क्या है गृह मंत्रालय का नया MRM पोर्टल? जानें साइबर फ्रॉड में डूबा अपना पैसा वापस पाने का पूरा तरीका
क्या है गृह मंत्रालय का नया MRM पोर्टल? जानें साइबर फ्रॉड में डूबा अपना पैसा वापस पाने का पूरा तरीका
देश में OTP स्कैम और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे साइबर क्राइम के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इस गंभीर समस्या से निपटने और पीड़ितों को राहत देने के लिए केंद्रीय ...और पढ़ें

Mobile Restoration Module (MRM) को समझें। Photo- Gemini AI.
देश में साइबर अपराधों के मामले, जैसे कि OTP-बेस्ड स्कैम्स और 'डिजिटल अरेस्ट', काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। इस समस्या पर लगाम लगाने के लिए, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने साइबर क्राइम के पीड़ितों के लिए एक नया सब-पोर्टल लॉन्च किया है, जो उन्हें कुछ आसान स्टेप्स फॉलो करके रिफंड की रिक्वेस्ट करने की सुविधा देगा। Mobile Restoration Module (MRM) नाम के इस पोर्टल पर साइबर क्राइम के पीड़ित हेल्पलाइन नंबर या सरकार के डेडिकेटेड पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने के बाद विजिट कर सकते हैं। हालांकि, एक अधिकारी ने हाइलाइट किया कि ये पोर्टल केवल तभी रिफंड प्रोसेस कर पाएगा जब फ्रॉड करने वाले के बैंक अकाउंट में पैसे पहले ही फ्रीज कर दिए गए हों।
Mobile Restoration Module: ये क्या है और क्या हैं इसके फीचर्स?
गृह मंत्रालय के इंडियन साइबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने ये नया MRM साइट लॉन्च किया है, जिसका मकसद साइबर फ्रॉड विक्टिम्स को रिफंड पाने का एक सुविधाजनक तरीका देना है। असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) आशीष कुमार ने कहा कि नया MRM पोर्टल पीड़ितों को अपने पैसे वापस पाने के लिए अलग-अलग सरकारी दफ्तरों और बैंकों के चक्कर काटने की जरूरत को कम करेगा, क्योंकि वे सीधे अपने घर बैठे ही रिफंड की रिक्वेस्ट रेज कर सकते हैं।
नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के एक हिस्से के रूप में पेश किए गए इस मॉड्यूल के जरिए पीड़ित आसानी से रिफंड रिक्वेस्ट डाल सकते हैं। हालांकि, ये मॉड्यूल केवल उसी स्थिति में रिफंड प्रोसेस कर पाएगा, जब पीड़ित ने घटना के तुरंत बाद 1930 हेल्पलाइन या NCRP पोर्टल के जरिए साइबर क्राइम की रिपोर्ट की हो और स्कैमर के बैंक अकाउंट में पैसा फ्रीज हो चुका हो। इस रिफंड को पाने के लिए केवल यही दो एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया तय की गई हैं।

MRM साइट के जरिए रिफंड अप्लाई करने के लिए तीन अलग-अलग कैटेगरीज बनाई गई हैं, जिनकी शर्तें भी अलग हैं। पहली कैटेगरी ये है कि अगर स्कैमर के बैंक अकाउंट में फ्रीज की गई कुल रकम 50,000 रुपये से कम है, तो पीड़ितों को न तो FIR की कॉपी अपलोड करनी होगी और न ही कोर्ट ऑर्डर की। ये पैसा सीधे पुलिस शिकायत के आधार पर ही रिफंड कर दिया जाएगा। दूसरी कैटेगरी के लिए भी यही नियम लागू रहेंगे, जहां कुल फ्रीज की गई रकम 50,000 रुपये से ज्यादा है, लेकिन वह अलग-अलग बैंक अकाउंट्स में बंटी हुई है और किसी भी एक अकाउंट में 50,000 रुपये से ज्यादा नहीं है।
आखिर में आती है तीसरी कैटेगरी, जहां किसी एक सिंगल बैंक अकाउंट में फ्रीज की गई रकम 50,000 रुपये से ज्यादा है। इस स्थिति में MRM साइट पर रिफंड रिक्वेस्ट डालने से पहले FIR दर्ज करना जरूरी है। रिक्वेस्ट सफलतापूर्वक सबमिट होने के बाद, एक स्पेशल पुलिस टीम पोर्टल पर जरूरी इंडेमनिटी बॉन्ड और नोटिस अपलोड करेगी। इसके बाद संबंधित बैंक सीधे पीड़ित के बैंक अकाउंट में पैसे वापस ट्रांसफर कर देगा।
Mobile Restoration Module के जरिए रिफंड रिक्वेस्ट कैसे करें?
