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'पैपराजी पर फिल्म बननी चाहिए...' सेलेब्स की प्राइवेसी में दखलअंदाजी पर भड़के Manoj Bajpayee! दे डाली ये नसीहत

पैपराजी पर फिल्म बननी चाहिए...' सेलेब्स की प्राइवेसी में दखलअंदाजी पर भड़के Manoj Bajpayee! दे डाली ये नसीहत

Manoj Bajpayee ने पैपराजी कल्चर, अपनी फिल्मों और करण जौहर द्वारा शाह रुख खान को अनफॉलो किए जाने पर अपनी राय रखी। ...और पढ़ें








पैपराजी कल्चर पर क्या है मनोज बाजपेयी की राय?

HIGHLIGHTS

पैपराजी कल्चर पर क्या है मनोज बाजपेयी की राय?


जुगनुमा को बताया अपनी महान फिल्म


करण जौहर के शाह रुख को अनफॉलो करने पर रखी राय



प्रियंका सिंह, मुंबई। आए दिन पैपराजी के आक्रामक बर्ताव, प्राइवेसी को ख्याल न रखने को लेकर सितारे परेशान रहे हैं। वही अभिनेत्री नेहा धूपिया ने तो उनकी क्लास लगाते हुए अभिनेत्रियों के बैक शाट यानी पीछे से शाट लेने पर डांट भी लगाई थी। ऐसे में पैपराजी कल्चर की क्या सीमा होनी चाहिए, सितारों से बातचीत का क्या सलीका होना चाहिए इस पर सवाल उठते रहे हैं।


हाल ही में मनोज बाजपेयी (Manoj Bajpayyee) ने इस कल्चर पर अपनी राय रखी है। उनसे हुई बातचीत के कुछ अंश...
क्या पैपराजियों के लिए कोई मर्यादा होनी चाहिए?

इस पर अपनी राय रखते हुए मनोज कहते हैं कि मुझे किसी भी नई चीज से कभी परहेज नहीं रहा है, लेकिन हर चीज एक व्यवहार के भीतर होनी चाहिए। जैसे जब पैपराजी जया बच्चन (Jaya Bachchan) जी से बात करते हैं, तो एक तमीज होनी चाहिए। अगर किसी समारोह में श्री अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) जी आ रहे है, तो पैपराजियों को तमीज से उन्हें संबोधित करना चाहिए। सीनियर एक्टर्स के साथ कैसे बात करना है, कैसे तस्वीरों के लिए निवेदन करना है वह तो आना चाहिए। इसकी ट्रेनिंग उन्हें मिलनी चाहिए।

पैपराजी पर बननी चाहिए फिल्म- मनोज

दूसरी बात हम अमेरिका से नहीं हैं, जहां पैपराजी बहुत आक्रामक होते हैं। हम हिंदुस्तानी हैं। भले ही आज की पीढ़ी पश्चिमी देशों से प्रभावित हो, लेकिन वह भी नहीं चाहते हैं कि कोई उसके घर में झांके। पैप्स के झांकने से लोगों को दिक्कत होती है। हमें इसका ख्याल रखना चाहिए। बाकी मुझे पैपराजियों से कभी कोई दिक्कत नहीं रही है। जितने युवा पैपराजी हैं, उन्हें जब काम करते हुए देखता हूं, तो लगता है कि उन पर तो फिल्म बनानी चाहिए। वह अपना खाना-पीना भूल कर एक लोकेशन से दूसरे लोकेशन तक भागते हैं।



मनोज आगे कहते हैं, 'मैं उनकी बहुत इज्जत करता हूं, लेकिन उनको सितारों से कैसे बर्ताव करना चाहिए, उनकी प्राइवेसी का कितना ख्याल रखना है, इस पर भी गंभीरता से सोचने की जरुरत है। रोजी-रोटी कमाने के लिए हर कोई बहुत मशक्कत करता है। खून-पसीना जलाता है, वह देखकर मैं उनकी मेहनत की सराहना कर रहा हूं, लेकिन साथ ही जहां गंभीरता से सोचने की जरुरत है, वो करने का भी निवेदन उनसे करना चाहूंगा'।


पिछले दिनों करण जौहर (Karan Johar) का शाह रुख खान (Shah Rukh Khan) को इंस्टाग्राम पर अनफॉलो करने की बात भी खबर बन गई थी। ऐसी खबरों में मनोज की कितनी दिलचस्पी होती है?

इस पर वह कहते हैं कि देखिए मैं इंडस्ट्री से ताल्लुक रखता हूं, लेकिन मैं उसके दूसरे कोने पर खड़ा हूं। मैं इंडस्ट्री के लोगों से तभी मिलता हूं, जब काम कर रहा होता हूं, उसके अलावा मैं अपनी दुनिया में व्यस्त रहता हूं। जिनके नामों का जिक्र किया है, उनके साथ मैंने कभी काम नहीं किया है, न मैं उनको जानता हूं।


आगे कमर्शियल फिल्मों के बीच मनोज जुगनुमा – द फेबल, जोरम जैसी इंडिपेंडेंट फिल्में भी करते हैं। इन फिल्मों को अपने करियर में किस कैटेगरी में रखते हैं?

इस पर मनोज आगे कहते हैं कि मैं उन्हें महान फिल्मों की श्रेणी में रखता हूं। खासकर जुगनुमा मेरी बेहतरीन फिल्मों में से एक है, जिसने मुझे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दी। वहां के दर्शक मुझे दिए। फिल्म ने लोगों को सोचने पर मजबूर किया। ऐसी फिल्मों के अपने खास दर्शक वर्ग होते हैं, जो उन फिल्मों को एंजाय करते हैं। उसकी कहानियों को लेकर वह आपस में बैठकर बात करते हैं और अपने-अपने ढंग से निष्कर्ष निकालते हैं।
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