एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रतिबंधित नहीं है भांग.. झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, दोषी को मिली राहत
एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रतिबंधित नहीं है भांग.. झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, दोषी को मिली राहत
झारखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है कि भांग (कैनबिस) मादक औषधि एवं मनोरोगी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत प्रतिबंधित नहीं है। अदालत ने सुनील सिंह की ...और पढ़ें

एनडीपीएस अधिनियम के तहत भांग रखने पर कोई दंड नहीं।
झारखंड हाईकोर्ट ने भांग को एनडीपीएस अधिनियम से बाहर बताया।
एनडीपीएस अधिनियम के तहत भांग रखने पर कोई दंड नहीं।
डिजिटल डेस्क, रांची।झारखंड हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि भांग (कैनबिस) मादक औषधि एवं मनोरोगी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत प्रतिबंधित पदार्थ नहीं माना गया है। ऐसे में इस अधिनियम के तहत इसके लिए कोई दंड नहीं है।
न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने इस मामले में सुनील सिंह द्वारा दायर अपील पर सुनवाई की। जिसमें अदालत ने उनके खिलाफ सुनाई गई सात साल के कठोर कारावास और 50,000 रुपये के जुर्माने की सजा को रद कर दिया।
मामले के अनुसार, सुनील सिंह को 17 सितंबर 2000 को जमशेदपुर पुलिस ने चाईबासा बस स्टैंड से गिरफ्तार किया था। बाद में 3 जुलाई 2009 को जमशेदपुर की एक विशेष अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया था। हालांकि, बाद में हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया था।
30 जून को पारित अपने आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि एनडीपीएस अधिनियम में भांग को प्रतिबंधित मादक पदार्थों और मनोरोगी पदार्थों की श्रेणी में नहीं रखा गया है। इसकी तुलना गांजा (मारिजुआना) से नहीं की जा सकती, जिसे अधिनियम में मादक पदार्थों की श्रेणी में शामिल किया गया है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पाया कि अभियोजन पक्ष द्वारा ऐसा कोई वैज्ञानिक या फॉरेंसिक प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी के पास बरामद पदार्थ गांजा था।
इसके अलावा राज्य सरकार की ओर से भी भांग के कब्जे और सेवन पर किसी भी प्रकार की रोक लगाने के संबंध में कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया है।
झारखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है कि भांग (कैनबिस) मादक औषधि एवं मनोरोगी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत प्रतिबंधित नहीं है। अदालत ने सुनील सिंह की ...और पढ़ें

एनडीपीएस अधिनियम के तहत भांग रखने पर कोई दंड नहीं।
झारखंड हाईकोर्ट ने भांग को एनडीपीएस अधिनियम से बाहर बताया।
एनडीपीएस अधिनियम के तहत भांग रखने पर कोई दंड नहीं।
डिजिटल डेस्क, रांची।झारखंड हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि भांग (कैनबिस) मादक औषधि एवं मनोरोगी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत प्रतिबंधित पदार्थ नहीं माना गया है। ऐसे में इस अधिनियम के तहत इसके लिए कोई दंड नहीं है।
न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने इस मामले में सुनील सिंह द्वारा दायर अपील पर सुनवाई की। जिसमें अदालत ने उनके खिलाफ सुनाई गई सात साल के कठोर कारावास और 50,000 रुपये के जुर्माने की सजा को रद कर दिया।
मामले के अनुसार, सुनील सिंह को 17 सितंबर 2000 को जमशेदपुर पुलिस ने चाईबासा बस स्टैंड से गिरफ्तार किया था। बाद में 3 जुलाई 2009 को जमशेदपुर की एक विशेष अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया था। हालांकि, बाद में हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया था।
30 जून को पारित अपने आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि एनडीपीएस अधिनियम में भांग को प्रतिबंधित मादक पदार्थों और मनोरोगी पदार्थों की श्रेणी में नहीं रखा गया है। इसकी तुलना गांजा (मारिजुआना) से नहीं की जा सकती, जिसे अधिनियम में मादक पदार्थों की श्रेणी में शामिल किया गया है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पाया कि अभियोजन पक्ष द्वारा ऐसा कोई वैज्ञानिक या फॉरेंसिक प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी के पास बरामद पदार्थ गांजा था।
इसके अलावा राज्य सरकार की ओर से भी भांग के कब्जे और सेवन पर किसी भी प्रकार की रोक लगाने के संबंध में कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया है।
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