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होर्मुज खुलेगा और परमाणु पर होगी चर्चा... ट्रंप ने मानी ईरान की बात, 14 सूत्रीय मसौदे पर बनी सहमति

होर्मुज खुलेगा और परमाणु पर होगी चर्चा... ट्रंप ने मानी ईरान की बात, 14 सूत्रीय मसौदे पर बनी सहमति

अमेरिका और ईरान के बीच 14 सूत्रीय शांति समझौते के मसौदे पर प्रारंभिक सहमति बन गई है, जिससे तीन महीने से चला आ रहा तनाव कम होने के संकेत मिले हैं। ...और पढ़ें





ट्रंप ने मानी ईरान की बात।


अमेरिका-ईरान 14 सूत्रीय शांति मसौदे पर बनी सहमति।


होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और परमाणु वार्ता पर जोर।


ईद के बाद शांति वार्ता शुरू होने की संभावना।


 अमेरिका और ईरान के बीच पिछले तीन महीनों से जारी तनाव कम होने के संकेत मिलने लगे हैं। ईरान की तरफ से तैयार 14 सूत्रीय शांति समझौता मसौदे पर अमेरिका ने प्रारंभिक सहमति दे दी है।


तीन चरणों में प्रस्तावित समझौते के तहत पहले चरण में औपचारिक रूप से युद्ध समाप्ति की घोषणा, दूसरे चरण में होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य आवाजाही बहाल करने और तीसरे चरण में व्यापक समझौते पर विस्तृत वार्ता शुरू करने की योजना है। जल्दी ही दोनों पक्षों के बीच शांति वार्ता शुरू हो सकती है।

ईद की छुट्टियों के बाद शुरू हो सकती है शांति वार्ता

पाकिस्तानी सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका द्वारा प्रारंभिक मसौदे को स्वीकार करने के बाद दोनों पक्षों के बीच अगले दौर की बातचीत ईद की छुट्टियों के बाद शुरू हो सकती है। रायटर्स के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी संकेत दिया है कि वार्ता आगे बढ़ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भी पुष्टि की है कि ईरान के साथ कई अहम मुद्दों पर व्यापक सहमति बन चुकी है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना भी शामिल है।


हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर होने तक ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी जारी रहेगी। ट्रंप ने कहा कि दोनों पक्षों के वार्ताकारों को जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए और कोई गलती नहीं होनी चाहिए। दोनों पक्षों को पूरा समय लेना चाहिए क्योंकि हमारे पास समय की कमी नहीं है और सबकुछ ठीक ढंग से होना चाहिए।


उन्होंने कहा कि ईरान के साथ हमारे संबंध पेशेवर और उत्पादक होने जा रहे हैं। उन्होंने ईरान को अब्राहम एकार्ड में भी शामिल होने का सुझाव दिया। एपी ने ईरानी सूत्रों के हवाले से दावा किया कि सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने समझौता मसौदे को मंजूरी दे दी है और अब इसे अंतिम स्वीकृति के लिए सुप्रीम लीडर के पास भेजा जाएगा।
कुछ मुद्दों पर मतभेद अब भी बने हुए हैं- तस्नीम न्यूज एजेंसी

हालांकि, तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार कुछ मुद्दों पर मतभेद अब भी बने हुए हैं, खासकर इस बात पर कि अमेरिका भविष्य में किसी तरह की बाधा नहीं डालेगा। ईरान के सर्वोच्च नेता के सैन्य सलाहकार मोहसिन रेजाई ने कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य का प्रबंधन करना तेहरान का कानूनी अधिकार है। उनके मुताबिक, इससे फारस की खाड़ी में पिछले 50 वर्षों से चली आ रही असुरक्षा समाप्त होगी।


भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजार को बाधित नहीं किया जाना चाहिए और समुद्री व्यापार मार्ग खुले रहना अंतरराष्ट्रीय हित में है। पीटीआई के अनुसार, भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।


उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दुनिया ईरान के परमाणु हथियारों की आशंका से मुक्त हो। रूबियो के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत स्थित ईरानी दूतावास ने कहा कि परमाणु तकनीक पर तेहरान का अविभाज्य अधिकार है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम नागरिक हितों के लिए- पेजेशकियान

