Alpha ने जासूसी थ्रिलर का बिगाड़ा गणित, कमजोर कहानी सबसे बड़ी दुश्मन, 2 घंटे में निचोड़ लिया सब्र
Alpha ने जासूसी थ्रिलर का बिगाड़ा गणित, कमजोर कहानी सबसे बड़ी दुश्मन, 2 घंटे में निचोड़ लिया सब्र
आलिया भट्ट की फिल्म 'अल्फा' अब तक नहीं देखी, तो देखकर वक्त बर्बाद मत करिए। 2 घंटे में कुछ अच्छा पकाकर खा लीजिए, वरना इसे देखने में दिमाग पक जाएगा। फिल्म की कहानी से लेकर डायलॉग्स तक, कास्टिंग से लेकर एक्शन, शोर ज्यादा, असर कम।
अल्फा फिल्म की गलतियांआलिया भट्ट की लीड रोल वाली YRF स्पाई यूनिवर्स की नई फिल्म 'अल्फा' सिनेमाघरों में आ गई है। यह इस फ्रेंचाइजी की पहली ऐसी स्पाई-एक्शन फिल्म है जिसमें लीड रोल में केवल दो महिलाएं हैं। फिल्म में आलिया भट्ट और शर्वरी दोनों दमदार रोल्स में हैं, जबकि बॉबी देओल विलेन और अनिल कपूर भी एक अहम भूमिका में नजर आ रहे हैं। इस फिल्म को शिव रवैल ने डायरेक्ट किया है। ये तो थी फिल्म के बारे में मामूली जानकारी, जो आपको पता ही होगी, लेकिन अब जो मैं बताने वाली हूं उसके बाद देखने का प्लान भी होगा तो कैंसिल करने का मन करेगा। कुल मिलाकार, YRF ने स्पाई यूनिवर्स के नाम पर जितना हो सके लीपा-पोती की है और हमेशा की तरह इस बार भी खुद को कोसवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
पहले बात करते हैं आलिया भट्ट की, वैसे तो आलिया की एक्टिंग लगभग हर फिल्म में जोरदार होती है। इसमें भी है। उन्होंने एक्टिंग के मामले में पूरी कोशिश की है कि जितना हो सके कर डाले, क्योंकि एक्शन करते हुए वो किसी स्कूल गर्ल एक्टिविटी होल्डर से कम नहीं लग रही हैं। इसमें आलिया की गलती नहीं है, इस लेवल के एक्शन के लिए ये कास्टिंग पूरी तरह से बकवास है। आलिया की जगह अच्छी हाइट की एक्ट्रेस कोई भी होती तो चल जाती। अच्छे-भले एक्शन सीन्स पर पानी फिर गया है। हट्टे-कट्टे जवानों के साथ वो अकेले सिंगल पसली पर जैसे लड़ रही हैं, वो कहीं से भी सेट नहीं हो रहा है। एक्शन करती हुई आलिया बहुत फीकी पड़ गईं।
'एनिमल' के बाद बॉबी देओल की मंद परफॉर्मेंसदूसरे आते हैं बॉबी देओल और अनिल कपूर। एनिमल के बाद अल्फा को मैं बॉबी देओल का सबसे बड़ा डाउनफॉल कहूंगी। उन्होंने जो भी अब तक कमाया था, उसपर पानी फेर दिया है, खासकर हरियाणवी लहजे को जैसे उन्होंने बोला है, हरियाणा के लोग मुंह में पान भरकर भी वैसे नहीं बोलते होंगे। उन्हें तो बॉबी देओल पर भरपूर गुस्सा आया होगा। जितनी बार भी स्क्रीन पर आते हैं, ऐसा लगता है कुछ बड़ा होगा और तभी वो कुछ बोल देत हैं, मन किरकिरा हो जाता है।
अनिल कपूर को चढ़ा 'अल्फा' फीवर, शर्वरी को कम में निपटायाअनिल कपूर ने एक्टिंग की बहुत अच्छी कोशिश की है, लेकिन वो पूरी फिल्म में केवल अल्फा टाइटल को ही प्रमोट कर रहे हैं। सोते-जागते, हंसते-रोते, गुस्से में, शांति से, चौंकते हुए बस अल्फा-अल्फा बोलते रहते हैं। कोई डायलॉग बोलने से पहले अल्फा जरूर बोल देते हैं। शर्वरी जितनी दिखी हैं, उतने में उन्होंने काम अच्छा किया है। लेकिन उन्हें मौका कम मिला। कहा जा रहा था कि दो लीड एक्ट्रेसेस की फिल्म है, लेकिन इसमें हीरोइन केवल आलिया हैं। शर्वरी को फिलर की तरह इस्तेमाल किया गया है।
