'10 KM पैदल चलकर खपरैल के स्कूल में पढ़ने जाते', Infosys के CEO बनेंगे आशीष दाश; CM हेमंत सोरेन ने साझा की यादें
'10 KM पैदल चलकर खपरैल के स्कूल में पढ़ने जाते', Infosys के CEO बनेंगे आशीष दाश; CM हेमंत सोरेन ने साझा की यादें
सरायकेला के कृष्णापुर निवासी आशीष कुमार दाश 1 अप्रैल 2027 से इंफोसिस के नए सीईओ और प्रबंध निदेशक का पद संभालेंगे। उनका संघर्षपूर्ण बचपन और दृढ़ इच्छाश ...और पढ़ें

सरायकेला के राजनगर से लास एंजिल्स तक का सफर। तस्वीर कृष्णापुर गांव के घर की।
HIGHLIGHTS
दुर्गा पूजा में अपने गांव आते हैं आशीष, अभावों में बीता है बचपन।
सरायकेला के कृष्णापुर से लॉस एंजिल्स तक का शानदार सफर।
आईआईटी खड़गपुर और स्टैनफोर्ड से की उच्च शिक्षा प्राप्त।
जागरण टीम, जमशेदपुर/राजनगर/रांची। अभावों के बीच यदि दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो सफलता की कोई सीमा नहीं होती। सरायकेला-खरसावां जिले के छोटे से गांव कृष्णापुर के आशीष कुमार दाश ने इसे सच कर दिखाया है। कभी खपरैल और पुआल की झोपड़ी में जमीन पर बैठकर ककहरा सीखने वाले आशीष अब देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी इंफोसिस के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक (एमडी) होंगे।
कंपनी ने गुरुवार को पहली तिमाही के नतीजों के साथ उन्हें अपना नया सीईओ नामित किया है। वे एक अप्रैल 2027 से मौजूदा सीईओ सलिल पारेख की जगह लेंगे और अगले पांच साल तक कंपनी का नेतृत्व करेंगे।
संघर्ष से भरा रहा बचपन
वर्ष 1972 में जन्मे आशीष की प्रारंभिक शिक्षा गांव से सटे कुड़मा के एक साधारण प्राथमिक विद्यालय से हुई, जो संसाधनों के अभाव में पेड़ के नीचे या झोपड़ी में संचालित होता था। उस समय गांव में बिजली भी नहीं थी। पांचवीं के बाद उन्होंने राजनगर के बुनियादी विद्यालय में दाखिला लिया, जहां वे रोजाना करीब 10 किलोमीटर पैदल चलकर पढ़ने जाते थे।
राजनगर के राज्य संपोषित उच्च विद्यालय से दसवीं और चाईबासा के टाटा कालेज से इंटर (आईएससी) करने के बाद उन्होंने अपनी मेधा का लोहा मनवाया। आशीष ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान आइआइटी खड़गपुर से केमिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की और बाद में अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्लोबल लीडरशिप प्रोग्राम भी पूरा किया।
31 साल से इंफोसिस के साथ
इंजीनियरिंग के बाद आशीष ने इंदल, हीराकुंड में मैकेनिकल इंजीनियर के तौर पर करियर की शुरुआत की। वर्ष 1995 में वे सीनियर एंगेजमेंट मैनेजर के रूप में इन्फोसिस से जुड़े।
अपनी उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता के बल पर वे आज कंपनी के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट हैं और अमेरिका के लॉस एंजिल्स में रहकर कंपनी का ग्लोबल बिजनेस पोर्टफोलियो संभाल रहे हैं।
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प्रेरणा बना परिवार, पांच भाई में चौथे नंबर हैं आशीष
आशीष पांच भाइयों में चौथे स्थान पर हैं। सबसे बड़े भाई सनत कुमार दाश हैं। दूसरे भाई जयमुनी दाश वर्तमान में जीएसटी आयुक्त हैं और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के झारखंड की राज्यपाल रहने के दौरान उनके आप्त सचिव रह चुके हैं।
तीसरे भाई मानस रंजन दाश पंचायत समिति सदस्य होने के साथ पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा से जुड़े हैं। सबसे छोटे भाई उदयन दिनेश किशोर भी इंफोसिस भुवनेश्वर में कार्यरत हैं।
