Live TV

राज्य

[States][twocolumns]

देश

[Desh][list]

राजनीति

[Politics][list]

एआई की बढ़ती निर्भरता: डिजिटल थकान और एकाग्रता पर गहरा प्रभाव

एआई की बढ़ती निर्भरता: डिजिटल थकान और एकाग्रता पर गहरा प्रभाव


बार-बार नोटिफिकेशन, एल्गोरिदम जनरेटेड कंटेंट, स्क्रीन पर लगातार काम करने की आदत और तरह-तरह के एआई टूल्स के चलते मानसिक थकान होने लगती है। प्रोडक्टिविट ...और पढ़ें






प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के साथ एआई दे रहा डिजिटल थकान


एआई से डिजिटल थकान और एकाग्रता में कमी।


निर्णय क्षमता व रचनात्मकता पर नकारात्मक असर।


अनावश्यक नोटिफिकेशन बंद करें, स्क्रीन टाइम घटाएं।



ब्रह्मानंद मिश्र, नई दिल्ली। एआई पावर्ड स्टडी प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन लेक्चर और वर्चुअल डिस्कशन की सुविधा के चलते सुमित की इंजीनियरिंग की पढ़ाई अब काफी आकर्षक हो गई है। इंटरनेट मीडिया पर भी बहुत सारी जानकारी उसे रील्स और शार्ट्स से मिल जाती है। लेकिन किताबें पढ़ते हुए सुमित का ध्यान बार-बार फोन पर चला जाता है। कुछ भी याद रखने में कठिनाई होने लगी है। इसी तरह, आइटी प्रोफेशनल सायमा एआई पावर्ड प्रोडक्टिविटी टूल्स के अलर्ट्स, रिमांइडर्स, परफार्मेंस रिपोर्ट्स और हर समय आपाधापी से अब बर्नआउट महसूस करने लगी है। इससे बचने के लिए दोनों ही अब गैर जरूरी नोटिफिकेशन को टर्नआफ करने, स्क्रीन टाइम सीमित रखने और डिजिटल गतिविधियों से रोज कुछ समय अलग रहने जैसे उपाय करने लगे हैं।
प्रभावित हो रही है निर्णय क्षमता

वर्षों से लोग ईमेल, चैट और एप्स के नोटिफिकेशन से जरूरी काम में होने वाले व्यवधान की शिकायत करते रहे हैं। अनेक शोध भी बताते हैं कि इससे एकाग्रता की समस्या, तनाव और थकान होती है। अब एआई पावर्ड टूल्स और एप्स का प्रयोग करते हुए जिस तरह वर्कफ्लो टिप्स, एआई प्रॉम्प्ट, प्रोडक्ट के सुझाव, प्रिडिक्टिव टेक्स्ट जैसे सिस्टम जेनरेटेड सजेशन मिलने लगे हैं, उससे सही निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो रही है। आज पढ़ाई से लेकर कार्यस्थल तक हर जगह एआई अपस्किलिंग पर जोर दिया जा रहा है।


एआई हमारे काम के तरीकों को बदल तो रहा ही है, साथ ही सीखने और याद रखने की क्षमता को भी प्रभावित करने लगा है। ऐसे में एक मूल प्रश्न है कि किन कार्यों को एआई के भरोसे छोड़ें और किन्हें खुद से करें। जब एआई की प्रतिक्रिया पर हम पूरी तरह आश्वस्त होने लगते हैं, तो विचारों पर मंथन की आदत से भी दूर होने लगते हैं, जो किसी तार्किक निर्णय के लिए सबसे अनिवार्य चीज है।


रचनात्मक विरोधाभास की बनती स्थिति

कुछ समय पहले तक हम नई जानकारी हासिल करने के दौरान स्रोत और तथ्यों की जांच भी करते थे। अब एआई टूल्स सिंगल और क्लियर प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जो हमेशा सही हो, इसकी कोई गारंटी नहीं है। अगर छात्रों को यह नहीं पता होगा कि जानकारियों का विश्लेषण और तथ्यों की जांच कैसे की जाए, तो एआई से लाभ कम मुसीबत ज्यादा हो सकती है। शोध बताते हैं कि एआई पर अधिक निर्भरता से रचनात्मक सोच एक ही ढर्रे पर अटक जाती है और नए या मौलिक समाधान के प्रति रुझान कम होने लगता है।
प्रोडक्टिविटी बढ़ने का 'भ्रम' तो नहीं

प्रोडक्टिविटी टूल्स के तौर पर निस्संदेह एआई ड्राफ्टिंग से लेकर एनालिसिस तक अनेक कार्य कर रहा है। हमें यह समझना होगा कि मॉडर्न टेक्नोलॉजी का डिजाइन ही ऐसा है कि इसमें ब्रेक लगाने या एंड प्वाइंट जैसा कोई सिस्टम नहीं है। उदाहरण के तौर पर, इंटरनेट मीडिया में स्क्रॉलिंग की कोई लिमिट नहीं है। उनका डिजाइन पैटर्न यूजर्स को लगातार नए कंटेंट के साथ एंगेज करके रखता है।


हर नई जानकारी पहले से अधिक आकर्षक लगती है, उसमें किताबों के पन्नों को पलटने जैसा कोई स्वाभाविक ठहराव नहीं होता। एआई पावर्ड डिजिटल व्यवस्था भी ऐसे ही काम करती है। ईमेल जमा होते रहते हैं, मैसेज आते रहते हैं और एआई टूल्स काम के अनगिनत रूप तैयार करते रहते हैं। जब काम की संरचना इस तरीके से बनेगी, तो मस्तिष्क आसान सवाल के जवाब के लिए भी संघर्ष करने लगेगा, यह निकट भविष्य का सच है।



