54 साल बाद पर्दे पर लौटेगी Pakeezah, विदेशों में री-रिलीज होगी मीना कुमारी की फिल्म, 4K वर्जन का होगा प्रीमियर
54 साल बाद पर्दे पर लौटेगी Pakeezah, विदेशों में री-रिलीज होगी मीना कुमारी की फिल्म, 4K वर्जन का होगा प्रीमियर
हिंदी सिनेमा की वेटरन एक्ट्रेस मीना कुमारी की कल्ट फिल्म पाकीजा बड़े पर्दे पर दोबारा रिलीज होने जा रही है।
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फिल्म पाकीजा (फोटो क्रेडिट- IMDB)
HIGHLIGHTS
दोबारा रिलीज होगी फिल्म पाकीजा
विदेशों में होगा 4K वर्जन का प्रीमियर
मीना कुमारी और राज कुमार की कल्ट मूवी
एंटरटेनमेंट ब्यूरो, मुंबई। अभिनेत्री मीना कुमारी अभिनीत साल 1972 की क्लासिक फिल्म पाकीजा का 4K रीस्टोर वर्जन पहली बार फ्रांस के ल्योन में होने वाले फेस्टिवल ल्यूमेर और बीएफआइ लंदन फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित किया जाएगा।
कमाल अमरोही के निर्देशन में बनी इस फिल्म को उसके मूल स्वरूप में वापस लाने का काम गैर-लाभकारी संस्था फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन (एफएचएफ) ने किया है, जिसमें दो साल लगे हैं।
विदेशों में री रिलीज होगी पाकीजा
आने वाले अक्टूबर महीने में पाकीजा का ल्योन में वर्ल्ड प्रीमियर का नेतृत्व कान और ल्यूमेर के प्रमुख थिएरी फ्रेमाक्स करेंगे। फ्रांस के बाद फिल्म लंदन पहुंचेगी, जहां बीएफआइ आइमैक्स में इसकी स्क्रीनिंग होगी, जिसे एफएचएफ के निदेशक शिवेंद्र सिंह डुंगरपुर पेश करेंगे। इस मौके पर कमाल अमरोही के बच्चे ताजदार व रुखसार और उनके पोते बिलाल अमरोही भी मौजूद रहेंगे।
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शिवेंद्र सिंह डुंगरपुर ने कहा- पाकीजा को रीस्टोर करना उनका सपना था, जो अब तक के उनके सबसे कठिन रिस्टोरेशन में से एक है। इस फिल्म को उन्होंने अपने बचपन में बिहार के डुमरांव के एक सिनेमाघर में दादी के साथ देखा था। फिल्म का मूल कैमरा नेगेटिव लगभग पिघल चुका था।
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रंग फीके पड़ चुके थे और फिल्म पर खरोंच और फफूंदी के निशान थे। ऐसे में कमाल अमरोही की मूल कल्पना को फिर से पर्दे पर जीवित करना सबसे बड़ी चुनौती थी। रीस्टोरेशन के दौरान फिल्म की कुछ मूल तस्वीरें भी मिली, जिन्होंने फिल्म के रंग और दृश्यात्मक रूप को दोबारा तैयार करने में मदद की।
पाकीजा का किस्सा
डुंगरपुर ने कमाल अमरोही के बेटे ताजदार और बेटी रुखसार से भी सलाह ली। उन्हें फिल्म के निर्माण से जुड़ी कई बातें याद थीं। ताजदार अमरोही ने साल 1972 में फिल्म के प्रीमियर से जुड़ी यादें साझा करते हुए कहा कि फिल्म के प्रिंट वाले डिब्बे को पालकी में रखकर मराठा मंदिर लाया गया था।

मैंने कभी नहीं सोचा था कि 54 साल बाद मैं अपने परिवार के साथ लंदन में फिल्म के रीस्टोर वर्जन के गाला प्रीमियर को पेश करूंगा। मेरे पिता ने इस फिल्म में अपना सब कुछ लगा दिया था। जब हम बच्चे उनसे कुछ मांगते थे, तो उनका जवाब होता था पाकीजा के बाद। पाकीजा उनके जीवन का मिशन था।
फिल्म चार फरवरी, 1972 को रिलीज हुई थी। 31 मार्च, 1972 को मीना कुमारी का निधन हो गया था। फिल्म ल्योन के फेस्टिवल ल्यूमेर व बीएफआइ लंदन फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित होगी। दो साल में फिल्म को मूल स्वरूप में लाने का काम फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन ने किया।
निर्माण में लगे 15 साल
उल्लेखनीय है कि पाकीजा की कल्पना पिछली सदी के छठे दशक के मध्य में कमाल अमरोही ने अपनी पत्नी मीना कुमारी की खूबसूरती को समर्पित फिल्म के रूप में की थी। इसके निर्माण में करीब 15 साल लगे। फिल्म की शूटिंग साल 1956 में ब्लैक एंड व्हाइट में शुरू हुई।
साल 1958 में इसे कलर में शूट करने का फैसला किया गया। फिल्म की कहानी लखनऊ में नवाबों के अंतिम दौर की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिसमें मीना कुमारी ने तवायफ नरगिस व उसकी बेटी साहिबजान, दोनों भूमिकाएं निभाई थीं।
नष्ट हो गई थी शूटिंग रील
एक स्टूडियो में लगी आग के कारण फिल्म के मूल ब्लैक एंड व्हाइट निगेटिव का एक हिस्सा भी नष्ट हो गया था। 1964 तक फिल्म का काम रुक गया था। इसी दौरान निजी मतभेदों के कारण कमाल अमरोही और मीना कुमारी अलग हो गए। अभिनेता सुनील दत्त और अभिनेत्री नरगिस ने फिल्म की शूट की गई फुटेज देखी और बीमार मीना कुमारी को फिल्म को पूरा करने के लिए प्रेरित किया।