जमीन से आज भी जुड़े हैं आशीष, दुर्गा पूजा में आते हैं गांव
सफलता के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचने के बावजूद आशीष अपनी जड़ों को नहीं भूले। बड़े भाई सनत और मानस बताते हैं कि आशीष हर साल दुर्गा पूजा पर गांव जरूर आते हैं। इस दौरान पांचों भाइयों का परिवार एकजुट होकर समय बिताता है।
जब भी आशीष गांव आते हैं, ग्रामीणों से पूरी आत्मीयता से मिलते हैं और बच्चों को उच्च शिक्षा हासिल कर बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका यह शानदार सफर आज देशभर के युवाओं के लिए एक बड़ी मिसाल बन गया है।

हेमंत सोरेन ने आशीष कुमार दाश को दी शुभकामनाएं
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आशीष कुमार दाश को इंफोसिस का नामित सीईओ नियुक्त किए जाने पर उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी है। उन्होंने एक्स पर उन्हें बधाई देते हुए लिखा कि यह उनकी दूर की लीडरशिप, इनोवेशन के लिए पक्के कमिटमेंट और भारत की सबसे सम्मानित ग्लोबल टेक्नोलाजी कंपनियों में से एक में शानदार योगदान के लिए एक सही पहचान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें दावोस में वर्ल्ड इकोनामिक फोरम में उनके साथ अपनी बातचीत अच्छी तरह याद है, जहां हमने झारखंड के माइनिंग सेक्टर को बदलने, डिजिटल गवर्नेंस को मज़बूत करने और हमारे युवाओं को भविष्य के लिए तैयार स्किल्स से लैस करने के लिए एआइ और नई तकनीक का फ़ायदा उठाने पर गहरी चर्चा की थी।
उन्होंने भरोसा जताया कि उनके नेतृत्व में, झारखंड और इंफोसिस के बीच पार्टनरशिप और भी मज़बूत होगी, जिससे इनोवेशन, स्किलिंग और टेक्नोलाजी-ड्रिवन, इनक्लूसिव डवलपमेंट के नए मौके मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने बकायदा वर्ल्ड इकोनामिक फोरम के दौरान मुलाकात की तस्वीर भी साझा की है।
सरायकेला के कृष्णापुर निवासी आशीष कुमार दाश 1 अप्रैल 2027 से इंफोसिस के नए सीईओ और प्रबंध निदेशक का पद संभालेंगे। उनका संघर्षपूर्ण बचपन और दृढ़ इच्छाश ...और पढ़ें

सरायकेला के राजनगर से लास एंजिल्स तक का सफर। तस्वीर कृष्णापुर गांव के घर की।
HIGHLIGHTS
दुर्गा पूजा में अपने गांव आते हैं आशीष, अभावों में बीता है बचपन।
सरायकेला के कृष्णापुर से लॉस एंजिल्स तक का शानदार सफर।
आईआईटी खड़गपुर और स्टैनफोर्ड से की उच्च शिक्षा प्राप्त।
जागरण टीम, जमशेदपुर/राजनगर/रांची। अभावों के बीच यदि दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो सफलता की कोई सीमा नहीं होती। सरायकेला-खरसावां जिले के छोटे से गांव कृष्णापुर के आशीष कुमार दाश ने इसे सच कर दिखाया है। कभी खपरैल और पुआल की झोपड़ी में जमीन पर बैठकर ककहरा सीखने वाले आशीष अब देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी इंफोसिस के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक (एमडी) होंगे।
कंपनी ने गुरुवार को पहली तिमाही के नतीजों के साथ उन्हें अपना नया सीईओ नामित किया है। वे एक अप्रैल 2027 से मौजूदा सीईओ सलिल पारेख की जगह लेंगे और अगले पांच साल तक कंपनी का नेतृत्व करेंगे।
संघर्ष से भरा रहा बचपन
वर्ष 1972 में जन्मे आशीष की प्रारंभिक शिक्षा गांव से सटे कुड़मा के एक साधारण प्राथमिक विद्यालय से हुई, जो संसाधनों के अभाव में पेड़ के नीचे या झोपड़ी में संचालित होता था। उस समय गांव में बिजली भी नहीं थी। पांचवीं के बाद उन्होंने राजनगर के बुनियादी विद्यालय में दाखिला लिया, जहां वे रोजाना करीब 10 किलोमीटर पैदल चलकर पढ़ने जाते थे।
