गजब का डिवाइस! अब इंसानों से बात करेंगे पालतू जानवर, क्या सच में ऐसा पॉसिबल?
गजब का डिवाइस! अब इंसानों से बात करेंगे पालतू जानवर, क्या सच में ऐसा पॉसिबल?
चीन की एक टेक कंपनी Meng Xiaoyi ने एक AI-बेस्ड पेट ट्रांसलेटर डिवाइस बनाया है, जो पालतू जानवरों की भावनाओं और आवाज को 95% सटीकता से समझने का दावा करता ...और पढ़ें

गजब का डिवाइस! अब इंसानों से बात करेंगे पालतू जानवर, क्या सच में ऐसा पॉसिबल?
जानवरों को पालने वाले लोग अक्सर ये जानने की कोशिश करते रहते हैं कि आखिर उनका डॉग, कैट या दूसरा पेट क्या कहने की कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच अब चीन की एक टेक कंपनी ने बड़ा दावा किया है। जी हां, कंपनी ने एक ऐसा AI डिवाइस बना दिया है, जो जानवरों की आवाज और हाव-भाव को समझकर इंसानों तक उनका मैसेज पहुंचाने में मदद कर सकता है। चलिए आज इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं...
AI बेस्ड Pet Translator
दरअसल, चीन के हांगझोउ स्थित स्टार्टअप Meng Xiaoyi ने AI बेस्ड Pet Translator पेश किया है। कंपनी का दावा है कि ये ट्रांसलेटर पालतू जानवरों के इमोशंस और वॉइस को 95% तक सटीक तरीके से समझ सकता है। कंपनी का ये भी कहना है कि ये सिर्फ एंटरटेनमेंट एप नहीं है, बल्कि इसमें एडवांस्ड AI टेक्नोलॉजी पर बेस्ड एक स्मार्ट कम्युनिकेशन डिवाइस है।
इस महीने की शुरुआत में यानी 1 मई से कंपनी ने इसके प्री-ऑर्डर शुरू किए थे और अब तक करीब 10 हजार इंटरनेशनल रिजर्वेशन मिलने का दावा भी किया गया है। बताया जा रहा है कि इस डिवाइस की कीमत 799 युआन यानी लगभग 11,300 रुपये है।
कैसे काम करता है AI Pet Translator?
ये छोटा डिवाइस पालतू जानवर के गले में लगाया जाता है। इसमें ऑडियो सेंसर मौजूद हैं और इसमें एक मूवमेंट ट्रैकिंग सिस्टम भी है, जो जानवर की आवाज, बॉडी लैंग्वेज, पोस्चर और बिहेवियर को रियल टाइम में रिकॉर्ड करता है।
इस सारे डेटा को इसके बाद AI सिस्टम पर रीड करता है और समझने की कोशिश करता है कि जानवर हैप्पी है या परेशान है। साथ ही ये डिवाइस ये भी पता लगता है कि कही जानवर भूखा तो नहीं है या किसी और इमोशन को बताना चाहता है।
दावों पर उठ रहे सवाल
दूसरी तरफ कुछ लोग इन दावों पर सवाल भी उठा रहे हैं। कंपनी ने ये तो कह दिया है कि ये डिवाइस 95% सटीक जवाब देता है, लेकिन कंपनी ने ये नहीं बताया है कि ये डेटा किस टेस्टिंग कंडीशन या कितने बड़े डेटा सेट पर बेस्ड है।
वहीं, वैज्ञानिक समुदाय और स्वतंत्र शोधकर्ताओं ने भी इस टेक्नोलॉजी को लेकर सवाल उठाए हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कंपनी ने अब तक कोई भी Peer-Reviewed Study या इंडिपेंडेंट टेस्टिंग रिपोर्ट जारी नहीं की है।
चीन की एक टेक कंपनी Meng Xiaoyi ने एक AI-बेस्ड पेट ट्रांसलेटर डिवाइस बनाया है, जो पालतू जानवरों की भावनाओं और आवाज को 95% सटीकता से समझने का दावा करता ...और पढ़ें

गजब का डिवाइस! अब इंसानों से बात करेंगे पालतू जानवर, क्या सच में ऐसा पॉसिबल?
जानवरों को पालने वाले लोग अक्सर ये जानने की कोशिश करते रहते हैं कि आखिर उनका डॉग, कैट या दूसरा पेट क्या कहने की कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच अब चीन की एक टेक कंपनी ने बड़ा दावा किया है। जी हां, कंपनी ने एक ऐसा AI डिवाइस बना दिया है, जो जानवरों की आवाज और हाव-भाव को समझकर इंसानों तक उनका मैसेज पहुंचाने में मदद कर सकता है। चलिए आज इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं...
AI बेस्ड Pet Translator
दरअसल, चीन के हांगझोउ स्थित स्टार्टअप Meng Xiaoyi ने AI बेस्ड Pet Translator पेश किया है। कंपनी का दावा है कि ये ट्रांसलेटर पालतू जानवरों के इमोशंस और वॉइस को 95% तक सटीक तरीके से समझ सकता है। कंपनी का ये भी कहना है कि ये सिर्फ एंटरटेनमेंट एप नहीं है, बल्कि इसमें एडवांस्ड AI टेक्नोलॉजी पर बेस्ड एक स्मार्ट कम्युनिकेशन डिवाइस है।
इस महीने की शुरुआत में यानी 1 मई से कंपनी ने इसके प्री-ऑर्डर शुरू किए थे और अब तक करीब 10 हजार इंटरनेशनल रिजर्वेशन मिलने का दावा भी किया गया है। बताया जा रहा है कि इस डिवाइस की कीमत 799 युआन यानी लगभग 11,300 रुपये है।
कैसे काम करता है AI Pet Translator?
ये छोटा डिवाइस पालतू जानवर के गले में लगाया जाता है। इसमें ऑडियो सेंसर मौजूद हैं और इसमें एक मूवमेंट ट्रैकिंग सिस्टम भी है, जो जानवर की आवाज, बॉडी लैंग्वेज, पोस्चर और बिहेवियर को रियल टाइम में रिकॉर्ड करता है।
इस सारे डेटा को इसके बाद AI सिस्टम पर रीड करता है और समझने की कोशिश करता है कि जानवर हैप्पी है या परेशान है। साथ ही ये डिवाइस ये भी पता लगता है कि कही जानवर भूखा तो नहीं है या किसी और इमोशन को बताना चाहता है।
दावों पर उठ रहे सवाल
दूसरी तरफ कुछ लोग इन दावों पर सवाल भी उठा रहे हैं। कंपनी ने ये तो कह दिया है कि ये डिवाइस 95% सटीक जवाब देता है, लेकिन कंपनी ने ये नहीं बताया है कि ये डेटा किस टेस्टिंग कंडीशन या कितने बड़े डेटा सेट पर बेस्ड है।
वहीं, वैज्ञानिक समुदाय और स्वतंत्र शोधकर्ताओं ने भी इस टेक्नोलॉजी को लेकर सवाल उठाए हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कंपनी ने अब तक कोई भी Peer-Reviewed Study या इंडिपेंडेंट टेस्टिंग रिपोर्ट जारी नहीं की है।
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