एक लिमिट तो होनी ही चाहिए

निरंतरता टेक्नोलॉजी की सबसे बड़ी खासियत है। एक नया डाक्युमेंट, आउटपुट रिफाइन करने के लिए एक नया प्रॉम्प्ट, एक अलग डेटासेट से नई जानकारी, पूरे दिन आपको काम में लगाए रखती है, इसलिए नहीं कि आपके लिए यह अनिवार्य है। इस तरह के तकनीकी माहौल में कभी यह सिग्नल नहीं मिलता कि आपका काम पूरा हो गया है। एआई का प्रयोग करते हुए हर पल उत्सुकता बढ़ती जाती है। हमें समझना होगा कि ठहरकर सोचने, कुछ पढ़ने, लोगों से बातचीत करने, सूचनाओं को दर्ज करने के लिए दिमाग को राहत देना भी जरूरी है।
एआई की डिजिटल थकान में भूमिका

पर्सनलाइज्ड कंटेंटः एआई सिस्टम यूजर्स के बर्ताव, प्राथमिकता, जुड़ाव के आधार पर पर्सनलाइज्ड कंटेंट तैयार करते हैं। इससे जुड़ाव बढ़ता है, साथ ही स्क्रीन टाइम भी।

लगातार स्क्रालिंग: इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म पर एआई एल्गोरिदम यूजर की रुचि के आधार पर कंटेंट का सुझाव देते हैं। यूजर कुछ मिनट के लिए जाते हैं और उनका घंटों का समय बीत जाता है, क्योंकि एआई उन्हें लगातार एंगेजिंग कंटेंट सप्लाई करता है।


अनावश्यक जानकारियां: न्यूज, वीडियो, ब्लॉग, विज्ञापन, इंटरनेट मीडिया पोस्ट सबकी प्रतिस्पर्धा में प्रतिक्षण यूजर्स का अटेंशन ही होता है। इससे इन्फार्मेशन ओवरलोड की समस्या आती है, जिससे थकान और अनिर्णय की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

नोटिफिकेशन ओवरलोड: एआई पावर्ड एप्स अधिक पर्सनलाइल्ड सुझाव, अलर्ट, प्रोमोशनल मैसेज पूरे दिन भेजते हैं। इससे जरूरी कार्यों के लिए एकाग्रता कम होने लगती है।

फोमो: एआई की खासियत है कि वह ट्रेंडिंग और रियल टाइम अपडेट दे सकता है, जिससे यूजर्स आकर्षित होते हैं। लोग इससे वंचित होना नहीं चाहते, इसलिए भी वे नोटिफिकेशन और अलर्ट के जाल में फंस जाते हैं।
एआई टूल्स का करें विवेकपूर्ण प्रयोग


एआई निस्संदेह सोचने, क्रिएट करने और समस्याओं को हल करने का तरीका बदल रहा है। समस्या केवल सूचनाओं के ओवरलोड की नहीं है, बल्कि यह है कि लोग एआई जनरेटेड सुझाव को मार्गदर्शन के बजाय रेडिमेड आंसर के तौर पर लेने लगे हैं। जहां नोटिफिकेशन एकाग्रता में बाधक हैं, वहीं एआई के सुझाव निर्णय लेने की क्षमता और रचनात्मकता को प्रभावित कर रहे हैं। चिंता यह नहीं है कि इंसानी रचनात्मकता के लिए एआई चुनौती है, बल्कि इस पर अत्यधिक निर्भरता धीरे-धीरे स्वतंत्र रूप से नया खोजने, जिज्ञासा प्रकट करने और सोचने की आदत को कम कर रही है। एआई टूल्स के तौर पर प्रयोग होना चाहिए, जो मानव के सोच में इजाफा करे, न कि उसे सीमित करे। दीर्घ अवधि में नवाचार के लिए तीव्रता और एआई के बेहतर प्रयोग के साथ कल्पनाशीलता, निर्णय क्षमता और रचनात्मकता जैसे इंसानी गुणों का भी महत्व बढ़ेगा।

प्रशांत राणा, सह-संस्थापक, प्लस91लैब्स
कुछ उपयोगी उपाय

अनावश्यक नोटिफिकेशन को टर्नऑफ करें : इससे एकाग्रता बढ़ेगी और मानसिक बोझ भी हल्का हो जाएगा।

ब्रेक लेना जरूरी : स्क्रीन एक्सपोजर से बचने के लिए हर आधे एक घंटे में ब्रेक लेना जरूरी है।


सीमित प्रयोग: केवल ऐसे एप्स का प्रयोग करना चाहिए, जो उपयोगी हों। अना‍वश्यक एप्स को हटा देना चाहिए।

कुछ समय बिना डिवाइस के: खासकर सुबह और सोने से पहले के कुछ घंटे डिवाइस से दूर रहने का प्रयास करना चाहिए।

एआई का समझदारी भरा प्रयोग: एआई का प्रयोग प्रोडक्टिविटी के लिए हो, न कि एकाग्रता खोने के लिए। आ‍वश्यकता के अनुरूप नोटिफिकेशन सेटिंग, रिकमेंडेशन सिस्टम होना चाहिए।
Post A Comment
  • Facebook Comment using Facebook
  • Disqus Comment using Disqus

No comments :


मिर्च मसाला

[Mirchmasala][threecolumns]

विदेश

[Videsh][twocolumns]

बिज़नेस

[Business][list]

स्पोर्ट्स

[Sports][bsummary]