डिजिटल हो गया जमाना, लेकिन गांवों में आज भी जारी है चुनावी चौपाल का दौर
डिजिटल हो गया जमाना, लेकिन गांवों में आज भी जारी है चुनावी चौपाल का दौर


गांव में चुनाव चौपाल के दौरान मौजूद ग्रामीणजन। सौजन्य-नईदुनिया
HIGHLIGHTSगांवों में आज भी चुनाव का वह पुराना दौर देखने को मिलता है।
आज भी पेड़ की छांव में, दुकानों पर, चौराहों पर, घरों के बाहर बने ओटलों पर बैठकर लोकसभा चुनाव की चर्चाएं की जाती है।
शहर से 15 किमी दूरी पर जिले की सबसे बड़ी पंचायत तिल्लौर खुर्द गांव में ग्रामीणों ने चुनावी चर्चा शुरू कर दी है।
हम चाहे अब मोबाइल को अपना सबसे बड़ा संवाद का माध्यम मानने लगे हैं, लेकिन गांवों में आज भी चुनाव का वह पुराना दौर देखने को मिलता है। आज भी पेड़ की छांव में, दुकानों पर, चौराहों पर, घरों के बाहर बने ओटलों पर बैठकर लोकसभा चुनाव की चर्चाएं की जाती है।
शहर से 15 किमी दूरी पर जिले की सबसे बड़ी पंचायत तिल्लौर खुर्द गांव में ग्रामीणों ने चुनावी चर्चा शुरू कर दी है। किसानों का मुद्दा इनकी सबसे बड़ी चर्चा का विषय होता है। प्रमुख मांग यही रहती है कि सरकार किसी की भी बने, लेकिन हमें हमारी फसल का उचित दाम मिलना चाहिए। शाम को खाना खाने के बाद गांव में चुनावी चौपाल लग जाती है। ग्रामीण एकत्र होते हैं और हंसी-मजाक के साथ ही गंभीर विषयों पर चर्चा करते हैं। यहां सिर्फ गांव के विकास की ही नहीं, बल्कि शहर, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों पर भी चर्चा होती है।
चौपाल के दौरान सुविधाओं की बात करते हुए दिनेश पहलवान ने बताया कि हमारे गांव में सिटी बस की सुविधा मिलने से काफी फायदा होने लगा है। प्रतिदिन इंदौर आने-जाने वाले लोगों को अब कोई परेशानी नहीं होती है। गरीब और मध्यवर्गीय परिवार के लोग आसानी से आवागमन करने लगे हैं। इसी बीच गुलाबचंद बाबा ने ठहाके लगाते हुए कहा कि यह सुविधा तो ठीक है, लेकिन लंबे समय से सड़क निर्माण कार्य के चलते हमें रालामंडल की ओर से आवागमन में समस्या हो रही है। इस सड़क का लंबे समय से निर्माण कार्य चल रहा है। वर्तमान में तो हमें मिर्जापुर होकर जाना पड़ता है, लेकिन इस मार्ग से भी भारी वाहन निकलने के कारण जाम की समस्या बनी रहती है।

