रांची में गहराया पेट्रोल-डीजल का संकट, कई जगहों पर 500 रुपये से ज्यादा के तेल पर लगी पाबंदी
रांची में गहराया पेट्रोल-डीजल का संकट, कई जगहों पर 500 रुपये से ज्यादा के तेल पर लगी पाबंदी
राजधानी रांची में पेट्रोल-डीजल का गंभीर संकट गहरा गया है, जिससे शहर और आसपास के इलाकों में ईंधन की भारी किल्लत है। ...और पढ़ें

राजधानी रांची में पेट्रोल-डीजल आपूर्ति को लेकर गंभीर संकट उभरकर सामने आया है। एक ओर शहर के भीतर कुछ पेट्रोल पंपों पर अब भी गैलन में तेल भरकर बेचा जा रहा है, वहीं शहर से बाहर और आसपास के इलाकों में ईंधन की भारी किल्लत देखी जा रही है।
स्थिति इतनी विकट हो गई है कि कई पंपों पर उपभोक्ताओं को निर्धारित मात्रा से कम ईंधन दिया जा रहा है, शहर के बाहर कुछ जगहों पर पेट्रोल की बिक्री 500 रुपये तक सीमित कर दी गई है। तेल कंपनियों के साथ समन्वय कर आपूर्ति बहाल भी नहीं हो पा रही है।
रांची में पेट्रोल-डीजल संकट अब एक गंभीर रूप लेता जा रहा है। यदि जल्द ही आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो इसका व्यापक असर न केवल आम जनजीवन बल्कि राज्य की आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल शहरवासी अनिश्चितता और परेशानी के बीच इंतजार कर रहे हैं कि कब हालात सामान्य होंगे।
50 लीटर मांगने पर 30 लीटर ही डीजल
ग्रामीण और आउटर इलाके के कई पेट्रोल पंपों पर डीजल की आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित है। ट्रक चालकों और व्यवसायिक वाहनों के चालकों का कहना है कि 50 लीटर डीजल मांगने पर केवल 30 लीटर ही दिया जा रहा है। इससे माल ढुलाई, निर्माण कार्य और आवश्यक सेवाओं पर सीधा असर पड़ रहा है।
शहर के भीतर अलग तस्वीर
शहर के कुछ पेट्रोल पंपों पर अभी भी गैलन में तेल उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे आपूर्ति और वितरण में असमानता साफ नजर आ रही है। इससे यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी है या जानबूझकर प्राथमिकता तय की जा रही है।
राजधानी और आसपास के कई पंपों पर पेट्रोल की बिक्री 500 रुपये तक सीमित कर दी गई है। इससे रोजमर्रा के कामकाज के लिए वाहन उपयोग करने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लंबी कतारें और अनिश्चितता के बीच उपभोक्ता घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं।
पंप संचालकों का दावा 20 प्रतिशत कटौती
पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि आपूर्ति में करीब 20 प्रतिशत की कटौती की गई है। उनका आरोप है कि डिमांड नोट भेजने के बावजूद तेल कंपनियों की ओर से टैंकरों की डिलीवरी समय पर नहीं हो रही है। इससे स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है और उन्हें मजबूरी में बिक्री पर सीमा तय करनी पड़ रही है।
इस परेशानी के बाद 30 लीटर से अधिक डीजल नहीं देने का पंप चालकों ने निर्णय लिया है, वहीं पेट्रोल भी 50 लीटर तक सीमित किया गया है। लेकिन शहर में इस नियम को धड़ल्ले से तोड़ा जा रहा है।
संकट के पीछे संभावित कारण
हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी बड़े व्यवधान की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार टैंकरों की अनियमित आपूर्ति, लॉजिस्टिक बाधाएं और मांग में अचानक वृद्धि इस संकट के प्रमुख कारण हो सकते हैं। इसके अलावा, वितरण श्रृंखला में किसी स्तर पर बाधा या प्रबंधन की कमी भी स्थिति को बिगाड़ रही है।
दिखने लगा असर माल ढुलाई प्रभावित होने से बाजार में वस्तुओं की कीमत बढ़ने की आशंका
ऑटो, बस और टैक्सी सेवाओं पर दबाव
