपार्टमेंटल ओपनकास्ट खदान में हुआ। यहां 4.63 लाख टन उत्पादन और 4.46 लाख टन आफटेक के बावजूद प्रति टन लागत 4,232.74 रुपये तक पहुंच गई।
दूसरे स्थान पर लोदना क्षेत्र के अमलगमेटेड जोयरामपुर पैच-डी को 415.19 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जहां 167 लाख घनमीटर ओबीआर के कारण प्रति टन लागत 3,377.50 रुपये रही।
सीवी एरिया की बसंतीमाता-दहीबाड़ी ओसीपी को 342 करोड़ और पीबी एरिया के गोपालचक फायर पैच को 324.83 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। गोपालचक में आग प्रभावित क्षेत्र होने से उत्पादन प्रभावित रहा और प्रति टन लागत 4,827 रुपये तक पहुंच गई।
बीसीसीएल की 12 घाटे वाली खदानें : एरिया वार स्थिति
कतरास एरिया : एकेडब्ल्यूएमसी डिपार्टमेंटल ओपनकास्ट खदान 572 करोड़ रुपये के घाटे के साथ सबसे अधिक नुकसान वाली परियोजना रही। उत्पादन और आफटेक के मुकाबले अत्यधिक लागत ने इसे सबसे घाटे वाली खदान बना दिया।
लोदना एरिया :अमलगमेटेड जोयरामपुर पैच-डी (415. करोड़) और अमलगमेटेड एनटीएसटी जीनागोरा (273. करोड़) दोनों परियोजनाएं भारी घाटे में रहीं। अधिक ओबीआर, कम उत्पादन और कमजोर आफटेक इनके नुकसान का प्रमुख कारण रहा।
सीवी एरिया: बसंतीमाता-दहीबाड़ी ओसीपी को 342.71 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। सीमित उत्पादन और कम आफटेक के कारण यह परियोजना लगातार नुकसान झेल रही है।
पीबी एरिया :गोपालीचक फायर पैच को 324.83 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। आग प्रभावित क्षेत्र होने से उत्पादन प्रभावित हुआ और प्रति टन लागत काफी बढ़ गई।
डब्ल्यूजे एरिया : मुनीडीह माइन 15/16 सीम में 271 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया गया। अंडरग्राउंड खदान में अधिक उत्पादन लागत और अपेक्षाकृत कम उत्पादन से नुकसान बढ़ा।
ब्लाक-टू एरिया : अमलगमेटेड परियोजना को 169 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। उत्पादन ठीक रहने के बावजूद अधिक ओबीआर के कारण परियोजना लाभ में नहीं आ सकी।
ब्लाक-फोर : ब्लाक-फोर ओसीपी में 158.15 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। कम उत्पादन और अधिक लागत के कारण संचालन आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं रहा।
ईजे एरिया : एनजीकेसी ओसीएम (150.09 करोड़), एएसपी फायर पैच-ए (141.15 करोड़), तेतुलमारी ओसीएम पहाड़ी पैच (130.16 करोड़) और एनएकेसी यूजी (125.50 करोड़) सहित चार परियोजनाएं घाटे में रहीं। कम उत्पादन, अधिक ओबीआर और ऊंची प्रति टन लागत के कारण यह एरिया भी गंभीर आर्थिक दबाव में है।
Coal India: बीसीसीएल की 12 खदानें 2025-26 में 3100 करोड़ रुपये से अधिक के भारी घाटे में हैं, जिसके कारण प्रबंधन ने इन्हें बंद करने, विलय करने या पुनर् ...और पढ़ें

कोयला खदान का निरीक्षण करते हुए बीसीसीएल सीएमडी मनोज अग्रवाल। (फाइल फोटो)
HIGHLIGHTS
बीसीसीएल की 12 खदानें 3100 करोड़ से अधिक घाटे में।
प्रबंधन घाटे वाली खदानों को बंद करने, विलय करने की तैयारी में।
उत्पादन लागत वृद्धि और कम ऑफटेक मुख्य कारण।
आशीष अंबष्ठ, धनबाद। Bharat Coking Coal Limited लगातार बढ़ते उत्पादन लागत और घटते आफटेक के कारण भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) की 12 खदानें और पैच वित्त वर्ष 2025-26 में भारी घाटे में चली गई हैं। जीएल लिंक्ड कास्ट शीट के अनुसार इन परियोजनाओं को कुल मिलाकर 3100 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
सबसे अधिक घाटा 572 करोड़ रुपये का रहा, जबकि सबसे कम 125 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया। इस स्थिति को देखते हुए बीसीसीएल प्रबंधन ने घाटे वाली खदानों को चरणबद्ध तरीके से बंद करने, कुछ का विलय करने तथा पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर ली है।
