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2014 के बाद से भारत में इबोला का कोई नया मामला नहीं', WHO के ग्लोबल अलर्ट के बाद केंद्र सरकार ने बताया

2014 के बाद से भारत में इबोला का कोई नया मामला नहीं', WHO के ग्लोबल अलर्ट के बाद केंद्र सरकार ने बताया



विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कांगो और युगांडा में इबोला के प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) घोषित किया है, लेकिन ...और पढ़ें





पूर्वी कांगो में इबोला उपचार केंद्र के बाहर मौजूद स्वास्थ्यकर्मी।


WHO ने इबोला को PHEIC घोषित किया


भारतीय विशेषज्ञों ने कहा घबराने की जरूरत नहीं


भारत में 2014 से कोई इबोला केस नहीं


 विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने रविवार कांगो और युगांडा में इबोला के प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) घोषित कर दिया। इस पर भारतीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि इबोला कोविड-19 की तरह नहीं फैलता है। हालांकि, सतर्कता और समय पर पहचान अब भी बहुत जरूरी है।


स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि भारत में इबोला का अब तक कोई मामला सामने नहीं आया है। आखिरी बार साल 2014 में एक अंतरराष्ट्रीय यात्री की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) इस स्थिति पर करीब से नजर रखे हुए है।


बूंदों के जरिए फैलता है इबोला

AIIMS के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने बताया कि इबोला संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थों, खून, उल्टी, स्राव या दूषित चीजों के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। यह कोविड-19 से अलग है, जो सामान्य ड्रॉपलेट ट्रांसमिशन (बूंदों के जरिए) से फैलता है।


विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के पास निर्धारित केंद्रों पर विशेष RT-PCR जांच के जरिए इबोला का तेजी से पता लगाने की प्रयोगशाला क्षमता मौजूद है; हालांकि, बीमारी का शुरुआती स्तर पर ही क्लीनिकल संदेह होना और उसकी तुरंत रिपोर्ट करना अब भी बेहद जरूरी है।
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