आरोपितों को मिली सशर्त जमानत को भी हाईकोर्ट ने खारिज किया,कहा-15 दिन के अंदर सभी को सरेंडर करवाकर भेजा जाए जेल
आरोपितों को मिली सशर्त जमानत को भी हाईकोर्ट ने खारिज किया,कहा-15 दिन के अंदर सभी को सरेंडर करवाकर भेजा जाए जेल
जम्मू कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने साल 1996 में अखनूर में हुए हत्याकांड से जुड़े एक मामले में हत्यारोपित रतनलाल धर्मपाल बचनलाल और कमला देवी की उम्र कैद की सजा को बरकरार रखने का आदेश दिया है।
आरोपितों को मिली सशर्त जमानत को भी हाईकोर्ट ने खारिज किया,कहा-15 दिन के अंदर सभी को सरेंडर करवाकर भेजा जाए जेलजम्मू, जागरण संवाददाता। निचली अदालत के फैसले को बहाल रखते हुए जम्मू कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट की दो जजों वाली खंडपीठ ने साल 1996 में अखनूर में हुए हत्याकांड से जुड़े एक मामले में हत्यारोपित रतनलाल, धर्मपाल, बचनलाल और कमला देवी की उम्र कैद की सजा को बरकरार रखने का आदेश दिया। आदेश में जस्टिस संजय धर और जस्टिस राजेश सेकरी ने कहा कि हत्या की इस वारदात को मृत जियालाल के घर के आंगन में रात दस बजे अंजाम दिया गया था।
यह भी साफ होता है कि आरोपित ना तो जिलालाल के पड़ोसी हैं और ना ही कहीं पास में रहते हैं। ऐसे में साफ होता है कि वे अपराध करने की मंशा से मृतक के घर आए हुए थे। वे अपने साथ लोहे की रॉड व खेती में काम आने वाले कई अन्य औजार लेकर आए थे। मामले के तहत हत्यारोपित रतनलाल ने जिलालाल के सिर पर लोहे की रॉड मारी थी, जिसके बाद वह अचेत होकर गिर पड़ा था। जियालाल के जमीन पर गिरने के बावजूद अन्य सभी आरोपित उसको पीटते रहे।
आरोपितों की सशर्त जमानत खारिज
मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने बीच-बचाव करने की कोशिश भी की थी, लेकिन हमलावर नहीं रुके थे। गवाहों ने भी आरोपितों के नाम लिए हैं। खंडपीठ के पास कोई ऐसा तर्क नहीं है कि वे निचली अदालत के फैसले को बदले। खंडपीठ ने यह भी कहा कि आरोपितों को जो सशर्त जमानत दी गई है, उसे भी खारिज करते हुए सभी को 15 दिन में सरेंडर कर जेल में भेजा जाए। यदि वे सरेंडर नहीं करते हैं तो उन पर कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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