झारखंड के सबसे बड़े अस्तपाल में फर्जी दस्तावेजों पर दाखिला, काजल और ओली के बाद अब तीसरा MBBS छात्र फंसा
झारखंड के सबसे बड़े अस्तपाल में फर्जी दस्तावेजों पर दाखिला, काजल और ओली के बाद अब तीसरा MBBS छात्र फंसा
राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS Ranchi) में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र आशीष कुमार का दाखिला रद्द करने की तैयार ...और पढ़ें

रिम्स में फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर एक और कार्रवाई एमबीबीएस छात्र का दाखिला रद्द होगा।
रिम्स में फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर दाखिले का तीसरा मामला।
एमबीबीएस छात्र आशीष कुमार का नामांकन रद्द करने की तैयारी।
सीआईडी भी फर्जी दाखिलों की जांच कर रही है, कई खुलासे संभव।
रांची। झारखंड के सबसे बड़े अस्तपताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर मेडिकल पाठ्यक्रम में दाखिले का एक और मामला सामने आया है। एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र आशीष कुमार का जाति प्रमाण पत्र जांच में फर्जी पाए जाने के बाद अब रिम्स प्रशासन उसके नामांकन को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है।
इस संबंध में साहिबगंज जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट रिम्स को प्राप्त हो गई है। रिम्स को शिकायत मिली थी कि छात्र ने आरक्षण का लाभ लेने के लिए कथित रूप से गलत जाति प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया है।
शिकायत के बाद संस्थान ने प्रमाण पत्र के सत्यापन के लिए साहिबगंज के उपायुक्त को पत्र भेजा था। जिला प्रशासन की जांच में प्रमाण पत्र अमान्य पाए जाने के बाद इसकी रिपोर्ट रिम्स को भेज दी गई है। अब संस्थान नियमानुसार नामांकन निरस्त करने की कार्रवाई करेगा।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब रिम्स में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुए नामांकन की जांच अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) भी कर रही है। हाल ही में सीआईडी की टीम ने रिम्स पहुंचकर कई अधिकारियों से पूछताछ की थी और तीन विद्यार्थियों के नामांकन से संबंधित दस्तावेज अपने साथ जांच के लिए ले गई थी।
पहले भी दो छात्रों का रद्द हो चुका है दाखिला
इससे पहले वर्ष 2025 बैच में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर प्रवेश लेने के दो मामले सामने आ चुके हैं। शिकायत मिलने पर एमबीबीएस छात्रा काजल कुमारी के प्रमाण पत्रों की जांच कराई गई थी। गिरिडीह प्रशासन की जांच में प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने के बाद दिसंबर 2025 में उसका नामांकन रद कर दिया गया था।
इसी प्रकार बीडीएस की छात्रा ओली विश्वकर्मा के जाति प्रमाण पत्र की भी जांच कराई गई थी। संबंधित जिला प्रशासन की रिपोर्ट में प्रमाण पत्र फर्जी मिलने के बाद उसका दाखिला भी निरस्त कर दिया गया।
तीसरा मामला आने से बढ़े सवाल
आशीष कुमार का मामला सामने आने के बाद रिम्स में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मेडिकल सीट हासिल करने के मामलों पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। लगातार तीसरे मामले में जांच के बाद प्रमाण पत्र फर्जी मिलने से प्रवेश प्रक्रिया की निगरानी और दस्तावेज सत्यापन की व्यवस्था पर भी चर्चा तेज हो गई है।
दूसरी ओर सीआईडी की जांच जारी रहने से आने वाले दिनों में ऐसे अन्य मामलों का भी खुलासा होने की संभावना जताई जा रही है। सीआईडी जांच शुरू होते ही रिम्स के निदेशक डॉ राजकुमार ने इस्तीफा भी दे दिया है।
राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS Ranchi) में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र आशीष कुमार का दाखिला रद्द करने की तैयार ...और पढ़ें

रिम्स में फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर एक और कार्रवाई एमबीबीएस छात्र का दाखिला रद्द होगा।
रिम्स में फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर दाखिले का तीसरा मामला।
एमबीबीएस छात्र आशीष कुमार का नामांकन रद्द करने की तैयारी।
सीआईडी भी फर्जी दाखिलों की जांच कर रही है, कई खुलासे संभव।
रांची। झारखंड के सबसे बड़े अस्तपताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर मेडिकल पाठ्यक्रम में दाखिले का एक और मामला सामने आया है। एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र आशीष कुमार का जाति प्रमाण पत्र जांच में फर्जी पाए जाने के बाद अब रिम्स प्रशासन उसके नामांकन को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है।
इस संबंध में साहिबगंज जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट रिम्स को प्राप्त हो गई है। रिम्स को शिकायत मिली थी कि छात्र ने आरक्षण का लाभ लेने के लिए कथित रूप से गलत जाति प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया है।
शिकायत के बाद संस्थान ने प्रमाण पत्र के सत्यापन के लिए साहिबगंज के उपायुक्त को पत्र भेजा था। जिला प्रशासन की जांच में प्रमाण पत्र अमान्य पाए जाने के बाद इसकी रिपोर्ट रिम्स को भेज दी गई है। अब संस्थान नियमानुसार नामांकन निरस्त करने की कार्रवाई करेगा।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब रिम्स में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुए नामांकन की जांच अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) भी कर रही है। हाल ही में सीआईडी की टीम ने रिम्स पहुंचकर कई अधिकारियों से पूछताछ की थी और तीन विद्यार्थियों के नामांकन से संबंधित दस्तावेज अपने साथ जांच के लिए ले गई थी।
पहले भी दो छात्रों का रद्द हो चुका है दाखिला
इससे पहले वर्ष 2025 बैच में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर प्रवेश लेने के दो मामले सामने आ चुके हैं। शिकायत मिलने पर एमबीबीएस छात्रा काजल कुमारी के प्रमाण पत्रों की जांच कराई गई थी। गिरिडीह प्रशासन की जांच में प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने के बाद दिसंबर 2025 में उसका नामांकन रद कर दिया गया था।
इसी प्रकार बीडीएस की छात्रा ओली विश्वकर्मा के जाति प्रमाण पत्र की भी जांच कराई गई थी। संबंधित जिला प्रशासन की रिपोर्ट में प्रमाण पत्र फर्जी मिलने के बाद उसका दाखिला भी निरस्त कर दिया गया।
तीसरा मामला आने से बढ़े सवाल
आशीष कुमार का मामला सामने आने के बाद रिम्स में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मेडिकल सीट हासिल करने के मामलों पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। लगातार तीसरे मामले में जांच के बाद प्रमाण पत्र फर्जी मिलने से प्रवेश प्रक्रिया की निगरानी और दस्तावेज सत्यापन की व्यवस्था पर भी चर्चा तेज हो गई है।
दूसरी ओर सीआईडी की जांच जारी रहने से आने वाले दिनों में ऐसे अन्य मामलों का भी खुलासा होने की संभावना जताई जा रही है। सीआईडी जांच शुरू होते ही रिम्स के निदेशक डॉ राजकुमार ने इस्तीफा भी दे दिया है।
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