हिंदी सिनेमा की वेटरन एक्ट्रेस मीना कुमारी की कल्ट फिल्म पाकीजा बड़े पर्दे पर दोबारा रिलीज होने जा रही है।
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फिल्म पाकीजा (फोटो क्रेडिट- IMDB)
HIGHLIGHTS
दोबारा रिलीज होगी फिल्म पाकीजा
विदेशों में होगा 4K वर्जन का प्रीमियर
मीना कुमारी और राज कुमार की कल्ट मूवी
एंटरटेनमेंट ब्यूरो, मुंबई। अभिनेत्री मीना कुमारी अभिनीत साल 1972 की क्लासिक फिल्म पाकीजा का 4K रीस्टोर वर्जन पहली बार फ्रांस के ल्योन में होने वाले फेस्टिवल ल्यूमेर और बीएफआइ लंदन फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित किया जाएगा।
कमाल अमरोही के निर्देशन में बनी इस फिल्म को उसके मूल स्वरूप में वापस लाने का काम गैर-लाभकारी संस्था फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन (एफएचएफ) ने किया है, जिसमें दो साल लगे हैं।
विदेशों में री रिलीज होगी पाकीजा
आने वाले अक्टूबर महीने में पाकीजा का ल्योन में वर्ल्ड प्रीमियर का नेतृत्व कान और ल्यूमेर के प्रमुख थिएरी फ्रेमाक्स करेंगे। फ्रांस के बाद फिल्म लंदन पहुंचेगी, जहां बीएफआइ आइमैक्स में इसकी स्क्रीनिंग होगी, जिसे एफएचएफ के निदेशक शिवेंद्र सिंह डुंगरपुर पेश करेंगे। इस मौके पर कमाल अमरोही के बच्चे ताजदार व रुखसार और उनके पोते बिलाल अमरोही भी मौजूद रहेंगे।
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शिवेंद्र सिंह डुंगरपुर ने कहा- पाकीजा को रीस्टोर करना उनका सपना था, जो अब तक के उनके सबसे कठिन रिस्टोरेशन में से एक है। इस फिल्म को उन्होंने अपने बचपन में बिहार के डुमरांव के एक सिनेमाघर में दादी के साथ देखा था। फिल्म का मूल कैमरा नेगेटिव लगभग पिघल चुका था।
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रंग फीके पड़ चुके थे और फिल्म पर खरोंच और फफूंदी के निशान थे। ऐसे में कमाल अमरोही की मूल कल्पना को फिर से पर्दे पर जीवित करना सबसे बड़ी चुनौती थी। रीस्टोरेशन के दौरान फिल्म की कुछ मूल तस्वीरें भी मिली, जिन्होंने फिल्म के रंग और दृश्यात्मक रूप को दोबारा तैयार करने में मदद की।
पाकीजा का किस्सा
डुंगरपुर ने कमाल अमरोही के बेटे ताजदार और बेटी रुखसार से भी सलाह ली। उन्हें फिल्म के निर्माण से जुड़ी कई बातें याद थीं। ताजदार अमरोही ने साल 1972 में फिल्म के प्रीमियर से जुड़ी यादें साझा करते हुए कहा कि फिल्म के प्रिंट वाले डिब्बे को पालकी में रखकर मराठा मंदिर लाया गया था।

मैंने कभी नहीं सोचा था कि 54 साल बाद मैं अपने परिवार के साथ लंदन में फिल्म के रीस्टोर वर्जन के गाला प्रीमियर को पेश करूंगा। मेरे पिता ने इस फिल्म में अपना सब कुछ लगा दिया था। जब हम बच्चे उनसे कुछ मांगते थे, तो उनका जवाब होता था पाकीजा के बाद। पाकीजा उनके जीवन का मिशन था।
फिल्म चार फरवरी, 1972 को रिलीज हुई थी। 31 मार्च, 1972 को मीना कुमारी का निधन हो गया था। फिल्म ल्योन के फेस्टिवल ल्यूमेर व बीएफआइ लंदन फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित होगी। दो साल में फिल्म को मूल स्वरूप में लाने का काम फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन ने किया।
निर्माण में लगे 15 साल
उल्लेखनीय है कि पाकीजा की कल्पना पिछली सदी के छठे दशक के मध्य में कमाल अमरोही ने अपनी पत्नी मीना कुमारी की खूबसूरती को समर्पित फिल्म के रूप में की थी। इसके निर्माण में करीब 15 साल लगे। फिल्म की शूटिंग साल 1956 में ब्लैक एंड व्हाइट में शुरू हुई।
साल 1958 में इसे कलर में शूट करने का फैसला किया गया। फिल्म की कहानी लखनऊ में नवाबों के अंतिम दौर की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिसमें मीना कुमारी ने तवायफ नरगिस व उसकी बेटी साहिबजान, दोनों भूमिकाएं निभाई थीं।
नष्ट हो गई थी शूटिंग रील
एक स्टूडियो में लगी आग के कारण फिल्म के मूल ब्लैक एंड व्हाइट निगेटिव का एक हिस्सा भी नष्ट हो गया था। 1964 तक फिल्म का काम रुक गया था। इसी दौरान निजी मतभेदों के कारण कमाल अमरोही और मीना कुमारी अलग हो गए। अभिनेता सुनील दत्त और अभिनेत्री नरगिस ने फिल्म की शूट की गई फुटेज देखी और बीमार मीना कुमारी को फिल्म को पूरा करने के लिए प्रेरित किया।
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Mirchmasala
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