रांची से गायब बच्चे तपस्विनी एक्सप्रेस से पहुंचे पुरी, 16 घंटे के सफर में न टीटीई ने टोका न आरपीएफ ने
रांची से गायब बच्चे तपस्विनी एक्सप्रेस से पहुंचे पुरी, 16 घंटे के सफर में न टीटीई ने टोका न आरपीएफ ने
रांची से लापता हुए तीन बच्चे तपस्विनी एक्सप्रेस से पुरी पहुंच गए, जिससे रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ...और पढ़ें

रांची से गायब बच्चे तपस्विनी एक्सप्रेस से पहुंचे पुरी
रांची से लापता तीन बच्चे तपस्विनी एक्सप्रेस से पुरी पहुंचे।
16 घंटे की यात्रा में टीटीई, आरपीएफ ने बच्चों को नहीं रोका।
हटिया स्टेशन का सीसीटीवी खराब होने से जांच प्रभावित हुई।
संवाददाता, रांची। धुर्वा क्षेत्र से लापता हुए तीन बच्चों के मामले ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था और ट्रेनों में होने वाली निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक जून को रांची से लापता हुए करण, अर्जुन और शिवा तीन जून को तपस्विनी एक्सप्रेस से पुरी पहुंच गए, लेकिन करीब 16 घंटे से अधिक के लंबे सफर के दौरान न तो टिकट परीक्षक (टीटी) की नजर उन पर पड़ी और न ही रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने उन्हें लेकर कोई संदेह जताया।
इस पूरे घटनाक्रम ने रेलवे की कार्यप्रणाली और सुरक्षा तंत्र की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तपस्विनी एक्सप्रेस में सवार होकर पुरी पहुंचे
जानकारी के अनुसार, तीनों बच्चे घर से निकलने के बाद रेलवे स्टेशन पहुंचे और तपस्विनी एक्सप्रेस में सवार होकर पुरी तक पहुंच गए। इतनी लंबी दूरी तय करने के बावजूद किसी भी स्तर पर उनकी पहचान नहीं हो सकी।
आम तौर पर ट्रेन में टिकट जांच के दौरान बिना टिकट यात्रा करने वाले यात्रियों या अकेले सफर कर रहे नाबालिग बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जाता है, लेकिन इस मामले में ऐसा होता नहीं दिखा। यदि टीटी ने सतर्कता दिखाई होती तो बच्चों से पूछताछ कर उनकी स्थिति स्पष्ट की जा सकती थी और समय रहते उन्हें उनके घरवालों तक पहुंचाया जा सकता था।
बिना किसी रोक-टोक के लंबी दूरी तय कर गए
रेलवे सुरक्षा बल की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में आरपीएफ की तैनाती यात्रियों की सुरक्षा करने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए की जाती है। इसके बावजूद तीन नाबालिग बच्चे बिना किसी रोक-टोक के लंबी दूरी तय कर गए।
यदि स्टेशन या ट्रेन में किसी स्तर पर उनसे पूछताछ की जाती तो संभव है कि वे पुरी तक नहीं पहुंचते और उन्हें तत्काल सुरक्षित वापस भेजा जा सकता था।
हटिया स्टेशन का सीसीटीवी कैमरा भी हो गया था खराब
इस मामले की जांच के दौरान यह भी सामने आया कि तीन जून को दोपहर करीब डेढ़ बजे से शाम साढ़े चार बजे तक हटिया स्टेशन का सीसीटीवी कैमरा खराब था। इस कारण यह स्पष्ट नहीं हो सका कि बच्चे किस समय और किस प्लेटफॉर्म से ट्रेन में सवार हुए।
पुलिस ने इस संबंध में कोलकाता से फुटेज भी मंगाया, लेकिन तीन घंटे का महत्वपूर्ण वीडियो उपलब्ध नहीं हो सका। इससे जांच प्रभावित हुई और बच्चों की गतिविधियों का पूरा क्रम सामने नहीं आ पाया।
अंश और अंशिका का भी अपहरण कर ले जाया गया था ट्रेन से
पुलिस अब तक अर्जुन को बरामद कर चुकी है, जबकि करण और शिवा की तलाश जारी है। पुलिस की टीम पुरी और आसपास के क्षेत्रों में दोनों बच्चों की खोज में जुटी हुई है। इससे पहले अंश और अंशिका के अपहरण के मामले में भी बच्चों को ट्रेन के माध्यम से ले जाया गया था, लेकिन उस समय भी रेलवे सुरक्षा तंत्र को इसकी भनक नहीं लगी थी।
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर निगरानी व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया है। अकेले यात्रा कर रहे बच्चों, संदिग्ध परिस्थितियों में घूम रहे नाबालिगों और बिना अभिभावक के सफर करने वाले यात्रियों की पहचान के लिए टीटी और आरपीएफ को अधिक संवेदनशील और सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