आपातकालीन सेवाओं के लिए भी ईंधन उपलब्धता को लेकर चिंता
निर्माण कार्य और छोटे उद्योगों पर असर
राजधानी रांची में पेट्रोल-डीजल का गंभीर संकट गहरा गया है, जिससे शहर और आसपास के इलाकों में ईंधन की भारी किल्लत है। ...और पढ़ें

राजधानी रांची में पेट्रोल-डीजल आपूर्ति को लेकर गंभीर संकट उभरकर सामने आया है। एक ओर शहर के भीतर कुछ पेट्रोल पंपों पर अब भी गैलन में तेल भरकर बेचा जा रहा है, वहीं शहर से बाहर और आसपास के इलाकों में ईंधन की भारी किल्लत देखी जा रही है।
स्थिति इतनी विकट हो गई है कि कई पंपों पर उपभोक्ताओं को निर्धारित मात्रा से कम ईंधन दिया जा रहा है, शहर के बाहर कुछ जगहों पर पेट्रोल की बिक्री 500 रुपये तक सीमित कर दी गई है। तेल कंपनियों के साथ समन्वय कर आपूर्ति बहाल भी नहीं हो पा रही है।
रांची में पेट्रोल-डीजल संकट अब एक गंभीर रूप लेता जा रहा है। यदि जल्द ही आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो इसका व्यापक असर न केवल आम जनजीवन बल्कि राज्य की आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल शहरवासी अनिश्चितता और परेशानी के बीच इंतजार कर रहे हैं कि कब हालात सामान्य होंगे।
50 लीटर मांगने पर 30 लीटर ही डीजल
ग्रामीण और आउटर इलाके के कई पेट्रोल पंपों पर डीजल की आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित है। ट्रक चालकों और व्यवसायिक वाहनों के चालकों का कहना है कि 50 लीटर डीजल मांगने पर केवल 30 लीटर ही दिया जा रहा है। इससे माल ढुलाई, निर्माण कार्य और आवश्यक सेवाओं पर सीधा असर पड़ रहा है।
शहर के भीतर अलग तस्वीर
शहर के कुछ पेट्रोल पंपों पर अभी भी गैलन में तेल उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे आपूर्ति और वितरण में असमानता साफ नजर आ रही है। इससे यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी है या जानबूझकर प्राथमिकता तय की जा रही है।
राजधानी और आसपास के कई पंपों पर पेट्रोल की बिक्री 500 रुपये तक सीमित कर दी गई है। इससे रोजमर्रा के कामकाज के लिए वाहन उपयोग करने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लंबी कतारें और अनिश्चितता के बीच उपभोक्ता घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं।
पंप संचालकों का दावा 20 प्रतिशत कटौती
पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि आपूर्ति में करीब 20 प्रतिशत की कटौती की गई है। उनका आरोप है कि डिमांड नोट भेजने के बावजूद तेल कंपनियों की ओर से टैंकरों की डिलीवरी समय पर नहीं हो रही है। इससे स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है और उन्हें मजबूरी में बिक्री पर सीमा तय करनी पड़ रही है।
इस परेशानी के बाद 30 लीटर से अधिक डीजल नहीं देने का पंप चालकों ने निर्णय लिया है, वहीं पेट्रोल भी 50 लीटर तक सीमित किया गया है। लेकिन शहर में इस नियम को धड़ल्ले से तोड़ा जा रहा है।
संकट के पीछे संभावित कारण
हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी बड़े व्यवधान की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार टैंकरों की अनियमित आपूर्ति, लॉजिस्टिक बाधाएं और मांग में अचानक वृद्धि इस संकट के प्रमुख कारण हो सकते हैं। इसके अलावा, वितरण श्रृंखला में किसी स्तर पर बाधा या प्रबंधन की कमी भी स्थिति को बिगाड़ रही है।
दिखने लगा असर माल ढुलाई प्रभावित होने से बाजार में वस्तुओं की कीमत बढ़ने की आशंका
ऑटो, बस और टैक्सी सेवाओं पर दबाव
आपातकालीन सेवाओं के लिए भी ईंधन उपलब्धता को लेकर चिंता
निर्माण कार्य और छोटे उद्योगों पर असर
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