ऑनलाइन रिसर्च, 2000 से ज्यादा कॉल्स और सेल्फी वाली कहानी... पुणे के केतन हत्याकांड की पूरी टाइमलाइन
ऑनलाइन रिसर्च, 2000 से ज्यादा कॉल्स और सेल्फी वाली कहानी... पुणे के केतन हत्याकांड की पूरी टाइमलाइन
पुणे में रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में मंगेतर सिया गोयल और चेतन चौधरी गिरफ्तार हुए हैं। आरोपियों ने केतन को लोहागढ़ किले की ...और पढ़ें

केतन हत्याकांड की टाइमलाइन।
डिजिटल डेस्क, पुणे। महाराष्ट्र के पुणे में 25 साल के रियल स्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल के हत्याकांड ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस मामले में केतन की मंगेतर सिया गोयल और चेतन चौधरी नाम के युवक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है और इन्हीं दोनों पर केतन की हत्या का आरोप लगा है।
हत्याकांड की जांच कर रही पुलिस का दावा है कि आरोपी चेतन चौधरी ने घटना वाले दिन अपना मोबाइल फोन अपनी 'मार्केट यार्ड' वाली दुकान पर छोड़ दिया था और पकड़े जाने से बचने के लिए एक कर्मचारी का फोन साथ ले गया था। जांच के तहत उस कर्मचारी से भी पूछताछ की जा रही है जिसका फोन इस्तेमाल किया गया था।
केतन को मारने का काफी दिनों से प्लान बना रहे थे आरोपी
जांचकर्ताओं का यह भी आरोप है कि सिया गोयल (20) और चेतन चौधरी (22) ने केतन अग्रवाल को मारने के कई तरीकों (जैसे जहर देना) के बारे में ऑनलाइन जानकारी जुटाई थी।

इसके बाद उन्होंने लोहागढ़ किले में एक सुनसान जगह चुनी, जहां से उसे खाई में धकेलने पर ऐसा लगे कि वह गलती से गिर गया है। आइए जानते हैं इस घटनाक्रम की पूरी टाइमलाइन...
जिस दिन केतन की मौत हुई उस दिन क्या हुआ?वक्त सुबह 8:30 बजे। केतन और सिया लोहागढ़ किले के लिए निकले। 18 जून को सिया गोयल के जन्मदिन से एक दिन पहले उसने लोहागढ़ किले की ट्रेकिंग पर जाने की जिद की। ये दोनों सुबह करीब 8:30 बजे गहुंजे स्थित अपने घर से निकले।
सुबह साढ़े नौ बजे के करीब ये लोग लोहागढ़ किले पहुंचे। पुलिस की जांच के अनुसार, सिया गोयल और केतन अग्रवाल 18 जून को सुबह 9 बजे से 9:30 बजे के बीच गहुंजे से गाड़ी चलाकर लोहागढ़ किले की तलहटी में पहुंचे।
इसके बाद इन दोनों ने किले की ओर ट्रेकिंग की। जांचकर्ताओं का आरोप है कि चेतन चौधरी पहले ही वहां पहुंच चुका था। चेतन टू-व्हीलर से लोहागढ़ पहुंचा था। पुलिस के अनुसार, चेतन चौधरी पहले ही टू-व्हीलर से किले पर पहुंच चुका था और वह वहां केतन और सिया का इंतजार कर रहा था।
जांचकर्ताओं का आरोप है कि चेतन ने पहले ही किले पर एक सुनसान जगह चुन ली थी, जहां गवाहों के मिलने का जोखिम कम से कम हो और अपराध को अंजाम दिया जा सके।
तीन बार पहले भी हो चुकी थी केतन को मारने की कोशिश31 मई को पहली बार सिया ने केतन को लोहागढ़ किले की खाई में धक्का दिया था लेकिन वह झाड़ियों में गिर गया था और बच गया। आरोप है कि इस दौरान सिया ने केतन से कहा था कि उसने सांप से बचाने के लिए धक्का दिया था।
फिर 4 जून को दूसरी कोशिश की गई। पुलिस का कहना है कि केतन को मारने की दूसरी कोशिश उस वक्त नाकाम हो गई जब केतन की मां ने उसे लोहागढ़ किले जाने की इजाजत नहीं दी।
14 जून को तीसरी कोशिश। इसके बाद सिया किसी तरह से केतन को लोहागढ़ किले पर लाने में सफल हो गई लेकिन रविवार वाला दिन होने की वजह से वहां भीड़ ज्यादा थी और इस वजह से प्लान में बदलाव किया गया।
ट्रैकिंग से बचने के लिए चेतन ने बदला फोन
पुलिस का दावा है कि चेतन चौधरी ने जान-बूझकर अपना मोबाइल फोन पुणे के मार्केट यार्ड में अपनी दुकान पर छोड़ दिया और ट्रैकिंग से बचने के लिए अपने एक कर्मचारी के फोन का इस्तेमाल किया। जांच के तहत उस कर्मचारी से पूछताछ की जा रही है।
33°C गर्मी में हुडी
किले के टिकट काउंटर के सीसीटीवी फुटेज में केतन और सिया को एक साथ चलते हुए देखा गया, जबकि एक तीसरा व्यक्ति उनसे कुछ मीटर पीछे चल रहा था। बताया जा रहा है कि 33 डिग्री सेल्सियस तापमान के बावजूद उस व्यक्ति ने शॉर्ट्स और हुडी पहनी हुई थी। उसने हुडी का हुड अपने चेहरे पर नीचे तक खींचा हुआ था और सिर पर हेडसेट भी लगाया था, जिससे उसकी पहचान करना मुश्किल हो गया।

