कहीं अंतरात्मा की आवाज, कहीं बता दिया गद्दार... झारखंड और कर्नाटक की क्रॉस वोटिंग ने कैसे पलट दिया 'खेल'?
कहीं अंतरात्मा की आवाज, कहीं बता दिया गद्दार... झारखंड और कर्नाटक की क्रॉस वोटिंग ने कैसे पलट दिया 'खेल'?
झारखंड राज्यसभा और कर्नाटक एमएलसी चुनावों में हुई क्रॉस वोटिंग ने भाजपा और कांग्रेस दोनों के राजनीतिक दोहरे मापदंडों को उजागर किया है। ...और पढ़ें

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार (फोटो- सोशल मीडिया)
झारखंड में हुए राज्यसभा चुनाव और कर्नाटक के विधान परिषद (MLC) चुनावों में हुए क्रॉस वोटिंग ने भारतीय राजनीति के एक पुराने ढर्रे को फिर से सामने ला दिया है। झारखंड राज्यसभा चुनाव में जहां कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडी गठबंधन को अपने ही विधायकों की क्रॉस-वोटिंग के कारण एक अतिरिक्त सीट गंवानी पड़ी,
वहीं, कर्नाटक में BJP के नेतृत्व वाले NDA को भी अपने आठ विधायकों के टूटने की वजह से हार का सामना करना पड़ा।
दरअसल, झारखंड में बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA के पास 24 विधायक थे, लेकिन वे निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के लिए 30 विधायकों का समर्थन हासिल करने में कामयाब रहे।
वहीं, दूसरी ओर इंडी गठबंधन के पास कुल 56 सीटें हैं, जो दो सीट जीतने के लिए पर्याप्त थे। लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार को मात्र 20 वोट ही मिले, जिसके कारण कांग्रेस उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा।
अगर बात करें कर्नाटक के MLC चुनाव की तो यहां 135 विधायकों कांग्रेस के पास और 64 विधायक बीजेपी के पास थे। इसमें 135 विधायकों वाली कांग्रेस को MLC चुनावों में 151 वोट मिले। जबकि बीजेपी के दो उम्मीदवारों को सिर्फ 56 वोट ही मिले, जो आठ वोट कम थे। BJP की सहयोगी पार्टी JD(S) के पास 18 विधायक थे, लेकिन उसके उम्मीदवार को सिर्फ 14 वोट मिले। जिसके कारण यहां से कांग्रेस उम्मीदवार ने जीत दर्ज की।
स्वागत भी आलोचना भी
सबसे दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही प्रमुख दल (कांग्रेस और भाजपा) इस मुद्दे पर राजनीतिक दोहरे मापदंड अपना रहे हैं। जब विरोधी दल के विधायक पाला बदलते हैं तो उसे अंतरात्मा की आवाज कहकर स्वागत किया जाता है, लेकिन जब अपने ही विधायक धोखा देते हैं तो उन्हें गद्दार और धन-बल का शिकार बताया जाता है।
एक ओर झारखंड में तो बीजेपी ने पाला बदलने वाले विधायकों का स्वागत किया है, लेकिन कर्नाटक में उसने पार्टी से गद्दारी करने वालों की पहचान के लिए जांच शुरू कर दी है। इसी तरह, कांग्रेस ने झारखंड में क्रॉस-वोटर्स को लुभाने के लिए BJP द्वारा पैसे के इस्तेमाल की आलोचना की, लेकिन कर्नाटक में 'अंतरात्मा की आवाज पर वोट' की तारीफ की।
कांग्रेस सरकार पर भरोसा
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि नतीजों से कांग्रेस सरकार में भरोसा झलकता है और उन्होंने उन विधायकों का शुक्रिया अदा किया जिन्होंने पार्टी लाइन से हटकर पार्टी का समर्थन किया।
झारखंड में BJP नेताओं ने नतीजों को राज्य में NDA के विकास एजेंडे में जनता के भरोसे का प्रतीक बताया।
झारखंड राज्यसभा और कर्नाटक एमएलसी चुनावों में हुई क्रॉस वोटिंग ने भाजपा और कांग्रेस दोनों के राजनीतिक दोहरे मापदंडों को उजागर किया है। ...और पढ़ें

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार (फोटो- सोशल मीडिया)
झारखंड में हुए राज्यसभा चुनाव और कर्नाटक के विधान परिषद (MLC) चुनावों में हुए क्रॉस वोटिंग ने भारतीय राजनीति के एक पुराने ढर्रे को फिर से सामने ला दिया है। झारखंड राज्यसभा चुनाव में जहां कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडी गठबंधन को अपने ही विधायकों की क्रॉस-वोटिंग के कारण एक अतिरिक्त सीट गंवानी पड़ी,
वहीं, कर्नाटक में BJP के नेतृत्व वाले NDA को भी अपने आठ विधायकों के टूटने की वजह से हार का सामना करना पड़ा।
दरअसल, झारखंड में बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA के पास 24 विधायक थे, लेकिन वे निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के लिए 30 विधायकों का समर्थन हासिल करने में कामयाब रहे।
वहीं, दूसरी ओर इंडी गठबंधन के पास कुल 56 सीटें हैं, जो दो सीट जीतने के लिए पर्याप्त थे। लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार को मात्र 20 वोट ही मिले, जिसके कारण कांग्रेस उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा।
अगर बात करें कर्नाटक के MLC चुनाव की तो यहां 135 विधायकों कांग्रेस के पास और 64 विधायक बीजेपी के पास थे। इसमें 135 विधायकों वाली कांग्रेस को MLC चुनावों में 151 वोट मिले। जबकि बीजेपी के दो उम्मीदवारों को सिर्फ 56 वोट ही मिले, जो आठ वोट कम थे। BJP की सहयोगी पार्टी JD(S) के पास 18 विधायक थे, लेकिन उसके उम्मीदवार को सिर्फ 14 वोट मिले। जिसके कारण यहां से कांग्रेस उम्मीदवार ने जीत दर्ज की।
स्वागत भी आलोचना भी
सबसे दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही प्रमुख दल (कांग्रेस और भाजपा) इस मुद्दे पर राजनीतिक दोहरे मापदंड अपना रहे हैं। जब विरोधी दल के विधायक पाला बदलते हैं तो उसे अंतरात्मा की आवाज कहकर स्वागत किया जाता है, लेकिन जब अपने ही विधायक धोखा देते हैं तो उन्हें गद्दार और धन-बल का शिकार बताया जाता है।
एक ओर झारखंड में तो बीजेपी ने पाला बदलने वाले विधायकों का स्वागत किया है, लेकिन कर्नाटक में उसने पार्टी से गद्दारी करने वालों की पहचान के लिए जांच शुरू कर दी है। इसी तरह, कांग्रेस ने झारखंड में क्रॉस-वोटर्स को लुभाने के लिए BJP द्वारा पैसे के इस्तेमाल की आलोचना की, लेकिन कर्नाटक में 'अंतरात्मा की आवाज पर वोट' की तारीफ की।
कांग्रेस सरकार पर भरोसा
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि नतीजों से कांग्रेस सरकार में भरोसा झलकता है और उन्होंने उन विधायकों का शुक्रिया अदा किया जिन्होंने पार्टी लाइन से हटकर पार्टी का समर्थन किया।
झारखंड में BJP नेताओं ने नतीजों को राज्य में NDA के विकास एजेंडे में जनता के भरोसे का प्रतीक बताया।
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