मदरहुड का तनाव या दिमागी बीमारी? US में 3 बच्चों की हत्या करने वाली मां ने मांगी थी मदद; डॉक्टरों की गवाही पर उठे सवाल
मदरहुड का तनाव या दिमागी बीमारी? US में 3 बच्चों की हत्या करने वाली मां ने मांगी थी मदद; डॉक्टरों की गवाही पर उठे सवाल
अमेरिका में लिंडसे क्लैंसी पर अपने तीन बच्चों की हत्या का आरोप है, बचाव पक्ष इसे पोस्टपार्टम साइकोसिस का नतीजा बता रहा है। ...और पढ़ें

लिंडसे क्लैंसी पर अपने तीन बच्चों की हत्या का आरोप
डिजिटल डेस्क, अमेरिका। लिंडसे क्लैंसी का केस अमेरिका का सबसे दुखद मर्डर केस बन गया है। यह मामला सिर्फ एक अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि यह इस बात पर गंभीर सवाल उठाता है कि जब एक मां बार-बार मानसिक मदद मांगती है और उसकी अनदेखी होती है, तो क्या नतीजे हो सकते हैं।
तीन बच्चों की हत्या का आरोप
जनवरी 2023 में 32 साल की लिंडसे क्लैंसी पर अपने तीन छोटे बच्चों, कैलन (8 महीने), कोरा (5 साल) और डॉसन (3 साल) की हत्या का आरोप लगा। इन हत्याओं के तुरंत बाद लिंडसे ने आत्महत्या की कोशिश में दूसरी मंजिल से छलांग लगा दी, जिससे उनकी कमर के नीचे का हिस्सा हमेशा के लिए लकवाग्रस्त हो गया।
लिंडसे इस बात से इनकार नहीं करतीं कि बच्चों की मौत उनकी वजह से हुई, लेकिन उनके बचाव पक्ष का कहना है कि वह पोस्टपार्टम साइकोसिस से जूझ रही थीं और घटना के समय उनका असलियत से संपर्क टूट चुका था।
डॉक्टरों से लिंडसे ने मांगी थी मदद
इस घटना से कुछ महीने पहले लिंडसे ने नींद न आने, एंग्जायटी, सुन्नपन और बुरे विचारों के लिए डॉक्टरों से लगातार मदद मांगी थी। इलाज के दौरान उन्हें 13 अलग-अलग तरह की साइकियाट्रिक दवाएं दी गईं।
एक्सपर्ट्स का तर्क है कि उन्हें जरूरत से ज्यादा दवाएं दी गईं और डॉक्टर उनकी बिगड़ती दिमागी हालत को पहचानने में नाकाम रहे। डॉक्टरों ने उन्हें कम जोखिम वाला मरीजा माना और लक्षणों को गंभीरता से नहीं लिया।
बीमारी का छिपा चेहरा
वहीं दोस्तों और रिश्तेदारों ने भी लिंडसे का बचाव किया। उन्होंने लिंडसे को हमेशा एक प्यार करने वाली और अच्छी मां बताया। घटना वाले दिन भी वह अपने बच्चे को रूटीन चेकअप के लिए डॉक्टर के पास ले गई थीं, जहां सब कुछ सामान्य लग रहा था।
पोस्टपार्टम साइकोसिस क्या है?
मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. निकोल कुमी ने कोर्ट में समझाया कि पोस्टपार्टम साइकोसिस में मरीज बाहर से बिल्कुल ठीक काम करता दिख सकता है, लेकिन अंदर ही अंदर वह मतिभ्रम का शिकार होता है।
लगातार नींद न आना इसका एक बड़ा शुरुआती संकेत होता है, जिसे अक्सर लोग सिर्फ 'मातृत्व का सामान्य तनाव' मानकर टाल देते हैं।
अदालत के सामने बड़ा सवाल
इस मामले में जहां अभियोजन पक्ष इसे इरादतन हत्या और आत्महत्या की कोशिश मान रहा है, वहीं बचाव पक्ष इसे मानसिक संतुलन बिगड़ने का नतीजा बता रहा है।
जूरी के सामने अब मुख्य सवाल यही है कि क्या एक देखभाल करने वाली मां किसी ऐसी गंभीर मानसिक बीमारी का शिकार हो सकती थी, जिसे उसके आसपास के लोग और डॉक्टर समय रहते पहचान नहीं पाए?