आगे बढ़ने से पहले, पक्का कर लें कि आपके पास अपना बैंक अकाउंट नंबर, पैन कार्ड की डिजिटल कॉपी, 14 अंकों की Complaint ID और अपना रजिस्टर्ड फोन नंबर मौजूद हो।सबसे पहले MRM पोर्टल (https://mrm-ncrp.mha.gov.in/public-info) पर जाएं।
वहां दिए गए Citizen Login बटन पर टैप करें।
पोर्टल पर लॉग इन करने के लिए अपना रजिस्टर्ड फोन नंबर डालें। (ध्यान रहे कि यह मोबाइल नंबर वही होना चाहिए जो NCRP पोर्टल पर रजिस्टर्ड है।)
आपके नंबर पर आए OTP को दर्ज करके पोर्टल में लॉग इन करें।
अब Raise Refund Request सेक्शन पर जाएं और NCRP पोर्टल से मिली अपनी 14 नंबर्स की Complaint ID टाइप करें। इसके बाद एक नई स्क्रीन खुलेगी जहां फ्रीज की गई रकम पहले से ही दर्ज होगी।
अपने पैन कार्ड की डिजिटल कॉपी अपलोड करें। इसके बाद अपना बैंक अकाउंट नंबर और अपनी ब्रांच का IFSC कोड डालें, जहां आप रिफंड पाना चाहते हैं।
अगर आपके पास कोर्ट ऑर्डर की कॉपी है, तो आप Select Court Order ऑप्शन से उसकी डिजिटल कॉपी अपलोड कर सकते हैं। (अगर एक बैंक अकाउंट में फ्रीज की गई रकम 50,000 रुपये से ज्यादा है, तो FIRदर्ज कराना और कोर्ट ऑर्डर पाना अनिवार्य है।)
डिक्लेरेशनके बगल में दिए गए चेकबॉक्स पर टिक करें और Submit बटन पर क्लिक कर दें।
इसके बाद MRM पोर्टल एक Unique Request ID जनरेट करेगा, जिसकी शुरुआत 'MR2026' से होगी। इसकी मदद से आप अपने रिफंड रिक्वेस्ट का स्टेटस ट्रैक कर सकेंगे।
देश में OTP स्कैम और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे साइबर क्राइम के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इस गंभीर समस्या से निपटने और पीड़ितों को राहत देने के लिए केंद्रीय ...और पढ़ें

Mobile Restoration Module (MRM) को समझें। Photo- Gemini AI.
देश में साइबर अपराधों के मामले, जैसे कि OTP-बेस्ड स्कैम्स और 'डिजिटल अरेस्ट', काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। इस समस्या पर लगाम लगाने के लिए, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने साइबर क्राइम के पीड़ितों के लिए एक नया सब-पोर्टल लॉन्च किया है, जो उन्हें कुछ आसान स्टेप्स फॉलो करके रिफंड की रिक्वेस्ट करने की सुविधा देगा। Mobile Restoration Module (MRM) नाम के इस पोर्टल पर साइबर क्राइम के पीड़ित हेल्पलाइन नंबर या सरकार के डेडिकेटेड पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने के बाद विजिट कर सकते हैं। हालांकि, एक अधिकारी ने हाइलाइट किया कि ये पोर्टल केवल तभी रिफंड प्रोसेस कर पाएगा जब फ्रॉड करने वाले के बैंक अकाउंट में पैसे पहले ही फ्रीज कर दिए गए हों।
Mobile Restoration Module: ये क्या है और क्या हैं इसके फीचर्स?
