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बर्थ सर्टिफिकेट के नियमों में बदलाव: 1 साल से अधिक उम्र पर अब DM से लेनी होगी मंजूरी, रडार पर आंगनबाड़ी

बर्थ सर्टिफिकेट के नियमों में बदलाव: 1 साल से अधिक उम्र पर अब DM से लेनी होगी मंजूरी, रडार पर आंगनबाड़ी

केंद्र सरकार ने जन्म-मृत्यु पंजीकरण में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए नए नियम लागू किए हैं। अब एक साल से अधिक उम्र के बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र के लिए जि ...और पढ़ें








सरकार ने बच्चों के जन्म के निबंधन के नियमों में किया बड़ा बदलाव (AI Generated Image)



जागरण संवाददाता, साहिबगंज। बच्चों के जन्म व मृत्यु के निबंधन में पूरे देश में हो रहे फर्जीवाड़े पर केंद्र सरकार भी सख्त है। इस संबंध में भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर जन्म व मृत्यु के निबंधन के नियमों को सख्ती से लागू कराने को कहा है।


इसके लिए राज्य व जिला स्तर पर गठित कमेटी की बैठक समय-समय पर करने तथा इसकी मॉनिटरिंग करने को कहा है। पत्र के अनुसार, अब 1 साल से अधिक उम्र के बच्चों का जन्म प्रमाणपत्र जिला मजिस्ट्रेट या उनके द्वारा नामित मजिस्ट्रेट या अनुमंडल मजिस्ट्रेट की अनुमति के बाद ही बन पाएगा।


पूर्व में 10 साल बाद जन्म प्रमाणपत्र बनवाने पर जिला मजिस्ट्रेट या अनुमंडल मजिस्ट्रेट की अनुमति अनिवार्य थी।

बताया जा रहा है नियमों में बदलाव संबंधी पत्र कुछ माह पूर्व राज्यों को भेजा गया था, लेकिन किसी ने उसे गंभीरता से नहीं लिया। ऐसे में ऐसे में महारजिस्ट्रार कार्यालय ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को दाेबारा पत्र भेजकर सख्ती से इसका अनुपालन कराने को कहा है। निजी अस्पतालों को जन्म-मृत्यु की सूचना 21 दिनों के अंदर संबंधित रजिस्टार को देना अनिवार्य है।

फर्जी पंजीकरण इकाईयों की पहचान:

पत्र में फर्जी पंजीकरण इकाइयों की पहचान करने को भी कहा गया है। अप्रत्याशित वृद्धि वाली पंजीकरण की इकाइयों को चिह्नित कर उसकी जांच करने को कहा गया है। फर्जी पंजीकरण को रोकने के लिए निबंधन इकाईयों को लॉगिन व ओटीपी किसी किसी से शेयर न करने के लिए जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश भी सभी उपायुक्तों को दिया गया है।


दूसरी ओर, आम जनता द्वारा प्रस्तुत हस्तलिखित प्रमाणपत्रों की पूरी तरह जांच पड़ताल के बाद ही डिजिटलाइज करने को कहा गया है।

इसके लिए निबंधन इकाईयों को जन्म प्रमाणपत्र का मिलान जन्म-मृत्यु रजिस्टर से करने और उस रजिस्टर का पन्ना अपलोड कर अनुमोदन के लिए संबंधित जिला रजिस्ट्रार को भेजने को कहा है। वहां से अनुमोदन के बाद ही उसे डिजिटलाइज किया जा सकेगा।
आंगनबाड़ी की भूमिका संदिग्ध:

जन्म के निबंधन में आंगनबाड़ी सेविका भी भूमिका भी संदिग्ध है। सेविका के सत्यापन के बाद ही नगर परिषद या अन्य इकाईयों द्वारा घर में पैदा होने वाले बच्चों का जन्म प्रमाणत्र निर्गत किया जाता है।


ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि सेविका द्वारा किसी बच्चे के जन्म के तत्काल बाद इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को क्यों नहीं दी जाती है?

जानकारों का कहना है कि अगर जिला प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच करे तो बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।

बताया जाता है कि घरों में प्रसव का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के भी कान खड़े हो गए हैं। पूरे मामले की जांच की तैयारी चल रही है।
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