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भारतीय-अमेरिकी CEO की यूएस सिटिजनशिप छिनने का खतरा, H-1B वीजा पर ट्रंप के फैसले से बढ़ा संकट

भारतीय-अमेरिकी CEO की यूएस सिटिजनशिप छिनने का खतरा, H-1B वीजा पर ट्रंप के फैसले से बढ़ा संकट


भारतीय मूल के व्यवसायी नीरज शर्मा, ट्रंप प्रशासन के 'डी-नेचुरलाइजेशन' अभियान के तहत अमेरिकी नागरिकता खोने के खतरे में हैं। उन पर H-1B वीजा धोखाधड़ी के ...और पढ़ें






भारतीय मूल के बिजनेसमैन पर अमेरिकी नागरिकता खोना का खतरा। (प्रतीकात्मक तस्वीर- रॉयटर्स)



भारतीय मूल के नीरज शर्मा की अमेरिकी नागरिकता खतरे में।


H-1B वीजा धोखाधड़ी के आरोप में दोषी ठहराया गया।


ट्रंप प्रशासन के 'डी-नेचुरलाइजेशन' अभियान का हिस्सा।



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय मूल के एक बिजनेसमैन पर अमेरिकी नागरिकता छिनने का खतरा मंडरा रहा है। यह बिजनेसमैन उन 17 अमेरिकी नागरिकों में शामिल हैं जिनकी नागरिकता छिन सकती है। दरअसल, ट्रंप प्रशासन ने एक बड़ा 'डी-नेचुरलाइजेशन' अभियान (नागरिकता रद करने का अभियान) शुरू किया है। अधिकारी इसे एक बड़ा कदम बता रहे हैं।


अमेरिकी न्याय विभाग ने सोमवार, 8 जून को इस समूह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की घोषणा की। उन पर आरोप है कि उन्होंने नागरिकता पाने की प्रक्रिया के दौरान धोखाधड़ी, जानकारी छिपाने या गलत बयान देकर अमेरिकी नागरिकता हासिल की। इन लोगों में वो भी शामिल हैं जिन पर बच्चों के यौन शोषण, ड्रग तस्करी, वायर फ्रॉड और इमिग्रेशन फ्रॉड जैसे गंभीर अपराधों के आरोप हैं या वे इन अपराधों के लिए दोषी ठहराए जा चुके हैं।

कौन हैं नीरज शर्मा?

जिन लोगों को निशाना बनाया गया है, उनमें भारत के 50 वर्षीय बिजनेसमैन नीरज शर्मा भी शामिल हैं। वह न्यू जर्सी की स्टाफिंग फर्म मैग्नाविजन एलएलसी के CEO थे। जस्टिस डिपार्टमेंट के अनुसार, शर्मा ने H-1B वीजा के लिए 11 फर्जी आवेदन जमा किए थे, जिनमें झूठा दावा किया गया था कि विदेशी कर्मचारियों को एक बड़ी ग्लोबल फाइनेंशियल संस्था में काम पर रखा जाएगा।



अधिकारियों का आरोप है कि इन आवेदनों में अधिकारियों के जाली हस्ताक्षर और बनावटी दस्तावेज शामिल थे। विभाग का यह भी कहना है कि जब शर्मा ने 2017 में अमेरिकी नागरिकता के लिए आवेदन किया था तो उन्होंने किसी ऐसे अपराध को करने से इनकार किया था जिसके लिए उन्हें गिरफ्तार न किया गया हो। साथ ही उन्होंने अमेरिकी अधिकारियों को गलत जानकारी देने या इमिग्रेशन से जुड़े फायदे पाने के लिए झूठ बोलने से भी इनकार किया था।


USCIS द्वारा उनका आवेदन मंजूर किए जाने के बाद दिसंबर 2017 में वे अमेरिकी नागरिक बन गए। हालांकि, बाद में शर्मा को 2015 और 2017 के बीच की गतिविधियों से जुड़े वीजा धोखाधड़ी के मामले में दोषी ठहराया गया।

न्याय विभाग अब उनकी नागरिकता रद करने की कोशिश कर रहा है। उनका तर्क है कि शर्मा ने गलत काम छिपाए और गलत जानकारी देकर नागरिकता हासिल की।
नागरिकता रद करने की व्यापक मुहिम

शर्मा के खिलाफ मामला अमेरिकी सरकार की उस व्यापक कोशिश का हिस्सा है, जिसमें गंभीर कदाचार के आरोपी नेचुरलाइज्ड नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है।

न्याय विभाग ने कहा कि इन 17 लोगों में वे लोग शामिल हैं जिन्हें हिंसक अपराधों, नाबालिगों से जुड़े अपराधों, धोखाधड़ी और आव्रजन से जुड़े नियमों के उल्लंघन का दोषी ठहराया गया था। अधिकारी इस कदम को अमेरिकी इतिहास में नागरिकता रद करने की सबसे बड़ी कोशिशों में से एक बता रहे हैं।
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