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Lata Mangeshkar का वो गाना जिसने बचाई लाखों की जान, Nutan पर फिल्माया गया कल्ट गीत; आशिकों के लिए बना 'वरदान'!




Lata Mangeshkar का वो गाना जिसने बचाई लाखों की जान, Nutan पर फिल्माया गया कल्ट गीत; आशिकों के लिए बना 'वरदान'!

लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) का गाना कई लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित हुआ। इस गीत ने दिल टूटे आशिकों और डिप्रेशन से जूझ रहे लोगों को आत्महत्या से रोका।








लता दीदी के गाने ने बचाई लाखों 'आशिकों' की जान

HIGHLIGHTS

लता मंगेशकर का गाना जीवनरक्षक बना


'सरस्वतीचंद्र' फिल्म के इस गीत ने कई जानें बचाईं


गीत ने दिल टूटे आशिकों और डिप्रेशन पीड़ितों को सहारा दिया



एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा में संगीत का जिक्र जब-जब होगा, तब-तब स्वर सम्राज्ञी लता मंगेशकर का नाम सबसे पहले आएगा। लता दीदी ने सिनेमा को अपने सुरों का तोहफा दिया है, जिसका कर्ज शायद कोई नहीं चुका पाएगा। ये लता दीदी का गायन ही था कि उनकी धुनों और उनके गीतों ने लोगों की जान तक बचा ली। आज बात उस एक गाने की जिसने कई लोगों को मरने से बचाया।

कौन सा है वह गाना?

अब यूं तो लता दीदी ने हर इमोशन के लिए कोई ना कोई गाना जरूर गाया है। हालांकि एक गाना उनका ऐसा भी रहा है, जिसने कई लोगों की जान भी बचाई। सोचिए कोई अपनी जान देने जा रहा हो और लता मंगेशकर की आवाज सुनके अपना इरादा बदल दे। जी हां, कुछ ऐसा ही हुआ 1968 में आई एक फिल्म के गाने से और फिल्म का नाम था 'सरस्वतीचंद्र' (Sarswatichandra)।




इस फिल्म में एक ऐसा गाना था, जिसने कई लोगों की जान बचाई। इस गाने नाम था "छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए, यह मुनासिब नहीं आदमी के लिए..." (Chhod De Saari Duniya Kisi Ke Liye)। इस गाने को लता मंगेशकर ने अपनी आवाज से सजाया था। वहीं इस गाने को अभिनेत्री नूतन (Nutan) पर फिल्माया गया।


लता दीदी की आवाज ने बचाई कई लोगों की जान

लता दीदी के इस गीत का संगीत आनंदजी-कल्याणजी ने तैयार किया था। वहीं गाने के गीतकार इंदीवर थे। सरस्वतीचंद्र के इस गाने में नूतन (Nutan Songs) और अभिनेता मनीष नजर आए। इंदिवर गाने के शब्दों में एक बहुत बड़ा जीवन दर्शन छिपा था कि किसी एक इंसान के पीछे अपनी कीमती जिंदगी खत्म करना सही नहीं है।


इस गाने को लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) ने आवाज दी थी। गाने का संगीत तैयार किया आनंदजी-कल्याणजी ने और इस गाने के लिरिक्स लिखे थे इंदिवर ने। इस गाने को फिल्म के लीड स्टार्स नूतन (Nutan) और मनीष पर फिल्माया गया था। अब सवाल ये है कि आखिर इस गाने ने कैसे दिलटूटे आशिकों की जान बचाई।



दिलटूटे आशिकों के लिए 'वरदान' बना गाना

दरअसल फिल्म के इस गाने को जिस तरह से लिखा गया वो वाकई में कमाल था। गाने के बोल इंदीवर ने लिखे थे और गाने के ये बोल तो कमाल थे ही लेकिन ऊपर से लता जी की आवाज ने इन्हें और खास बना दिया। गाने के शब्दों में एक बहुत बड़ा जीवन दर्शन छिपा था कि किसी एक इंसान के पीछे अपनी कीमती जिंदगी खत्म करना सही नहीं है।


मतलब जब अक्सर लोग अपने प्यार या अपने किसी एक खास इंसान से हार जाते हैं, तो खुद को खत्म कर लेते हैं, यही सही नहीं है। इसी की कहानी को इस गाने में पिरोया गया है। कहा जाता है कि, फिल्म की रिलीज के बाद लता मंगेशकर और संगीतकार जोड़ी को ढेरों खत मिले। उनमें लोगों ने कबूल किया कि वे नाकाम मोहब्बत में अपनी जान देने जा रहे थे, लेकिन जब रेडियो पर यह गाना बजा और उन्होंने इन पंक्तियों को सुना, तो उनका इरादा बदल गया।




कहा जाता है कि ये गाना आया तो कई मनोचिकित्सकों ने इसे थैरेपी भी माना और कहा कि ये गाना वाकई में लोगों को सुकून पहुंचाकर गया। इसके साथ ही जो लोग डिप्रेशन का शिकार थे, कहीं ना कहीं उन्हें भी उससे बाहर निकलने में इस गाने ने मदद की।


माना ये भी गया कि लता दीदी की (Lata Mangeshkar Songs) आवाज में एक ऐसी हीलिंग पावर थी कि लोग खुद ब खुद शांत हो गए। ये शायद लता दीदी की आवाज का जादू ही है कि उन ना जाने कितने लोगों को एक तरह से बचा लिया। आज भी इस गाने की ताजगी और इसका जादू दर्शकों के दिलों पर चल रहा है।
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