यह मामला सिर्फ एक कोर्ट केस नहीं रहा, बल्कि इसने पूरे देश के हेल्थकेयर सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि कैसे समय पर सही मदद न मिलने से एक हंसता-खेलता परिवार तबाह हो गया।
अमेरिका में लिंडसे क्लैंसी पर अपने तीन बच्चों की हत्या का आरोप है, बचाव पक्ष इसे पोस्टपार्टम साइकोसिस का नतीजा बता रहा है। ...और पढ़ें

लिंडसे क्लैंसी पर अपने तीन बच्चों की हत्या का आरोप
डिजिटल डेस्क, अमेरिका। लिंडसे क्लैंसी का केस अमेरिका का सबसे दुखद मर्डर केस बन गया है। यह मामला सिर्फ एक अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि यह इस बात पर गंभीर सवाल उठाता है कि जब एक मां बार-बार मानसिक मदद मांगती है और उसकी अनदेखी होती है, तो क्या नतीजे हो सकते हैं।
तीन बच्चों की हत्या का आरोप
जनवरी 2023 में 32 साल की लिंडसे क्लैंसी पर अपने तीन छोटे बच्चों, कैलन (8 महीने), कोरा (5 साल) और डॉसन (3 साल) की हत्या का आरोप लगा। इन हत्याओं के तुरंत बाद लिंडसे ने आत्महत्या की कोशिश में दूसरी मंजिल से छलांग लगा दी, जिससे उनकी कमर के नीचे का हिस्सा हमेशा के लिए लकवाग्रस्त हो गया।
लिंडसे इस बात से इनकार नहीं करतीं कि बच्चों की मौत उनकी वजह से हुई, लेकिन उनके बचाव पक्ष का कहना है कि वह पोस्टपार्टम साइकोसिस से जूझ रही थीं और घटना के समय उनका असलियत से संपर्क टूट चुका था।
डॉक्टरों से लिंडसे ने मांगी थी मदद
इस घटना से कुछ महीने पहले लिंडसे ने नींद न आने, एंग्जायटी, सुन्नपन और बुरे विचारों के लिए डॉक्टरों से लगातार मदद मांगी थी। इलाज के दौरान उन्हें 13 अलग-अलग तरह की साइकियाट्रिक दवाएं दी गईं।
एक्सपर्ट्स का तर्क है कि उन्हें जरूरत से ज्यादा दवाएं दी गईं और डॉक्टर उनकी बिगड़ती दिमागी हालत को पहचानने में नाकाम रहे। डॉक्टरों ने उन्हें कम जोखिम वाला मरीजा माना और लक्षणों को गंभीरता से नहीं लिया।
बीमारी का छिपा चेहरा
वहीं दोस्तों और रिश्तेदारों ने भी लिंडसे का बचाव किया। उन्होंने लिंडसे को हमेशा एक प्यार करने वाली और अच्छी मां बताया। घटना वाले दिन भी वह अपने बच्चे को रूटीन चेकअप के लिए डॉक्टर के पास ले गई थीं, जहां सब कुछ सामान्य लग रहा था।
पोस्टपार्टम साइकोसिस क्या है?
मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. निकोल कुमी ने कोर्ट में समझाया कि पोस्टपार्टम साइकोसिस में मरीज बाहर से बिल्कुल ठीक काम करता दिख सकता है, लेकिन अंदर ही अंदर वह मतिभ्रम का शिकार होता है।
लगातार नींद न आना इसका एक बड़ा शुरुआती संकेत होता है, जिसे अक्सर लोग सिर्फ 'मातृत्व का सामान्य तनाव' मानकर टाल देते हैं।
अदालत के सामने बड़ा सवाल
इस मामले में जहां अभियोजन पक्ष इसे इरादतन हत्या और आत्महत्या की कोशिश मान रहा है, वहीं बचाव पक्ष इसे मानसिक संतुलन बिगड़ने का नतीजा बता रहा है।
जूरी के सामने अब मुख्य सवाल यही है कि क्या एक देखभाल करने वाली मां किसी ऐसी गंभीर मानसिक बीमारी का शिकार हो सकती थी, जिसे उसके आसपास के लोग और डॉक्टर समय रहते पहचान नहीं पाए?
यह मामला सिर्फ एक कोर्ट केस नहीं रहा, बल्कि इसने पूरे देश के हेल्थकेयर सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि कैसे समय पर सही मदद न मिलने से एक हंसता-खेलता परिवार तबाह हो गया।
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