रविवार को सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई फंक्शनल डायरेक्टरों की बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करने की रणनीति तय की गई। हालांकि प्रबंधन इसको पूरी तरह से गोपनीय रखकर काम कर रही है।
कास्ट शीट के विश्लेषण में सामने आया है कि सबसे अधिक नुकसान ओपनकास्ट खदानों में हुआ है। ओवरबर्डन रिमूवल (ओबीआर) की अत्यधिक लागत, अपेक्षाकृत कम उत्पादन और कमजोर आफटेक के कारण प्रति टन उत्पादन लागत कई परियोजनाओं में चार से पांच हजार रुपये तक पहुंच गई।
प्रबंधन का मानना है कि अब केवल लाभ देने वाली खदानों का ही संचालन जारी रखा जाएगा, जबकि घाटे वाली परियोजनाओं को बंद करने, विलय करने अथवा आउटसोर्सिंग मॉडल पर निजी कंपनियों को सौंपने का विकल्प अपनाया जाएगा।
साथ ही इन खदानों की मशीनरी और जनशक्ति को लाभदायक परियोजनाओं में स्थानांतरित करने की भी योजना है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 तक कुल घाटे में 50 प्रतिशत कमी लाने का लक्ष्य रखा है।
सबसे अधिक 572 करोड़ रुपये का घाटा कतरास क्षेत्र की एकेडब्ल्यूएमसी डिपार्टमेंटल ओपनकास्ट खदान में हुआ। यहां 4.63 लाख टन उत्पादन और 4.46 लाख टन आफटेक के बावजूद प्रति टन लागत 4,232.74 रुपये तक पहुंच गई।
दूसरे स्थान पर लोदना क्षेत्र के अमलगमेटेड जोयरामपुर पैच-डी को 415.19 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जहां 167 लाख घनमीटर ओबीआर के कारण प्रति टन लागत 3,377.50 रुपये रही।
सीवी एरिया की बसंतीमाता-दहीबाड़ी ओसीपी को 342 करोड़ और पीबी एरिया के गोपालचक फायर पैच को 324.83 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। गोपालचक में आग प्रभावित क्षेत्र होने से उत्पादन प्रभावित रहा और प्रति टन लागत 4,827 रुपये तक पहुंच गई।
बीसीसीएल की 12 घाटे वाली खदानें : एरिया वार स्थिति
कतरास एरिया : एकेडब्ल्यूएमसी डिपार्टमेंटल ओपनकास्ट खदान 572 करोड़ रुपये के घाटे के साथ सबसे अधिक नुकसान वाली परियोजना रही। उत्पादन और आफटेक के मुकाबले अत्यधिक लागत ने इसे सबसे घाटे वाली खदान बना दिया।
लोदना एरिया :अमलगमेटेड जोयरामपुर पैच-डी (415. करोड़) और अमलगमेटेड एनटीएसटी जीनागोरा (273. करोड़) दोनों परियोजनाएं भारी घाटे में रहीं। अधिक ओबीआर, कम उत्पादन और कमजोर आफटेक इनके नुकसान का प्रमुख कारण रहा।
सीवी एरिया: बसंतीमाता-दहीबाड़ी ओसीपी को 342.71 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। सीमित उत्पादन और कम आफटेक के कारण यह परियोजना लगातार नुकसान झेल रही है।
पीबी एरिया :गोपालीचक फायर पैच को 324.83 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। आग प्रभावित क्षेत्र होने से उत्पादन प्रभावित हुआ और प्रति टन लागत काफी बढ़ गई।
डब्ल्यूजे एरिया : मुनीडीह माइन 15/16 सीम में 271 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया गया। अंडरग्राउंड खदान में अधिक उत्पादन लागत और अपेक्षाकृत कम उत्पादन से नुकसान बढ़ा।
ब्लाक-टू एरिया : अमलगमेटेड परियोजना को 169 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। उत्पादन ठीक रहने के बावजूद अधिक ओबीआर के कारण परियोजना लाभ में नहीं आ सकी।
ब्लाक-फोर : ब्लाक-फोर ओसीपी में 158.15 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। कम उत्पादन और अधिक लागत के कारण संचालन आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं रहा।
ईजे एरिया : एनजीकेसी ओसीएम (150.09 करोड़), एएसपी फायर पैच-ए (141.15 करोड़), तेतुलमारी ओसीएम पहाड़ी पैच (130.16 करोड़) और एनएकेसी यूजी (125.50 करोड़) सहित चार परियोजनाएं घाटे में रहीं। कम उत्पादन, अधिक ओबीआर और ऊंची प्रति टन लागत के कारण यह एरिया भी गंभीर आर्थिक दबाव में है।
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