पुलिस ने बताया कि चौधरी ने किले की चोटी पर 10 मिनट से भी कम समय बिताया और चढ़ने-उतरने का काम 50 मिनट से भी कम समय में पूरा कर लिया। जांचकर्ताओं का मानना है कि उनकी यह गतिविधि कथित योजना के मुताबिक ही थी।
सुबह 10:30 बजे दिया गया धक्का
जांचकर्ताओं का आरोप है कि सिया गोयल और चेतन चौधरी ने एक सुनसान चट्टान के किनारे से अग्रवाल को 400 फुट गहरी खाई में धक्का दे दिया। पुलिस का अनुमान है कि अग्रवाल की मौत सुबह करीब 10:30 बजे हुई।
तीन घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन
सुरक्षा कर्मियों और लोनावला ग्रामीण पुलिस ने लगभग तीन घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद अग्रवाल का शव बरामद किया।

पुलिस का आरोप है कि सिया गोयल ने परिवार के सदस्यों और स्थानीय लोगों को बताकर और खुद को शोक में डूबी मंगेतर के तौर पर पेश करके इस घटना को एक दुर्घटना दिखाने की कोशिश की।
जांच से दो लोगों की गिरफ्तारी कैसे हुई?
शुरुआत में इसे दुर्घटनावश मौत का मामला दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में पुलिस के पास ऐसे सबूत मिलने का दावा करने के बाद यह हत्या की जांच में बदल गया जिनसे पता चलता था कि यह पहले से सोची-समझी साजिश थी।

पूछताछ के दौरान, जांचकर्ताओं ने बताया कि जब दोनों आरोपियों का आमना-सामना कराया गया तो उन्होंने एक-दूसरे पर आरोप लगाए। दोनों ने एक-दूसरे पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया। सिया गोयल और चेतन चौधरी को 23 जून को गिरफ्तार किया गया था और जांच जारी रहने तक वे पुलिस हिरासत में हैं।
2,004 कॉल और एक कैफे में मुलाकात
जांचकर्ताओं के मुताबिक, दोनों ने केतन को मारने के तरीकों (जैसे जहर देना) के बारे में जानकारी जुटाई थी। इसके बाद उन्होंने लोहागढ़ किले में एक ऐसी सुनसान जगह चुनी, जहां से उसे खाई में धकेलने पर ऐसा लगे कि वह गलती से गिर गया।
पुलिस का आरोप है कि आरोपियों ने किले का एक कम भीड़-भाड़ वाला हिस्सा चुना और 18 जून को योजना को अंजाम देने से पहले शक से बचने के लिए अपनी हरकतों में तालमेल बिठाया। शुरुआत में इस घटना को गलती से गिरने का मामला माना गया था। हालांकि, बाद की जांच के बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया।