राजनगर के राज्य संपोषित उच्च विद्यालय से दसवीं और चाईबासा के टाटा कालेज से इंटर (आईएससी) करने के बाद उन्होंने अपनी मेधा का लोहा मनवाया। आशीष ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान आइआइटी खड़गपुर से केमिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की और बाद में अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्लोबल लीडरशिप प्रोग्राम भी पूरा किया।
31 साल से इंफोसिस के साथ
इंजीनियरिंग के बाद आशीष ने इंदल, हीराकुंड में मैकेनिकल इंजीनियर के तौर पर करियर की शुरुआत की। वर्ष 1995 में वे सीनियर एंगेजमेंट मैनेजर के रूप में इन्फोसिस से जुड़े।
अपनी उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता के बल पर वे आज कंपनी के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट हैं और अमेरिका के लॉस एंजिल्स में रहकर कंपनी का ग्लोबल बिजनेस पोर्टफोलियो संभाल रहे हैं।
प्रेरणा बना परिवार, पांच भाई में चौथे नंबर हैं आशीष
आशीष पांच भाइयों में चौथे स्थान पर हैं। सबसे बड़े भाई सनत कुमार दाश हैं। दूसरे भाई जयमुनी दाश वर्तमान में जीएसटी आयुक्त हैं और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के झारखंड की राज्यपाल रहने के दौरान उनके आप्त सचिव रह चुके हैं।
तीसरे भाई मानस रंजन दाश पंचायत समिति सदस्य होने के साथ पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा से जुड़े हैं। सबसे छोटे भाई उदयन दिनेश किशोर भी इंफोसिस भुवनेश्वर में कार्यरत हैं।
जमीन से आज भी जुड़े हैं आशीष, दुर्गा पूजा में आते हैं गांव
सफलता के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचने के बावजूद आशीष अपनी जड़ों को नहीं भूले। बड़े भाई सनत और मानस बताते हैं कि आशीष हर साल दुर्गा पूजा पर गांव जरूर आते हैं। इस दौरान पांचों भाइयों का परिवार एकजुट होकर समय बिताता है।
जब भी आशीष गांव आते हैं, ग्रामीणों से पूरी आत्मीयता से मिलते हैं और बच्चों को उच्च शिक्षा हासिल कर बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका यह शानदार सफर आज देशभर के युवाओं के लिए एक बड़ी मिसाल बन गया है।

हेमंत सोरेन ने आशीष कुमार दाश को दी शुभकामनाएं
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आशीष कुमार दाश को इंफोसिस का नामित सीईओ नियुक्त किए जाने पर उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी है। उन्होंने एक्स पर उन्हें बधाई देते हुए लिखा कि यह उनकी दूर की लीडरशिप, इनोवेशन के लिए पक्के कमिटमेंट और भारत की सबसे सम्मानित ग्लोबल टेक्नोलाजी कंपनियों में से एक में शानदार योगदान के लिए एक सही पहचान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें दावोस में वर्ल्ड इकोनामिक फोरम में उनके साथ अपनी बातचीत अच्छी तरह याद है, जहां हमने झारखंड के माइनिंग सेक्टर को बदलने, डिजिटल गवर्नेंस को मज़बूत करने और हमारे युवाओं को भविष्य के लिए तैयार स्किल्स से लैस करने के लिए एआइ और नई तकनीक का फ़ायदा उठाने पर गहरी चर्चा की थी।
उन्होंने भरोसा जताया कि उनके नेतृत्व में, झारखंड और इंफोसिस के बीच पार्टनरशिप और भी मज़बूत होगी, जिससे इनोवेशन, स्किलिंग और टेक्नोलाजी-ड्रिवन, इनक्लूसिव डवलपमेंट के नए मौके मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने बकायदा वर्ल्ड इकोनामिक फोरम के दौरान मुलाकात की तस्वीर भी साझा की है।
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