बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता पर उठे सवाल, सवालों के घेरे में सरकार
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता पर उठे सवाल, सवालों के घेरे में सरकार
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल उठे हैं, जहां गाइबांधा में राम मंदिर निर्माण कट्टरपंथियों के विरोध के कारण रुक गय ...और पढ़ें
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बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल उठे
गाइबांधा में राम मूर्ति निर्माण कट्टरपंथियों के डर से रुका।
फरीदपुर में छात्र नेता की पुलिस हिरासत में मौत।
अंतरराष्ट्रीय संगठन ने न्यायिक जांच की मांग की।
डिजिटल डेस्क, ढाका। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता के सरकारी वादे एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में हैं।
गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी में श्री श्री राधा गोविंद और काली मंदिर परिसर में बन रही भगवान राम की 81 फीट ऊंची मूर्ति का निर्माण कार्य अचानक रोक दिया गया है।
करीब 80 फीसदी पूरा हो चुका यह प्रोजेक्ट किसी अदालती आदेश या सरकारी निर्देश के कारण नहीं, बल्कि बहुसंख्यक कट्टरपंथियों के डर और विरोध के कारण अधर में लटका है।
डर के साये में थमा आस्था का निर्माण
स्थानीय हिंदू समुदाय के लिए यह रुका हुआ निर्माण केवल एक अधूरी मूर्ति नहीं, बल्कि देश में उनके वजूद और धार्मिक स्वतंत्रता की परीक्षा बन गया है। हालांकि मंदिर समिति का कहना है कि सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए काम रोका गया, लेकिन अल्पसंख्यकों को इसमें गहरा संदेह है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्थानीय प्रशासन ने तनाव बढ़ने का हवाला देकर समिति पर काम रोकने का परोक्ष दबाव बनाया।
कोई लिखित आदेश न होने से सरकार को जिम्मेदारी से बचने का मौका मिल गया है, जबकि अगस्त 2024 में हुए तख्तापलट के बाद से देश में अल्पसंख्यकों पर सैकड़ों हमले दर्ज किए जा चुके हैं। प्रधानमंत्री तारिक रहमान के 'सभी के लिए सुरक्षित देश' के वादे पर अब सवाल उठ रहे हैं।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल उठे हैं, जहां गाइबांधा में राम मंदिर निर्माण कट्टरपंथियों के विरोध के कारण रुक गय ...और पढ़ें
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बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल उठे
गाइबांधा में राम मूर्ति निर्माण कट्टरपंथियों के डर से रुका।
फरीदपुर में छात्र नेता की पुलिस हिरासत में मौत।
अंतरराष्ट्रीय संगठन ने न्यायिक जांच की मांग की।
डिजिटल डेस्क, ढाका। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता के सरकारी वादे एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में हैं।
गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी में श्री श्री राधा गोविंद और काली मंदिर परिसर में बन रही भगवान राम की 81 फीट ऊंची मूर्ति का निर्माण कार्य अचानक रोक दिया गया है।
करीब 80 फीसदी पूरा हो चुका यह प्रोजेक्ट किसी अदालती आदेश या सरकारी निर्देश के कारण नहीं, बल्कि बहुसंख्यक कट्टरपंथियों के डर और विरोध के कारण अधर में लटका है।
डर के साये में थमा आस्था का निर्माण
स्थानीय हिंदू समुदाय के लिए यह रुका हुआ निर्माण केवल एक अधूरी मूर्ति नहीं, बल्कि देश में उनके वजूद और धार्मिक स्वतंत्रता की परीक्षा बन गया है। हालांकि मंदिर समिति का कहना है कि सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए काम रोका गया, लेकिन अल्पसंख्यकों को इसमें गहरा संदेह है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्थानीय प्रशासन ने तनाव बढ़ने का हवाला देकर समिति पर काम रोकने का परोक्ष दबाव बनाया।
कोई लिखित आदेश न होने से सरकार को जिम्मेदारी से बचने का मौका मिल गया है, जबकि अगस्त 2024 में हुए तख्तापलट के बाद से देश में अल्पसंख्यकों पर सैकड़ों हमले दर्ज किए जा चुके हैं। प्रधानमंत्री तारिक रहमान के 'सभी के लिए सुरक्षित देश' के वादे पर अब सवाल उठ रहे हैं।
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