IND vs AFG: बेटे मानव सुथार की खतरनाक गेंदबाजी नहीं देख सके पिता, अंधविश्वास के कारण स्टेडियम से लौटे वापस
IND vs AFG: बेटे मानव सुथार की खतरनाक गेंदबाजी नहीं देख सके पिता, अंधविश्वास के कारण स्टेडियम से लौटे वापस
क्रिकेटर मानव सुथार के पिता जगदीश सुथार अपने बेटे का टेस्ट डेब्यू देखने मुल्लांपुर पहुंचे थे, लेकिन घबराहट और अंधविश्वास के कारण मैच देखे बिना ही घर ल ...और पढ़ें
-1780851026590_v.webp)
मानव सुथार
पीटीआई, मुल्लांपुर। राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के सेवानिवृत्त शिक्षक जगदीश सुथार अपने बड़े बेटे मानव को भारत के लिए टेस्ट पदार्पण करते देखने के लिए परिवार के साथ मुल्लांपुर तक पहुंचे थे, लेकिन दूसरे दिन बेटे का मैदान पर प्रदर्शन देखे बिना ही घर लौट गए।
जगदीश सुथार ने कहा, मैं अपनी पत्नी और बेटी मानसी के साथ उसका पदार्पण देखने आया था. शनिवार को उसे टेस्ट कैप लेते देखकर कैसा लगा, मैं इसे बयां नहीं कर सकता, लेकिन आज हम घर वापस आ गए थे क्योंकि हम सब नर्वस थे और स्टेडियम से उसे खेलते हुए देखकर थोड़े अंधविश्वासी भी थे।
पिता जगदीश ने कोच को दिया सफलता का श्रेय
जगदीश ने बेटे की सफलता का श्रेय लेने से हिचकिचाते हुए कहा, यह पूरी तरह से मानव की कड़ी मेहनत और उसके घंटों के अभ्यास का नतीजा है। वह सुबह ट्रेनिंग के लिए घर से निकलता था और देर शाम लौटता था। इसका श्रेय उसे और उसके बचपन के कोच धीरज शर्मा को जाता है जिनके हम सब कृतज्ञ हैं। मानव ने अपना सारा क्रिकेट उन्हीं से सीखा।
मैंने मानव का हमेशा समर्थन किया
जगदीश ने कहा कि हर दूसरे बच्चे की तरह, उसे भी क्रिकेट का बहुत शौक था। जब वह छह से सात साल का था तो वह टेनिस और रबड़ की गेंद से खेलता था। चूंकि मैं एक पीटी (शारीरिक शिक्षा) शिक्षक था, इसलिए मैंने हमेशा अपने बेटे को यह खेल खेलने और इसका मजा लेने के लिए हिम्मत दी। जब वह लगभग 10 से 11 साल का था तो मैंने उसे धीरज सर की अकादमी में दाखिला दिलाया था। उसके बाद मैंने उससे बस इतना कहा, ‘तुझे जो अच्छा लगे, तू कर, मेरा समर्थन हमेशा तेरे साथ रहेगा।
क्रिकेटर मानव सुथार के पिता जगदीश सुथार अपने बेटे का टेस्ट डेब्यू देखने मुल्लांपुर पहुंचे थे, लेकिन घबराहट और अंधविश्वास के कारण मैच देखे बिना ही घर ल ...और पढ़ें
-1780851026590_v.webp)
मानव सुथार
पीटीआई, मुल्लांपुर। राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के सेवानिवृत्त शिक्षक जगदीश सुथार अपने बड़े बेटे मानव को भारत के लिए टेस्ट पदार्पण करते देखने के लिए परिवार के साथ मुल्लांपुर तक पहुंचे थे, लेकिन दूसरे दिन बेटे का मैदान पर प्रदर्शन देखे बिना ही घर लौट गए।
जगदीश सुथार ने कहा, मैं अपनी पत्नी और बेटी मानसी के साथ उसका पदार्पण देखने आया था. शनिवार को उसे टेस्ट कैप लेते देखकर कैसा लगा, मैं इसे बयां नहीं कर सकता, लेकिन आज हम घर वापस आ गए थे क्योंकि हम सब नर्वस थे और स्टेडियम से उसे खेलते हुए देखकर थोड़े अंधविश्वासी भी थे।
पिता जगदीश ने कोच को दिया सफलता का श्रेय
जगदीश ने बेटे की सफलता का श्रेय लेने से हिचकिचाते हुए कहा, यह पूरी तरह से मानव की कड़ी मेहनत और उसके घंटों के अभ्यास का नतीजा है। वह सुबह ट्रेनिंग के लिए घर से निकलता था और देर शाम लौटता था। इसका श्रेय उसे और उसके बचपन के कोच धीरज शर्मा को जाता है जिनके हम सब कृतज्ञ हैं। मानव ने अपना सारा क्रिकेट उन्हीं से सीखा।
मैंने मानव का हमेशा समर्थन किया
जगदीश ने कहा कि हर दूसरे बच्चे की तरह, उसे भी क्रिकेट का बहुत शौक था। जब वह छह से सात साल का था तो वह टेनिस और रबड़ की गेंद से खेलता था। चूंकि मैं एक पीटी (शारीरिक शिक्षा) शिक्षक था, इसलिए मैंने हमेशा अपने बेटे को यह खेल खेलने और इसका मजा लेने के लिए हिम्मत दी। जब वह लगभग 10 से 11 साल का था तो मैंने उसे धीरज सर की अकादमी में दाखिला दिलाया था। उसके बाद मैंने उससे बस इतना कहा, ‘तुझे जो अच्छा लगे, तू कर, मेरा समर्थन हमेशा तेरे साथ रहेगा।
Labels
Sports
Post A Comment
No comments :