Live TV

राज्य

[States][twocolumns]

देश

[Desh][list]

राजनीति

[Politics][list]

Meta की नई स्टडी में बड़ा दावा: इंस्टाग्राम रील्स देखकर शॉपिंग कर रहे भारतीय, फैसलों में Reels की बड़ी भूमिका

Meta की नई स्टडी में बड़ा दावा: इंस्टाग्राम रील्स देखकर शॉपिंग कर रहे भारतीय, फैसलों में Reels की बड़ी भूमिका


Meta और मार्केट रिसर्च फर्म Ipsos की एक नई स्टडी के मुताबिक, भारत में वीडियो देखने का क्रेज अब सिर्फ मेट्रो सिटीज तक सीमित नहीं रह गया है। रिपोर्ट से ...और पढ़ें






बड़े शहरों से लेकर गांवों तक रील्स का है जलवा। Photo- ChatGPT.



टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। मेटा प्लेटफॉर्म्स द्वारा कराई गई एक नई स्टडी के मुताबिक, भारत में वीडियो की कंजम्पशन अब सिर्फ बड़े महानगरों तक ही सीमित नहीं है। रिपोर्ट से पता चला है कि इंस्टाग्राम का शॉर्ट-फॉर्म वीडियो प्लेटफॉर्म 'रील्स', कंटेंट डिस्कवरी, क्रिएटर इंगेजमेंट और यहां तक कि खरीदारी के फैसलों में एक बड़ी भूमिका निभा रहा है। कंपनी के मुताबिक, मेट्रो शहरों, टियर-2, टियर-3 कस्बों और ग्रामीण भारत में उनके प्लेटफॉर्म्स पर डेली वीडियो एंगेजमेंट लगभग एक जैसा हो गया है, जो शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच वीडियो देखने के घटते अंतर की ओर इशारा करता है।
रील्स बन रहा है डिस्कवरी और शॉपिंग प्लेटफॉर्म

ये स्टडी मेटा के कहने पर मार्केट रिसर्च और कंसल्टिंग फर्म Ipsos द्वारा की गई थी, जिसमें भारत के 23 शहरों, कस्बों और ग्रामीण इलाकों के 4,000 से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया। स्टडी से पता चला कि सर्वे में शामिल 97 प्रतिशत भारतीय यूजर्स हर दिन मेटा के प्लेटफॉर्म्स (फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर वीडियो देखते हैं।

शहरी और ग्रामीण इलाकों के बीच का अंतर अब लगातार कम हो रहा है। जहां शहरों में डेली वीडियो कंजम्पशन 98 प्रतिशत है, वहीं ग्रामीण इलाकों में यह 94 प्रतिशत तक पहुंच गया है। रिपोर्ट में पाया गया कि सर्वे में शामिल 97 प्रतिशत Gen Z यूजर्स, 97 प्रतिशत महिलाएं और प्रीमियम 'न्यू कंज्यूमर क्लासिफिकेशन सिस्टम' (NCCS) A कैटेगरी के 98 प्रतिशत लोग हर दिन मेटा के प्लेटफॉर्म्स पर वीडियो देखते हैं।

मेटा ने कहा कि रील्स इस ट्रेंड का सबसे बड़ा फायदा उठाने वाला प्लेटफॉर्म है। स्टडी का दावा है कि 89 प्रतिशत Gen Z यूजर्स हर दिन रील्स देखते हैं, जबकि महिलाओं में ये आंकड़ा 85 प्रतिशत और NCCS A कैटेगरी के लोगों में 88 प्रतिशत है। कंपनी के मुताबिक, उसका ये शॉर्ट-वीडियो प्लेटफॉर्म अब कंटेंट डिस्कवरी, क्रिएटर एंगेजमेंट और नए ट्रेंड्स तय करने का एक प्रमुख जरिया बन चुका है।




इस स्टडी पर टिप्पणी करते हुए, मेटा में CPG, D2C, ऑटोमोटिव (इंडिया) के डायरेक्टर सौगतो भौमिक ने कहा, 'क्रिएटर्स, कल्चर और कॉमर्स अब रील्स पर इस तरह एक साथ आ रहे हैं जो हमने पहले कभी नहीं देखा। ब्रांड्स के लिए ये सिर्फ कंटेंट दिखाने का जरिया नहीं है, बल्कि ये कंटेंट के जरिए सीधे बिजनेस (Content-to-Commerce) करने का मौका है। रील्स वह जगह है जहां से लोग नई चीजों के बारे में जानना शुरू करते हैं, भरोसा बनता है और खरीदारी के फैसले लिए जाते हैं।'


ये रिपोर्ट इस बात पर भी रोशनी डालती है कि इंडियन ऑडियंस को किस तरह का कंटेंट सबसे ज्यादा पसंद आ रहा है। रील्स पर ब्यूटी और मेकअप, फैशन, लाइफस्टाइल, फिटनेस, कॉमेडी और स्पोर्ट्स सबसे पॉपुलर कंटेंट कैटेगरीज में शामिल हैं। इसमें क्रिएटर्स को भी बड़ा फायदा हो रहा है; मेटा का दावा है कि सर्वे में शामिल दूसरे शॉर्ट-वीडियो प्लेटफॉर्म्स के मुकाबले रील्स पर क्रिएटर्स को लगभग 60 प्रतिशत ज्यादा एंगेजमेंट मिल रहा है।


इसके साथ ही, रील्स अब ग्राहकों के शॉपिंग से जुड़े फैसलों को भी काफी प्रभावित कर रहा है। स्टडी के मुताबिक, ये प्लेटफॉर्म सर्वे में शामिल 81 प्रतिशत यूजर्स को नए प्रोडक्ट्स खोजने में मदद करता है, 66 प्रतिशत लोग इस पर दिख रहे सामान को खरीदने के बारे में सोचते हैं और ये 47 प्रतिशत लोगों के फाइनल परचेज डिसीजन को प्रभावित करता है। इसका सबसे ज्यादा असर ई-कॉमर्स, ऑटोमोटिव और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसी कैटेगरीज में देखा जा रहा है।
Post A Comment
  • Facebook Comment using Facebook
  • Disqus Comment using Disqus

No comments :


मिर्च मसाला

[Mirchmasala][threecolumns]

विदेश

[Videsh][twocolumns]

बिज़नेस

[Business][list]

स्पोर्ट्स

[Sports][bsummary]