'अल्फा' की कहानी और डायलॉग्स chatgpt वालेअब, आते हैं कहानी और chatgpt वाले डायलॉग्स पर। कहानी तो जैसे जबरन बना दी गई हो कुछ भी। पहले एक्शन शूट कर लिया। एक्सप्रेशन ले लिए, देशभक्ति वाले बचकांड डायलॉग्स डाल दिए, स्पाई भी ले आए और फिर मन किया चलो 2 घंटे का सीक्वेंस शूट कर लेते हैं, तो कहानी के नाम पर कुछ भी बना दिया। फिल्म की कहानी आप मुझसे पूछेंगे तो मैं कहूंगी कोई कहानी ही नहीं है। ऐसा लगेगा कि 40 साल पहले की कोई पुरानी वॉर फिल्म देख लें, लेकिन ये ना देखें। और डायलॉग्स तो जैसे आधी नींद में लिखे गए हों। कौन क्या बोल रहा है और क्यों बोल रहा है, उसे खुद नहीं पता। फिल करने के लिए इतने सस्ते और बेबुनियाद डायलॉग्स हैं कि क्या कहें।
अल्फा के कुछ डायलॉग्स जो शायद पांचवी क्लास के बच्चे ने लिखे हैं:बॉबी देओल- इसकी मां का नाम जानकी था, हम इसे सीता बुलावेंगे।
आलिया भट्ट- एक कहानी सुनाती हूं। एक राक्षस था। घमंड उसका शस्त्र था। वो धोखे से राज करता था और झूठ से जीतता था। एक दिन एक राजकुमारी को अपने घर ले गया। इतिहास जानता है। ये कहानी कैसे खत्म हुई, पर इस बार सीता आज लंका खुद जलाने आई है।
बॉबी देओल- मैं जो बना रहा हूं, वो इतिहास है।
अनिल कपूर- फतेह को रोकोगी कैसे सीता। अपने जंगल का शेर है वो।
आलिया भट्ट- शुरू करो अग्निपरीक्षा
बॉबी देओल- इंडिया ने अल्फा की कदर नहीं की। अब इंडिया अल्फा से डरेगा
'धुरंधर' से प्रेरणा लेकर किया गुड़-गोबरकहानी से याद आया, 'धुरंधर' इतनी बड़ी हिट थी, तो कुछ तो प्रेरणा लेनी पड़ेगी ना। इसलिए सीन पलटकर हमजा की जगह फतेह सिंह को रख दिया गया है। कुछ मिनट आपको ऐसा लगेगा कि धुरंधर चेपी जा रही है। बॉबी देओल पाकिस्तानी जासूस हैं जो भारत को तबाह करने के लिए भारतीय सेना ज्वॉइन कर लेते हैं और सालों तक सबके बीच रहकर ठगते हैं। बॉबी देओल के भारत आने को धुरंधर की तरह ही हमजा जैसी एंट्री के तौर पर शूट किया गया है, बैकग्राउंड में बकायदा पंजाबी गाने के साथ, जो सुनकर और देखकर केवल गुस्सा आता है, एक नंबर की चीटरकॉक वाली हरकत।
ऋतिक रोशन का कैमियो कम, साइड कैरेक्टर ज्यादाचलिए, आखिरी में ऋतिक रोशन के कैमियो की भी बात कर लेते हैं। अरे, अगर ऋतिक रोशन को डालना ही था, तो कुछ बढ़िया इस्तेमाल कर लेते उनका। पहले तो मॉन्क बनाकर 5 मिनट में फैंस का माथा घुमा दिए कि अंदर से आवाज आने लगी हे कबीर उठ जा कुछ कर ले। बेचारे हमारे ग्रीक गड की एंट्री इतनी खट्टी कर दी, समझ नहीं आ रहा था कैमियो है या साइड कैरेक्टर। और आलिया पर ही इतना एक्शन आजमा लिया गया कि ऋतिक के लिए कुछ बचा ही नहीं था। वो बस बंदूक घुमाकर चले गए।