पुलिस का यह भी दावा है कि घटना से कई महीने पहले दोनों आरोपी लगातार एक-दूसरे के संपर्क में थे। कॉल डिटेल रिकॉर्ड से पता चलता है कि उन्होंने 2,004 फोन कॉल किए और छह महीनों में लगभग 238 घंटे तक बात की। पुलिस का यह भी आरोप है कि अग्रवाल की मौत से एक दिन पहले दोनों ने पुणे के एक कैफे में मिलकर अपनी योजना को अंतिम रूप दिया था।
पुणे में रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में मंगेतर सिया गोयल और चेतन चौधरी गिरफ्तार हुए हैं। आरोपियों ने केतन को लोहागढ़ किले की ...और पढ़ें

केतन हत्याकांड की टाइमलाइन।
डिजिटल डेस्क, पुणे। महाराष्ट्र के पुणे में 25 साल के रियल स्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल के हत्याकांड ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस मामले में केतन की मंगेतर सिया गोयल और चेतन चौधरी नाम के युवक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है और इन्हीं दोनों पर केतन की हत्या का आरोप लगा है।
हत्याकांड की जांच कर रही पुलिस का दावा है कि आरोपी चेतन चौधरी ने घटना वाले दिन अपना मोबाइल फोन अपनी 'मार्केट यार्ड' वाली दुकान पर छोड़ दिया था और पकड़े जाने से बचने के लिए एक कर्मचारी का फोन साथ ले गया था। जांच के तहत उस कर्मचारी से भी पूछताछ की जा रही है जिसका फोन इस्तेमाल किया गया था।
केतन को मारने का काफी दिनों से प्लान बना रहे थे आरोपी
जांचकर्ताओं का यह भी आरोप है कि सिया गोयल (20) और चेतन चौधरी (22) ने केतन अग्रवाल को मारने के कई तरीकों (जैसे जहर देना) के बारे में ऑनलाइन जानकारी जुटाई थी।

इसके बाद उन्होंने लोहागढ़ किले में एक सुनसान जगह चुनी, जहां से उसे खाई में धकेलने पर ऐसा लगे कि वह गलती से गिर गया है। आइए जानते हैं इस घटनाक्रम की पूरी टाइमलाइन...
जिस दिन केतन की मौत हुई उस दिन क्या हुआ?वक्त सुबह 8:30 बजे। केतन और सिया लोहागढ़ किले के लिए निकले। 18 जून को सिया गोयल के जन्मदिन से एक दिन पहले उसने लोहागढ़ किले की ट्रेकिंग पर जाने की जिद की। ये दोनों सुबह करीब 8:30 बजे गहुंजे स्थित अपने घर से निकले।
सुबह साढ़े नौ बजे के करीब ये लोग लोहागढ़ किले पहुंचे। पुलिस की जांच के अनुसार, सिया गोयल और केतन अग्रवाल 18 जून को सुबह 9 बजे से 9:30 बजे के बीच गहुंजे से गाड़ी चलाकर लोहागढ़ किले की तलहटी में पहुंचे।
इसके बाद इन दोनों ने किले की ओर ट्रेकिंग की। जांचकर्ताओं का आरोप है कि चेतन चौधरी पहले ही वहां पहुंच चुका था। चेतन टू-व्हीलर से लोहागढ़ पहुंचा था। पुलिस के अनुसार, चेतन चौधरी पहले ही टू-व्हीलर से किले पर पहुंच चुका था और वह वहां केतन और सिया का इंतजार कर रहा था।
जांचकर्ताओं का आरोप है कि चेतन ने पहले ही किले पर एक सुनसान जगह चुन ली थी, जहां गवाहों के मिलने का जोखिम कम से कम हो और अपराध को अंजाम दिया जा सके।
तीन बार पहले भी हो चुकी थी केतन को मारने की कोशिश31 मई को पहली बार सिया ने केतन को लोहागढ़ किले की खाई में धक्का दिया था लेकिन वह झाड़ियों में गिर गया था और बच गया। आरोप है कि इस दौरान सिया ने केतन से कहा था कि उसने सांप से बचाने के लिए धक्का दिया था।
फिर 4 जून को दूसरी कोशिश की गई। पुलिस का कहना है कि केतन को मारने की दूसरी कोशिश उस वक्त नाकाम हो गई जब केतन की मां ने उसे लोहागढ़ किले जाने की इजाजत नहीं दी।
14 जून को तीसरी कोशिश। इसके बाद सिया किसी तरह से केतन को लोहागढ़ किले पर लाने में सफल हो गई लेकिन रविवार वाला दिन होने की वजह से वहां भीड़ ज्यादा थी और इस वजह से प्लान में बदलाव किया गया।
ट्रैकिंग से बचने के लिए चेतन ने बदला फोन
पुलिस का दावा है कि चेतन चौधरी ने जान-बूझकर अपना मोबाइल फोन पुणे के मार्केट यार्ड में अपनी दुकान पर छोड़ दिया और ट्रैकिंग से बचने के लिए अपने एक कर्मचारी के फोन का इस्तेमाल किया। जांच के तहत उस कर्मचारी से पूछताछ की जा रही है।
33°C गर्मी में हुडी
किले के टिकट काउंटर के सीसीटीवी फुटेज में केतन और सिया को एक साथ चलते हुए देखा गया, जबकि एक तीसरा व्यक्ति उनसे कुछ मीटर पीछे चल रहा था। बताया जा रहा है कि 33 डिग्री सेल्सियस तापमान के बावजूद उस व्यक्ति ने शॉर्ट्स और हुडी पहनी हुई थी। उसने हुडी का हुड अपने चेहरे पर नीचे तक खींचा हुआ था और सिर पर हेडसेट भी लगाया था, जिससे उसकी पहचान करना मुश्किल हो गया।

