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सिर्फ पेपर ही नहीं, बनाने की प्रक्रिया की भी निगरानी कर रहा NTA... अब नहीं लगेगी सेंध?

सिर्फ पेपर ही नहीं, बनाने की प्रक्रिया की भी निगरानी कर रहा NTA... अब नहीं लगेगी सेंध?


मई में पेपर लीक के बाद, 21 जून को होने वाली नीट-यूजी री-एक्जाम के लिए NTA ने एक नया और बेहद सुरक्षित सिस्टम लागू किया है। ...और पढ़ें










डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मई में नीट-यूजी परीक्षा के पेपर लीक और उसके बाद परीक्षा रद होने की घटना से सबक लेते हुए, 21 जून को होने वाले री-एक्जाम के लिए एक बेहद सुरक्षित और नया सिस्टम तैयार किया गया है।


इस नई प्रणाली के मूल में एक बहुत बड़ा क्वेश्चन बैंक, अधिक पेपर-सेटर और ऐसी सख्त पाबंदियां शामिल हैं जिनसे यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी व्यक्ति फाइनल पेपर को न तो जान सके और न ही देख सके।

सूत्रों के अनुसार, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने 180 प्रश्नों वाले फाइनल पेपर के लिए प्रश्नों के पूल का काफी विस्तार किया है और सवाल तैयार करने वाले विशेषज्ञों की संख्या भी बढ़ा दी गई है।
पेपर-मेकिंग की सुरक्षा पर विशेष जोर

इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य यह है कि अगर स्रोत स्तर पर किसी को आंशिक जानकारी मिल भी जाए, तो उसका कोई फायदा न हो। संशोधित प्रणाली के तहत, किसी विशेषज्ञ द्वारा तैयार किया गया प्रश्न री-एक्जाम में इस्तेमाल किया जा सकता है, किसी अन्य परीक्षा के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है, या ऐसा भी हो सकता है कि उसका कभी उपयोग ही न हो।

पहले केवल छपे हुए प्रश्न पत्र की सुरक्षा पर ध्यान दिया जाता था, लेकिन अब ध्यान पेपर बनाने की प्रक्रिया को सुरक्षित करने पर है। अगर प्रश्नों का पूल छोटा हो, तो कोई भी व्यक्ति कुछ सवालों को देखकर पूरी परीक्षा का अंदाजा लगा सकता है। लेकिन पूल बड़ा होने पर ऐसा अनुमान लगाना लगभग असंभव हो जाता है।
गेस पेपर से मेल खाने की गुंजाइश खत्म

अधिकारियों के अनुसार, रद की गई 3 मई की परीक्षा में 120 से अधिक प्रश्न पहले से सर्कुलेट किए गए एक गेस पेपर से मेल खाते थे। इस प्रक्रिया से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि अगर क्वेश्चन पूल छोटा होता है, तो एक तथाकथित गेस पेपर भी फाइनल पेपर के बेहद करीब पहुंच सकता है।


नई व्यवस्था के तहत, विशेषज्ञों से केंद्रीय क्वेश्चन बैंक में योगदान देने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्हें यह नहीं बताया गया कि उनके प्रश्नों का उपयोग कैसे, कब और फाइनल नीट पेपर में होगा या नहीं। इस सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि किसी भी व्यक्ति के पास प्रश्नों की पूरी तस्वीर न हो।


यहां तक कि सवाल बनाने वाले विशेषज्ञों को यह भी नहीं पता होता कि उनके द्वारा भेजे गए प्रश्न नीट, जेईई या किसी अन्य परीक्षा के लिए हैं। यह नया ढांचा उन सभी दावों को खोखला कर देता है जिनमें किसी इनसाइडर द्वारा पेपर जानने की बात कही जाती है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम

जांचकर्ता अब इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि क्या पिछली बार सेंधमारी केवल ट्रांसपोर्ट या परीक्षा केंद्र पर होने के बजाय गोपनीय पेपर-सेटिंग प्रक्रिया के दौरान ही हो गई थी।

इसके समानांतर पेपर डिलीवरी की सुरक्षा में भी व्यापक बदलाव किए गए हैं। परीक्षा को सुरक्षित बनाने के लिए पांच लाख से अधिक कर्मियों को तैनात किया जाएगा। केंद्रों पर सीसीटीवी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी होगी, उम्मीदवारों का आधार बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन किया जाएगा, और प्रश्न पत्रों को भारतीय वायुसेना के विमानों द्वारा परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा।


अधिकारियों ने यह भी बताया कि इतने बड़े क्वेश्चन बैंक का निर्माण दरअसल 2027 से नीट-यूजी को कंप्यूटर आधारित टेस्टिंग मोड में शिफ्ट करने की बुनियादी तैयारी का हिस्सा है।
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