'अल्फा' की बॉक्स ऑफिस पर बस बच जाए इज्जतकहां चले थे 'धुरंधर' को टक्कर देने, कहां खुद की इज्जत बचाना ही भारी लग रहा है। राइटिंग से लेकर सीन प्रेजेंटेशन, कास्टिंग और डायलॉग्स सबकुछ इतना स्लो है कि कोई तुक नहीं बनता फिल्म देखने का। सबकुछ करने के चक्कर में, बराबर मात्रा में कुछ भी नहीं पड़ा और स्वाद जहरीला हो गया। स्पाई यूनिवर्स की ये पहली फिल्म है जिसने बॉक्स ऑफिस पर शुरुआत भी धीमी की है और आने वाले दिन बहुत मुश्किल होने वाले हैं।
आलिया भट्ट की फिल्म 'अल्फा' अब तक नहीं देखी, तो देखकर वक्त बर्बाद मत करिए। 2 घंटे में कुछ अच्छा पकाकर खा लीजिए, वरना इसे देखने में दिमाग पक जाएगा। फिल्म की कहानी से लेकर डायलॉग्स तक, कास्टिंग से लेकर एक्शन, शोर ज्यादा, असर कम।
पहले बात करते हैं आलिया भट्ट की, वैसे तो आलिया की एक्टिंग लगभग हर फिल्म में जोरदार होती है। इसमें भी है। उन्होंने एक्टिंग के मामले में पूरी कोशिश की है कि जितना हो सके कर डाले, क्योंकि एक्शन करते हुए वो किसी स्कूल गर्ल एक्टिविटी होल्डर से कम नहीं लग रही हैं। इसमें आलिया की गलती नहीं है, इस लेवल के एक्शन के लिए ये कास्टिंग पूरी तरह से बकवास है। आलिया की जगह अच्छी हाइट की एक्ट्रेस कोई भी होती तो चल जाती। अच्छे-भले एक्शन सीन्स पर पानी फिर गया है। हट्टे-कट्टे जवानों के साथ वो अकेले सिंगल पसली पर जैसे लड़ रही हैं, वो कहीं से भी सेट नहीं हो रहा है। एक्शन करती हुई आलिया बहुत फीकी पड़ गईं।
'एनिमल' के बाद बॉबी देओल की मंद परफॉर्मेंसदूसरे आते हैं बॉबी देओल और अनिल कपूर। एनिमल के बाद अल्फा को मैं बॉबी देओल का सबसे बड़ा डाउनफॉल कहूंगी। उन्होंने जो भी अब तक कमाया था, उसपर पानी फेर दिया है, खासकर हरियाणवी लहजे को जैसे उन्होंने बोला है, हरियाणा के लोग मुंह में पान भरकर भी वैसे नहीं बोलते होंगे। उन्हें तो बॉबी देओल पर भरपूर गुस्सा आया होगा। जितनी बार भी स्क्रीन पर आते हैं, ऐसा लगता है कुछ बड़ा होगा और तभी वो कुछ बोल देत हैं, मन किरकिरा हो जाता है।
अनिल कपूर को चढ़ा 'अल्फा' फीवर, शर्वरी को कम में निपटायाअनिल कपूर ने एक्टिंग की बहुत अच्छी कोशिश की है, लेकिन वो पूरी फिल्म में केवल अल्फा टाइटल को ही प्रमोट कर रहे हैं। सोते-जागते, हंसते-रोते, गुस्से में, शांति से, चौंकते हुए बस अल्फा-अल्फा बोलते रहते हैं। कोई डायलॉग बोलने से पहले अल्फा जरूर बोल देते हैं। शर्वरी जितनी दिखी हैं, उतने में उन्होंने काम अच्छा किया है। लेकिन उन्हें मौका कम मिला। कहा जा रहा था कि दो लीड एक्ट्रेसेस की फिल्म है, लेकिन इसमें हीरोइन केवल आलिया हैं। शर्वरी को फिलर की तरह इस्तेमाल किया गया है।