पुलिस ने बताया कि चौधरी ने किले की चोटी पर 10 मिनट से भी कम समय बिताया और चढ़ने-उतरने का काम 50 मिनट से भी कम समय में पूरा कर लिया। जांचकर्ताओं का मानना है कि उनकी यह गतिविधि कथित योजना के मुताबिक ही थी।
सुबह 10:30 बजे दिया गया धक्का
जांचकर्ताओं का आरोप है कि सिया गोयल और चेतन चौधरी ने एक सुनसान चट्टान के किनारे से अग्रवाल को 400 फुट गहरी खाई में धक्का दे दिया। पुलिस का अनुमान है कि अग्रवाल की मौत सुबह करीब 10:30 बजे हुई।
तीन घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन
सुरक्षा कर्मियों और लोनावला ग्रामीण पुलिस ने लगभग तीन घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद अग्रवाल का शव बरामद किया।

पुलिस का आरोप है कि सिया गोयल ने परिवार के सदस्यों और स्थानीय लोगों को बताकर और खुद को शोक में डूबी मंगेतर के तौर पर पेश करके इस घटना को एक दुर्घटना दिखाने की कोशिश की।
जांच से दो लोगों की गिरफ्तारी कैसे हुई?
शुरुआत में इसे दुर्घटनावश मौत का मामला दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में पुलिस के पास ऐसे सबूत मिलने का दावा करने के बाद यह हत्या की जांच में बदल गया जिनसे पता चलता था कि यह पहले से सोची-समझी साजिश थी।

पूछताछ के दौरान, जांचकर्ताओं ने बताया कि जब दोनों आरोपियों का आमना-सामना कराया गया तो उन्होंने एक-दूसरे पर आरोप लगाए। दोनों ने एक-दूसरे पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया। सिया गोयल और चेतन चौधरी को 23 जून को गिरफ्तार किया गया था और जांच जारी रहने तक वे पुलिस हिरासत में हैं।
2,004 कॉल और एक कैफे में मुलाकात
जांचकर्ताओं के मुताबिक, दोनों ने केतन को मारने के तरीकों (जैसे जहर देना) के बारे में जानकारी जुटाई थी। इसके बाद उन्होंने लोहागढ़ किले में एक ऐसी सुनसान जगह चुनी, जहां से उसे खाई में धकेलने पर ऐसा लगे कि वह गलती से गिर गया।
पुलिस का आरोप है कि आरोपियों ने किले का एक कम भीड़-भाड़ वाला हिस्सा चुना और 18 जून को योजना को अंजाम देने से पहले शक से बचने के लिए अपनी हरकतों में तालमेल बिठाया। शुरुआत में इस घटना को गलती से गिरने का मामला माना गया था। हालांकि, बाद की जांच के बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया।

पुलिस का यह भी दावा है कि घटना से कई महीने पहले दोनों आरोपी लगातार एक-दूसरे के संपर्क में थे। कॉल डिटेल रिकॉर्ड से पता चलता है कि उन्होंने 2,004 फोन कॉल किए और छह महीनों में लगभग 238 घंटे तक बात की। पुलिस का यह भी आरोप है कि अग्रवाल की मौत से एक दिन पहले दोनों ने पुणे के एक कैफे में मिलकर अपनी योजना को अंतिम रूप दिया था।
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