इस मामले ने एक बार फिर रेलवे सुरक्षा व्यवस्था की जवाबदेही और सतर्कता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
रांची से लापता हुए तीन बच्चे तपस्विनी एक्सप्रेस से पुरी पहुंच गए, जिससे रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ...और पढ़ें

रांची से गायब बच्चे तपस्विनी एक्सप्रेस से पहुंचे पुरी
रांची से लापता तीन बच्चे तपस्विनी एक्सप्रेस से पुरी पहुंचे।
16 घंटे की यात्रा में टीटीई, आरपीएफ ने बच्चों को नहीं रोका।
हटिया स्टेशन का सीसीटीवी खराब होने से जांच प्रभावित हुई।
संवाददाता, रांची। धुर्वा क्षेत्र से लापता हुए तीन बच्चों के मामले ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था और ट्रेनों में होने वाली निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक जून को रांची से लापता हुए करण, अर्जुन और शिवा तीन जून को तपस्विनी एक्सप्रेस से पुरी पहुंच गए, लेकिन करीब 16 घंटे से अधिक के लंबे सफर के दौरान न तो टिकट परीक्षक (टीटी) की नजर उन पर पड़ी और न ही रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने उन्हें लेकर कोई संदेह जताया।
इस पूरे घटनाक्रम ने रेलवे की कार्यप्रणाली और सुरक्षा तंत्र की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तपस्विनी एक्सप्रेस में सवार होकर पुरी पहुंचे
जानकारी के अनुसार, तीनों बच्चे घर से निकलने के बाद रेलवे स्टेशन पहुंचे और तपस्विनी एक्सप्रेस में सवार होकर पुरी तक पहुंच गए। इतनी लंबी दूरी तय करने के बावजूद किसी भी स्तर पर उनकी पहचान नहीं हो सकी।
आम तौर पर ट्रेन में टिकट जांच के दौरान बिना टिकट यात्रा करने वाले यात्रियों या अकेले सफर कर रहे नाबालिग बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जाता है, लेकिन इस मामले में ऐसा होता नहीं दिखा। यदि टीटी ने सतर्कता दिखाई होती तो बच्चों से पूछताछ कर उनकी स्थिति स्पष्ट की जा सकती थी और समय रहते उन्हें उनके घरवालों तक पहुंचाया जा सकता था।
बिना किसी रोक-टोक के लंबी दूरी तय कर गए
रेलवे सुरक्षा बल की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में आरपीएफ की तैनाती यात्रियों की सुरक्षा करने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए की जाती है। इसके बावजूद तीन नाबालिग बच्चे बिना किसी रोक-टोक के लंबी दूरी तय कर गए।
यदि स्टेशन या ट्रेन में किसी स्तर पर उनसे पूछताछ की जाती तो संभव है कि वे पुरी तक नहीं पहुंचते और उन्हें तत्काल सुरक्षित वापस भेजा जा सकता था।
हटिया स्टेशन का सीसीटीवी कैमरा भी हो गया था खराब
इस मामले की जांच के दौरान यह भी सामने आया कि तीन जून को दोपहर करीब डेढ़ बजे से शाम साढ़े चार बजे तक हटिया स्टेशन का सीसीटीवी कैमरा खराब था। इस कारण यह स्पष्ट नहीं हो सका कि बच्चे किस समय और किस प्लेटफॉर्म से ट्रेन में सवार हुए।
पुलिस ने इस संबंध में कोलकाता से फुटेज भी मंगाया, लेकिन तीन घंटे का महत्वपूर्ण वीडियो उपलब्ध नहीं हो सका। इससे जांच प्रभावित हुई और बच्चों की गतिविधियों का पूरा क्रम सामने नहीं आ पाया।
अंश और अंशिका का भी अपहरण कर ले जाया गया था ट्रेन से
पुलिस अब तक अर्जुन को बरामद कर चुकी है, जबकि करण और शिवा की तलाश जारी है। पुलिस की टीम पुरी और आसपास के क्षेत्रों में दोनों बच्चों की खोज में जुटी हुई है। इससे पहले अंश और अंशिका के अपहरण के मामले में भी बच्चों को ट्रेन के माध्यम से ले जाया गया था, लेकिन उस समय भी रेलवे सुरक्षा तंत्र को इसकी भनक नहीं लगी थी।
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर निगरानी व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया है। अकेले यात्रा कर रहे बच्चों, संदिग्ध परिस्थितियों में घूम रहे नाबालिगों और बिना अभिभावक के सफर करने वाले यात्रियों की पहचान के लिए टीटी और आरपीएफ को अधिक संवेदनशील और सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
इस मामले ने एक बार फिर रेलवे सुरक्षा व्यवस्था की जवाबदेही और सतर्कता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
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