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी कहा है कि ईरान दुनिया को आश्वस्त करने के लिए तैयार है कि उसका परमाणु कार्यक्रम नागरिक हितों के लिए है, न कि हथियार बनाने के लिए। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि तनाव कम करना इस सप्ताह की वार्ता का मुख्य उद्देश्य था, लेकिन कई विषयों पर अब भी मध्यस्थों के जरिए चर्चा जारी है।


समझौते के अहम पेच और समाधान सूत्रों के अनुसार, व्यापक समझौते पर बातचीत के लिए शुरुआती तौर पर 30 दिनों की समयसीमा तय की गई है, जिसे जरूरत पड़ने पर 60 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है। इसी दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भविष्य जैसे सबसे संवेदनशील मुद्दों पर भी चर्चा होगी।


संभावित समझौते में ईरान द्वारा परमाणु हथियार विकसित न करने की प्रतिबद्धता शामिल हो सकती है। साथ ही अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के निपटान पर भी सहमति बनने के संकेत हैं।
ईरान ने उच्च संवर्धित यूरेनियम को छोड़ने पर सिद्धांतत: सहमति दी- न्यूयार्क टाइम्स

न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, ईरान ने अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम को छोड़ने पर सिद्धांतत: सहमति दे दी है, भले ही वह सार्वजनिक तौर पर इसे स्वीकार न करे। संभावना है कि यूरेनियम की कुछ मात्रा को हल्का किया जाएगा, जबकि शेष को किसी तीसरे देश, संभवतः रूस को हस्तांतरित किया जाएगा।


बता दें कि 2015 में ओबामा प्रशासन के साथ हुए समझौते के तहत ईरान ने उस समय के अपने यूरेनियम भंडार का लगभग 97% हिस्सा रूस भेज दिया था।

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आइएईए) के अनुसार, ईरान के पास 60 प्रतिशत तक संवर्धित 440.9 किलोग्राम यूरेनियम मौजूद है, जिसे हथियार-ग्रेड स्तर तक पहुंचाने के लिए बहुत कम अतिरिक्त तकनीकी प्रक्रिया की जरूरत होगी।
ईरान को राहत दे सकता है अमेरिका

सूत्रों के मुताबिक, समझौते के तहत अमेरिका ईरान के विदेशों में फ्रीज फंड जारी करने और तेल निर्यात पर कुछ प्रतिबंधों में राहत देने पर विचार कर सकता है। बदले में ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को धीरे-धीरे सामान्य करेगा।


हालांकि, तेहरान ने इसे अमेरिकी प्रतिबद्धताओं के पालन से जोड़ा है।सोमवार को बाजार में उछाल संभव ऊर्जा बाजार इस घटनाक्रम पर करीबी नजर रखे हुए हैं। दुनिया की लगभग एक-पांचवीं तेल आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरती है। ऐसे में तनाव कम होने की खबरों को बाजार के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है।हालांकि, अबू धाबी राष्ट्रीय तेल कंपनी के प्रमुख का कहना है कि पूरी तरह सामान्य स्थिति 2027 से पहले लौटना मुश्किल हो सकता है।
इन सवालों के जवाब अब भी बाकीक्या समझौता केवल होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक आवाजाही बहाल करने तक सीमित है, या ईरान भविष्य में भी इस मार्ग पर नियंत्रण का दावा करेगा?
क्या होर्मुज से जहाजों की आवाजाही स्थायी रूप से सामान्य होगी, या ईरान “टोल” और निगरानी का अधिकार अपने पास रखेगा?
क्या अमेरिका ईरान की मांग के अनुसार विदेशों में फ्रीज 25 अरब डॉलर की राशि जारी करेगा?
क्या ईरान अपने लगभग बम-ग्रेड स्तर तक संवर्धित यूरेनियम को किसी तीसरे देश को सौंपेगा या उसे कम संवर्धित स्तर पर लाएगा?
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आइएईए) के अनुसार ईरान के पास मौजूद करीब 11 टन अन्य संवर्धित यूरेनियम का क्या होगा?
क्या ईरान को भविष्य में यूरेनियम संवर्धन जारी रखने की अनुमति मिलेगी?
क्या ईरान 20 वर्षों तक यूरेनियम संवर्धन रोकने पर सहमत होगा, जैसा संकेत राष्ट्रपति ट्रंप दे चुके हैं?
ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और उसके मिसाइल जखीरे का भविष्य क्या होगा?
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