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रंगा-बिल्ला केस की जड़ तक पहुंचती है Ali Fazal की क्राइम सीरीज, रोंगटे खड़े कर देगा क्लाईमैक्स सीन

रंगा-बिल्ला केस की जड़ तक पहुंचती है Ali Fazal की क्राइम सीरीज, रोंगटे खड़े कर देगा क्लाईमैक्स सीन


अली फजल और सोनाली बेंद्रे स्टारर इनवेस्टिगेटिव क्राइम थ्रिलर राख (Raakh) 1978 के कुख्यात रंगा-बिल्ला केस पर आधारित है। प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हुई सी ...और पढ़ें






राख वेब सीरीज रिव्यू


राख वेब सीरीज रिव्यू


रंगा-बिल्ला केस पर आधारित है सीरीज


अली फजल ने निभाया सब इंस्पेक्टर जयप्रकाश का किरदार


एकता गुप्ता, नई दिल्ली। 1978 में रंगा-बिल्ला केस (Ranga-Billa Case) ने पूरा देश हिला कर रख दिया था जिसमें दो टीनएजर्स की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। दोनों दिल्ली के नेवी ऑफिसर के बच्चे थे जिनके मर्डर ने देश की न्याय व्यवस्था और पुलिस सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए थे।


इसी से इंस्पायर सीरीज राख (Raakh) प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई है जिसमें इस केस को गहराई तक जाकर दिखाया गया है। रंगा और बिल्ला ने मुंबई (उस वक्त बॉम्बे) और दिल्ली में कितने मर्डर किए? आखिर दोनों इतने खतरनाक अपराधी कैसे बने? जैसे सवालों के जवाब सीरीज में दिए गए हैं।


सीरीज की कहानी

सीरीज की कहानी की शुरुआत दिल्ली के एक हाई प्रोफाइल कपल मोना अरोड़ा (Sonali Bendre) और लेफ्टिनेंट कर्नल अशोक अरोड़ा (आमिर बशीर) के घर से होती है जहां से उनके बच्चे सुमन और साहिल नेशनल रेडियो पर अपनी परफॉर्मेंस देने जाते हैं लेकिन वापस नहीं लौटते। बात पुलिस तक जाती है और फिर शुरू होती है उन्हें ढूंढने की कवायद।
दूसरी तरफ दो अपराधियों बाबू और रज्जो की पैरेलल कहानी दिखाई जाती है जिसमें वे बॉम्बे में चोरी जैसी घटनाओं को अंजाम दे रहे होते हैं लेकिन बाबू चोरी करने के इरादे से घूसे एक घर में से बच्चा उठा लाता है और फिरोती मांगता है।






परिस्थितियां अनुकूल ना होने के चलते वह बच्चे को मार देता है और दोनों दिल्ली भाग जाते हैं। उधर पुलिस सुमन और साहिल की गुमशुदगी की तलाश में शहर का कोना-कोना छान रही है। यह केस सब इंस्पेक्टर जयप्रकाश जाटव (Ali Fazal) को दिया जाता है जो अपनी पर्सनल लाइफ में भी कुछ इनसिक्योरिटी से जूझ रहा है। उसके पिता (Rakesh Bedi) पुलिस स्टेशन में अपने बेटे को तवज्जो दिलाने के लिए रोज बिरयानी बनाकर लाते हैं। लेकिन जयप्रकाश अपने काम से खुद को साबित करने में लगा होता है।


7 एपिसोड की क्राइम सीरीज (Crime Series) में 1978 में हुई इस दर्दनाक घटना को बहुत ही बारीकी से दिखाया गया है। अपराधी द्वारा अपनी मां को जलाना, अपनी गर्लफ्रेंड को मारना और कई हत्याओं के बाद सुमन और साहिल के साथ दरिंदगी करने जैसी घटनाएं रूह कंपा देती है।
राख वेब सीरीज रिव्यू (Raakh Web Series Review)

डायरेक्शन- पाताललोक (Paatal Lok) जैसी शानदार सीरीज देकर तारीफ पाने वाले प्रोसित रॉय ने शानदार डायरेक्शन किया है। 1978 के भारत को दिखाने में वे सफल रहे हैं। टेलीफोन से लेकर कपड़े, रेडियो, लाइटिंग, कारें सबकुछ उस जमाने के भारत की छवि दिखाते हैं। वहीं सुमन और साहिल के मर्डर की स्टोरी के साथ-साथ अपराधियों की स्टोरी को पैरेलल दिखाना भी कहानी से बांधे रखता है।




एक्टिंग- सीरीज में अली फजल ने एक सधे हुए सब इंस्पेक्टर की भूमिका निभाई है जो प्रोफेशनल के साथ-साथ पर्सनल इनसिक्योरिटी से भी जूझ रहा है। अली ने अपनी भूमिका के साथ न्याय किया है। वहीं सोनाली और आमिर बशीर ने भी बच्चों के माता-पिता के रूप में अच्छा काम किया है हालांकि दोनों को स्क्रीन टाइम कम मिला है। वहीं सुमन और साहिल के किरदार में चाइल्ड आर्टिंस्ट दिव्या शर्मा और विवान शर्मा ने बेहतरीन काम किया है।




वहीं बाबू और रज्जो के किरदार में आकाश मखीजा और रमनदीप यादव ने अपने किरदारों को पूरी तरह जिया है। वे जब भी स्क्रीन पर आते हैं उनसे नफरत और खीझ होने लगती है इसका मतलब उन्होंने अपना काम वैसा ही किया जैसा उनके किरदारों के लिए जरूरी था।


स्टोरीटेलिंग- सीरीज की स्टोरीटेलिंग आपको आखिरी तक बांधे रखेगी। हालांकि अपराधियों का पता होने की वजह से ज्यादा सस्पेंस फील नहीं होगा लेकिन पैरेलल स्टोरीटेलिंग थ्रिलिंग है। सच्ची घटना से प्रेरित होने की वजह से कहानी से जुड़ा हुआ महसूस करेंगे।




इसके अलावा सीरीज के गाने और बैकग्राउंड म्यूजिक सिचुएशन पर फिट बैठता है। लाइटिंग और सिनेमैटोग्राफी ठीकठाक है वहीं टेक्निकल टीम ने अच्छा काम किया है।
कहां है कमी?

कहानी की कमियों में सबसे पहले सोनाली बेंद्रे का कम स्क्रीनटाइम और विक्टिम की फैमिली पर थोड़ा कम फोकस करना है। वहीं राकेश बेदी को भी कम स्क्रीनटाइम दिया गया है। 'धुरंधर' (Dhurandhar) के बाद दर्शक उन्हें और ज्यादा देखना चाहते हैं। वहीं बीच-बीच में स्टोरीटेलिंग थोड़ी धीमी लग सकती है क्योंकि पूरी सीरीज में इन्वेस्टिगेशन पर ही फोकस किया गया है। थोड़ा सुमन और साहिल की फैमिली बॉन्डिंग और इमोशनल फेज को दिखाना भी जरूरी था।



क्यों देखें?

राख (Raakh) रंगा-बिल्ला जैसे कुख्यात केस से प्रेरित है जिसने पूरा देश हिला दिया था, इनवेस्टिगेटिव क्राइम थ्रिलर पसंद करने वाले और सच्ची घटनाओं से प्रेरित कहानी पसंद करने वालों के लिए राख मस्ट वॉच है।
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