गृह मंत्रालय के इंडियन साइबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने ये नया MRM साइट लॉन्च किया है, जिसका मकसद साइबर फ्रॉड विक्टिम्स को रिफंड पाने का एक सुविधाजनक तरीका देना है। असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) आशीष कुमार ने कहा कि नया MRM पोर्टल पीड़ितों को अपने पैसे वापस पाने के लिए अलग-अलग सरकारी दफ्तरों और बैंकों के चक्कर काटने की जरूरत को कम करेगा, क्योंकि वे सीधे अपने घर बैठे ही रिफंड की रिक्वेस्ट रेज कर सकते हैं।
नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के एक हिस्से के रूप में पेश किए गए इस मॉड्यूल के जरिए पीड़ित आसानी से रिफंड रिक्वेस्ट डाल सकते हैं। हालांकि, ये मॉड्यूल केवल उसी स्थिति में रिफंड प्रोसेस कर पाएगा, जब पीड़ित ने घटना के तुरंत बाद 1930 हेल्पलाइन या NCRP पोर्टल के जरिए साइबर क्राइम की रिपोर्ट की हो और स्कैमर के बैंक अकाउंट में पैसा फ्रीज हो चुका हो। इस रिफंड को पाने के लिए केवल यही दो एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया तय की गई हैं।
MRM साइट के जरिए रिफंड अप्लाई करने के लिए तीन अलग-अलग कैटेगरीज बनाई गई हैं, जिनकी शर्तें भी अलग हैं। पहली कैटेगरी ये है कि अगर स्कैमर के बैंक अकाउंट में फ्रीज की गई कुल रकम 50,000 रुपये से कम है, तो पीड़ितों को न तो FIR की कॉपी अपलोड करनी होगी और न ही कोर्ट ऑर्डर की। ये पैसा सीधे पुलिस शिकायत के आधार पर ही रिफंड कर दिया जाएगा। दूसरी कैटेगरी के लिए भी यही नियम लागू रहेंगे, जहां कुल फ्रीज की गई रकम 50,000 रुपये से ज्यादा है, लेकिन वह अलग-अलग बैंक अकाउंट्स में बंटी हुई है और किसी भी एक अकाउंट में 50,000 रुपये से ज्यादा नहीं है।
आखिर में आती है तीसरी कैटेगरी, जहां किसी एक सिंगल बैंक अकाउंट में फ्रीज की गई रकम 50,000 रुपये से ज्यादा है। इस स्थिति में MRM साइट पर रिफंड रिक्वेस्ट डालने से पहले FIR दर्ज करना जरूरी है। रिक्वेस्ट सफलतापूर्वक सबमिट होने के बाद, एक स्पेशल पुलिस टीम पोर्टल पर जरूरी इंडेमनिटी बॉन्ड और नोटिस अपलोड करेगी। इसके बाद संबंधित बैंक सीधे पीड़ित के बैंक अकाउंट में पैसे वापस ट्रांसफर कर देगा।
Mobile Restoration Module के जरिए रिफंड रिक्वेस्ट कैसे करें?
आगे बढ़ने से पहले, पक्का कर लें कि आपके पास अपना बैंक अकाउंट नंबर, पैन कार्ड की डिजिटल कॉपी, 14 अंकों की Complaint ID और अपना रजिस्टर्ड फोन नंबर मौजूद हो।सबसे पहले MRM पोर्टल (https://mrm-ncrp.mha.gov.in/public-info) पर जाएं।
वहां दिए गए Citizen Login बटन पर टैप करें।
पोर्टल पर लॉग इन करने के लिए अपना रजिस्टर्ड फोन नंबर डालें। (ध्यान रहे कि यह मोबाइल नंबर वही होना चाहिए जो NCRP पोर्टल पर रजिस्टर्ड है।)
आपके नंबर पर आए OTP को दर्ज करके पोर्टल में लॉग इन करें।
अब Raise Refund Request सेक्शन पर जाएं और NCRP पोर्टल से मिली अपनी 14 नंबर्स की Complaint ID टाइप करें। इसके बाद एक नई स्क्रीन खुलेगी जहां फ्रीज की गई रकम पहले से ही दर्ज होगी।
अपने पैन कार्ड की डिजिटल कॉपी अपलोड करें। इसके बाद अपना बैंक अकाउंट नंबर और अपनी ब्रांच का IFSC कोड डालें, जहां आप रिफंड पाना चाहते हैं।
अगर आपके पास कोर्ट ऑर्डर की कॉपी है, तो आप Select Court Order ऑप्शन से उसकी डिजिटल कॉपी अपलोड कर सकते हैं। (अगर एक बैंक अकाउंट में फ्रीज की गई रकम 50,000 रुपये से ज्यादा है, तो FIRदर्ज कराना और कोर्ट ऑर्डर पाना अनिवार्य है।)
डिक्लेरेशनके बगल में दिए गए चेकबॉक्स पर टिक करें और Submit बटन पर क्लिक कर दें।
इसके बाद MRM पोर्टल एक Unique Request ID जनरेट करेगा, जिसकी शुरुआत 'MR2026' से होगी। इसकी मदद से आप अपने रिफंड रिक्वेस्ट का स्टेटस ट्रैक कर सकेंगे।
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