गणेश पाटीदार खड़े हो गए और अपनी बात दमदारी से रखते हुए कहने लगे कि यह समस्या और सुविधा तो ठीक है, लेकिन हम सभी किसान परिवार से आते हैं। हमें हमारी फसल का उचित दाम मिलना चाहिए। क्योंकि हम रात-दिन मेहनत करते हैं। तभी मांगीलाल ने बात काटते हुए कहां कि गांव के अधिकांश युवा अब पढ़े-लिखे हैं। इंदौर सहित अन्य जिलों में जाकर पढ़ाई कर चुके हैं। इन युवाओं को भी अच्छा रोजगार मिलना चाहिए।
इसी बीच सुनील ने कहां कि हमारा गांव अब पहले से कितना बदल गया है। इसकी आबादी भी काफी बढ़ गई है। कई बड़ी कालोनियां अब यहां विकसित हो गई हैं। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि हमारा गांव तरक्की करने लगा है। संतोष मुकाती ने इसी बात को आगे बढ़ाते हुए कहां कि हमारे गांव में किसान भी अब नई तकनीकों के खेती करने लगे हैं। इससे किसानों का काम भी आसान हो गया है।
इसी बीच वरिष्ठ नागरिक अपना अनुभव सुनाते हुए कहने लगे कि चुनाव तो हमारे जमाने में होता था। तब बैलगाड़ी से भी प्रत्याशी यहां प्रचार करने के लिए आते थे। ढोल-नगाड़ों के साथ पर्चे घर-घर जाकर बांटते थे। इनके अलावा चौपाल में महेश पाटीदार, राजकुमार, संतोष राठौर, राकेश भंडारी, यतेंद्र, सचिन आदि मौजूद रहे।
सरकारी जमीन पर शराब दुकान समस्या
चौपाल के दौरान चर्चा में ग्रामीणों ने बताया कि हमारे गांव में सरकारी जमीन पर कब्जा कर शराब दुकान संचालित की जा रही है, लेकिन इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। यह शराब दुकान गांव के अंदर प्रवेश करते ही आती है, ऐसे में इसे यहां से हटाना चाहिए। इसके साथ ही खुले में यहां मांस की बिक्री होती है, इस पर भी इंदौर शहर की तरह ही खुले में बिक्री पर प्रतिबंध लगना चाहिए। बता दें कि यह आदर्श ग्राम है। इस गांव को सांसद ने गौद भी ले रखा है, लेकिन कई सुविधाओं से आज भी ग्रामीणजन वंचित है। यह गांव राऊ विधानसभा के अंतर्गत आता है।
HIGHLIGHTSगांवों में आज भी चुनाव का वह पुराना दौर देखने को मिलता है।
आज भी पेड़ की छांव में, दुकानों पर, चौराहों पर, घरों के बाहर बने ओटलों पर बैठकर लोकसभा चुनाव की चर्चाएं की जाती है।
शहर से 15 किमी दूरी पर जिले की सबसे बड़ी पंचायत तिल्लौर खुर्द गांव में ग्रामीणों ने चुनावी चर्चा शुरू कर दी है।
हम चाहे अब मोबाइल को अपना सबसे बड़ा संवाद का माध्यम मानने लगे हैं, लेकिन गांवों में आज भी चुनाव का वह पुराना दौर देखने को मिलता है। आज भी पेड़ की छांव में, दुकानों पर, चौराहों पर, घरों के बाहर बने ओटलों पर बैठकर लोकसभा चुनाव की चर्चाएं की जाती है।
शहर से 15 किमी दूरी पर जिले की सबसे बड़ी पंचायत तिल्लौर खुर्द गांव में ग्रामीणों ने चुनावी चर्चा शुरू कर दी है। किसानों का मुद्दा इनकी सबसे बड़ी चर्चा का विषय होता है। प्रमुख मांग यही रहती है कि सरकार किसी की भी बने, लेकिन हमें हमारी फसल का उचित दाम मिलना चाहिए। शाम को खाना खाने के बाद गांव में चुनावी चौपाल लग जाती है। ग्रामीण एकत्र होते हैं और हंसी-मजाक के साथ ही गंभीर विषयों पर चर्चा करते हैं। यहां सिर्फ गांव के विकास की ही नहीं, बल्कि शहर, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों पर भी चर्चा होती है।
चौपाल के दौरान सुविधाओं की बात करते हुए दिनेश पहलवान ने बताया कि हमारे गांव में सिटी बस की सुविधा मिलने से काफी फायदा होने लगा है। प्रतिदिन इंदौर आने-जाने वाले लोगों को अब कोई परेशानी नहीं होती है। गरीब और मध्यवर्गीय परिवार के लोग आसानी से आवागमन करने लगे हैं। इसी बीच गुलाबचंद बाबा ने ठहाके लगाते हुए कहा कि यह सुविधा तो ठीक है, लेकिन लंबे समय से सड़क निर्माण कार्य के चलते हमें रालामंडल की ओर से आवागमन में समस्या हो रही है। इस सड़क का लंबे समय से निर्माण कार्य चल रहा है। वर्तमान में तो हमें मिर्जापुर होकर जाना पड़ता है, लेकिन इस मार्ग से भी भारी वाहन निकलने के कारण जाम की समस्या बनी रहती है।

गणेश पाटीदार खड़े हो गए और अपनी बात दमदारी से रखते हुए कहने लगे कि यह समस्या और सुविधा तो ठीक है, लेकिन हम सभी किसान परिवार से आते हैं। हमें हमारी फसल का उचित दाम मिलना चाहिए। क्योंकि हम रात-दिन मेहनत करते हैं। तभी मांगीलाल ने बात काटते हुए कहां कि गांव के अधिकांश युवा अब पढ़े-लिखे हैं। इंदौर सहित अन्य जिलों में जाकर पढ़ाई कर चुके हैं। इन युवाओं को भी अच्छा रोजगार मिलना चाहिए।
इसी बीच सुनील ने कहां कि हमारा गांव अब पहले से कितना बदल गया है। इसकी आबादी भी काफी बढ़ गई है। कई बड़ी कालोनियां अब यहां विकसित हो गई हैं। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि हमारा गांव तरक्की करने लगा है। संतोष मुकाती ने इसी बात को आगे बढ़ाते हुए कहां कि हमारे गांव में किसान भी अब नई तकनीकों के खेती करने लगे हैं। इससे किसानों का काम भी आसान हो गया है।
इसी बीच वरिष्ठ नागरिक अपना अनुभव सुनाते हुए कहने लगे कि चुनाव तो हमारे जमाने में होता था। तब बैलगाड़ी से भी प्रत्याशी यहां प्रचार करने के लिए आते थे। ढोल-नगाड़ों के साथ पर्चे घर-घर जाकर बांटते थे। इनके अलावा चौपाल में महेश पाटीदार, राजकुमार, संतोष राठौर, राकेश भंडारी, यतेंद्र, सचिन आदि मौजूद रहे।
सरकारी जमीन पर शराब दुकान समस्या
चौपाल के दौरान चर्चा में ग्रामीणों ने बताया कि हमारे गांव में सरकारी जमीन पर कब्जा कर शराब दुकान संचालित की जा रही है, लेकिन इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। यह शराब दुकान गांव के अंदर प्रवेश करते ही आती है, ऐसे में इसे यहां से हटाना चाहिए। इसके साथ ही खुले में यहां मांस की बिक्री होती है, इस पर भी इंदौर शहर की तरह ही खुले में बिक्री पर प्रतिबंध लगना चाहिए। बता दें कि यह आदर्श ग्राम है। इस गांव को सांसद ने गौद भी ले रखा है, लेकिन कई सुविधाओं से आज भी ग्रामीणजन वंचित है। यह गांव राऊ विधानसभा के अंतर्गत आता है।
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