'अल्फा' की कहानी और डायलॉग्स chatgpt वालेअब, आते हैं कहानी और chatgpt वाले डायलॉग्स पर। कहानी तो जैसे जबरन बना दी गई हो कुछ भी। पहले एक्शन शूट कर लिया। एक्सप्रेशन ले लिए, देशभक्ति वाले बचकांड डायलॉग्स डाल दिए, स्पाई भी ले आए और फिर मन किया चलो 2 घंटे का सीक्वेंस शूट कर लेते हैं, तो कहानी के नाम पर कुछ भी बना दिया। फिल्म की कहानी आप मुझसे पूछेंगे तो मैं कहूंगी कोई कहानी ही नहीं है। ऐसा लगेगा कि 40 साल पहले की कोई पुरानी वॉर फिल्म देख लें, लेकिन ये ना देखें। और डायलॉग्स तो जैसे आधी नींद में लिखे गए हों। कौन क्या बोल रहा है और क्यों बोल रहा है, उसे खुद नहीं पता। फिल करने के लिए इतने सस्ते और बेबुनियाद डायलॉग्स हैं कि क्या कहें।
अल्फा के कुछ डायलॉग्स जो शायद पांचवी क्लास के बच्चे ने लिखे हैं:बॉबी देओल- इसकी मां का नाम जानकी था, हम इसे सीता बुलावेंगे।
आलिया भट्ट- एक कहानी सुनाती हूं। एक राक्षस था। घमंड उसका शस्त्र था। वो धोखे से राज करता था और झूठ से जीतता था। एक दिन एक राजकुमारी को अपने घर ले गया। इतिहास जानता है। ये कहानी कैसे खत्म हुई, पर इस बार सीता आज लंका खुद जलाने आई है।
बॉबी देओल- मैं जो बना रहा हूं, वो इतिहास है।
अनिल कपूर- फतेह को रोकोगी कैसे सीता। अपने जंगल का शेर है वो।
आलिया भट्ट- शुरू करो अग्निपरीक्षा
बॉबी देओल- इंडिया ने अल्फा की कदर नहीं की। अब इंडिया अल्फा से डरेगा
'धुरंधर' से प्रेरणा लेकर किया गुड़-गोबरकहानी से याद आया, 'धुरंधर' इतनी बड़ी हिट थी, तो कुछ तो प्रेरणा लेनी पड़ेगी ना। इसलिए सीन पलटकर हमजा की जगह फतेह सिंह को रख दिया गया है। कुछ मिनट आपको ऐसा लगेगा कि धुरंधर चेपी जा रही है। बॉबी देओल पाकिस्तानी जासूस हैं जो भारत को तबाह करने के लिए भारतीय सेना ज्वॉइन कर लेते हैं और सालों तक सबके बीच रहकर ठगते हैं। बॉबी देओल के भारत आने को धुरंधर की तरह ही हमजा जैसी एंट्री के तौर पर शूट किया गया है, बैकग्राउंड में बकायदा पंजाबी गाने के साथ, जो सुनकर और देखकर केवल गुस्सा आता है, एक नंबर की चीटरकॉक वाली हरकत।
ऋतिक रोशन का कैमियो कम, साइड कैरेक्टर ज्यादाचलिए, आखिरी में ऋतिक रोशन के कैमियो की भी बात कर लेते हैं। अरे, अगर ऋतिक रोशन को डालना ही था, तो कुछ बढ़िया इस्तेमाल कर लेते उनका। पहले तो मॉन्क बनाकर 5 मिनट में फैंस का माथा घुमा दिए कि अंदर से आवाज आने लगी हे कबीर उठ जा कुछ कर ले। बेचारे हमारे ग्रीक गड की एंट्री इतनी खट्टी कर दी, समझ नहीं आ रहा था कैमियो है या साइड कैरेक्टर। और आलिया पर ही इतना एक्शन आजमा लिया गया कि ऋतिक के लिए कुछ बचा ही नहीं था। वो बस बंदूक घुमाकर चले गए।
'अल्फा' की बॉक्स ऑफिस पर बस बच जाए इज्जतकहां चले थे 'धुरंधर' को टक्कर देने, कहां खुद की इज्जत बचाना ही भारी लग रहा है। राइटिंग से लेकर सीन प्रेजेंटेशन, कास्टिंग और डायलॉग्स सबकुछ इतना स्लो है कि कोई तुक नहीं बनता फिल्म देखने का। सबकुछ करने के चक्कर में, बराबर मात्रा में कुछ भी नहीं पड़ा और स्वाद जहरीला हो गया। स्पाई यूनिवर्स की ये पहली फिल्म है जिसने बॉक्स ऑफिस पर शुरुआत भी धीमी की है और आने वाले दिन बहुत मुश्किल होने वाले हैं।
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