कैंसर मरीजों के इलाज में मिली नई सफलता, अब बिना मास्क हो सकेगी रेडियोथेरेपी
कैंसर मरीजों के इलाज में मिली नई सफलता, अब बिना मास्क हो सकेगी रेडियोथेरेपी
भारत में पहली बार सर एचएन रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल ने एआई-संचालित सरफेस गाइडेड और एडेप्टिव रेडियोथेरेपी का उपयोग कर सिर और गर्दन के कैंसर का सफल इलाज ...और पढ़ें

बिना मास्क हो सकेगी रेडियोथेरेपी
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत ने कैंसर के इलाज के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सर एचएन रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल के डाक्टरों ने भारत में पहली बार एआई संचालित सरफेस गाइडेड रेडियोथेरेपी (एसजीआरटी) और एडेप्टिव रेडियोथेरेपी के अनूठे संयोजन का उपयोग करके सिर और गर्दन के कैंसर के मरीज का इलाज किया है।
पारंपरिक रेडियोथेरेपी में मरीज के सिर को स्थिर रखने के लिए एक बेहद तंग प्लास्टिक मास्क पहनाया जाता है और सीटी सिमुलेशन स्कैन किया जाता है, जिसमें काफी समय लगता है, लेकिन इस तकनीक से डाक्टरों ने बिना किसी मास्क या सिमुलेशन सीटी स्कैन के सटीक रेडिएशन थेरेपी दी।
डॉक्टरों के अनुसार, मुंह के कैंसर से पीड़ित रोगी पिछली सर्जरी और रेडियोथेरेपी उपचारों के असफल होने के बाद अस्पताल में आया था। ट्यूमर अत्यधिक बढ़ा हुआ था और लगातार ब्लीडिंग हो रही थी।
उन्नत तकनीक का सफलतापूर्वक उपयोग
सिर और गर्दन के कैंसर के लिए पारंपरिक रेडियोथेरेपी रोगी की हलचल को रोकने के लिए तंग प्लास्टिक मास्क और सिमुलेशन सीटी स्कैन पर निर्भर करती है, डॉक्टरों ने महसूस किया कि गंभीर रोगी उस कठोर प्रक्रिया को बर्दाश्त नहीं कर सकेगा।
रक्तस्राव को रोकने के लिए आवश्यक विकिरण देने हेतु अस्पताल ने इस उन्नत तकनीक का सफलतापूर्वक उपयोग किया। मरीज पर इलाज का सकारात्मक परिणाम रहा और उसे 13 मई को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
सर्फेस गाइडेड रेडियोथेरेपी तकनीक में मरीज की त्वचा को ट्रैक करने के लिए 3 डी कैमरा सिस्टम और एआइ का उपयोग किया जाता है। यदि मरीज थोड़ा भी हिलता है, तो रेडिएशन बीम अपने आप रुक जाती है, जिससे तंग मास्क लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।
एडेप्टिव रेडियोथेरेपी एआई-संचालित सिस्टम हर दिन मरीज के शरीर और ट्यूमर के बदलते आकार को रियल टाइम में ट्रैक करता है और उसी अनुसार रेडिएशन की डोज को एडजस्ट करता है। सर एचएन रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल के रेडिएशन आंकोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. प्रसाद राज दांडेकर ने बताया कि यह तकनीक उपचार को अधिक सटीक और प्रभावी बनाती है, जिससे मरीजों के इलाज के परिणाम बेहतर होते हैं।
भारत में पहली बार सर एचएन रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल ने एआई-संचालित सरफेस गाइडेड और एडेप्टिव रेडियोथेरेपी का उपयोग कर सिर और गर्दन के कैंसर का सफल इलाज ...और पढ़ें

बिना मास्क हो सकेगी रेडियोथेरेपी
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत ने कैंसर के इलाज के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सर एचएन रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल के डाक्टरों ने भारत में पहली बार एआई संचालित सरफेस गाइडेड रेडियोथेरेपी (एसजीआरटी) और एडेप्टिव रेडियोथेरेपी के अनूठे संयोजन का उपयोग करके सिर और गर्दन के कैंसर के मरीज का इलाज किया है।
पारंपरिक रेडियोथेरेपी में मरीज के सिर को स्थिर रखने के लिए एक बेहद तंग प्लास्टिक मास्क पहनाया जाता है और सीटी सिमुलेशन स्कैन किया जाता है, जिसमें काफी समय लगता है, लेकिन इस तकनीक से डाक्टरों ने बिना किसी मास्क या सिमुलेशन सीटी स्कैन के सटीक रेडिएशन थेरेपी दी।
डॉक्टरों के अनुसार, मुंह के कैंसर से पीड़ित रोगी पिछली सर्जरी और रेडियोथेरेपी उपचारों के असफल होने के बाद अस्पताल में आया था। ट्यूमर अत्यधिक बढ़ा हुआ था और लगातार ब्लीडिंग हो रही थी।
उन्नत तकनीक का सफलतापूर्वक उपयोग
सिर और गर्दन के कैंसर के लिए पारंपरिक रेडियोथेरेपी रोगी की हलचल को रोकने के लिए तंग प्लास्टिक मास्क और सिमुलेशन सीटी स्कैन पर निर्भर करती है, डॉक्टरों ने महसूस किया कि गंभीर रोगी उस कठोर प्रक्रिया को बर्दाश्त नहीं कर सकेगा।
रक्तस्राव को रोकने के लिए आवश्यक विकिरण देने हेतु अस्पताल ने इस उन्नत तकनीक का सफलतापूर्वक उपयोग किया। मरीज पर इलाज का सकारात्मक परिणाम रहा और उसे 13 मई को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
सर्फेस गाइडेड रेडियोथेरेपी तकनीक में मरीज की त्वचा को ट्रैक करने के लिए 3 डी कैमरा सिस्टम और एआइ का उपयोग किया जाता है। यदि मरीज थोड़ा भी हिलता है, तो रेडिएशन बीम अपने आप रुक जाती है, जिससे तंग मास्क लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।
एडेप्टिव रेडियोथेरेपी एआई-संचालित सिस्टम हर दिन मरीज के शरीर और ट्यूमर के बदलते आकार को रियल टाइम में ट्रैक करता है और उसी अनुसार रेडिएशन की डोज को एडजस्ट करता है। सर एचएन रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल के रेडिएशन आंकोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. प्रसाद राज दांडेकर ने बताया कि यह तकनीक उपचार को अधिक सटीक और प्रभावी बनाती है, जिससे मरीजों के इलाज के परिणाम बेहतर होते हैं।
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