रतन टाटा के साथ 2017 में पहली बार जमशेदपुर आए थे एन. चंद्रशेखरन, शहरवासियों से कराया था परिचय
रतन टाटा के साथ 2017 में पहली बार जमशेदपुर आए थे एन. चंद्रशेखरन, शहरवासियों से कराया था परिचय
एन. चंद्रशेखरन के टाटा संस चेयरमैन पद से इस्तीफे के बाद जमशेदपुर से उनके गहरे रिश्ते की यादें ताजा हो गईं। रतन टाटा ने 2017 में उन्हें शहरवासियों से प ...और पढ़ें

रतन टाटा के साथ चंद्रशेखरन और बगल मे टी वी नरेन्द्रन ( फाइल फोटो )
रतन टाटा ने 2017 में चंद्रशेखरन को जमशेदपुर से परिचित कराया।
संस्थापक दिवस समारोह में उनकी नियमित उपस्थिति बनी रही।
अंतिम दौरे (2026) में 11,000 करोड़ के निवेश की घोषणा की।
संवाददाता, जमशेदपुर। टाटा संस के चेयरमैन पद से एन. चंद्रशेखरन के इस्तीफे की घोषणा के बाद जमशेदपुर से उनके गहरे रिश्ते की यादें एक बार फिर ताजा हो गई हैं। करीब एक दशक के दौरान चंद्रशेखरन जमशेदपुर के संस्थापक दिवस समारोह का अभिन्न हिस्सा बन गए।
खास बात यह है कि वे पहली बार वर्ष 2017 में रतन टाटा के साथ जमशेदपुर आए थे। इसी दौरान रतन टाटा ने संस्थापक दिवस के अवसर पर शहरवासियों से उनका परिचय टाटा समूह के नए अध्यक्ष के रूप में कराया था।
वर्ष 2017 का वह अवसर इसलिए भी खास था क्योंकि जनवरी में चंद्रशेखरन को टाटा संस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था और फरवरी में उन्होंने पदभार संभाला था। इसके तुरंत बाद मार्च में वे पहली बार जमशेदपुर पहुंचे।
रतन टाटा ने शहरवासियों के सामने चंद्रशेखरन पर भरोसा जताते हुए कहा था कि उनके नेतृत्व में टाटा समूह और जमशेदपुर विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचेंगे।
रतन टाटा ने कराया था शहर से परिचय
जमशेदपुर के वरिष्ठ उद्यमी शेषनाथ पाठक ने वर्ष 2017 की उस मुलाकात को याद करते हुए बताया था कि संस्थापक दिवस समारोह में रतन टाटा ने ही नवनियुक्त अध्यक्ष एन. चंद्रशेखरन का शहरवासियों से परिचय कराया था। रतन टाटा ने उस समय चंद्रशेखरन के नेतृत्व में शहर की प्रगति को लेकर विश्वास जताया था।
इसके बाद चंद्रशेखरन का जमशेदपुर से रिश्ता लगातार मजबूत होता गया। संस्थापक दिवस पर उनकी नियमित मौजूदगी शहरवासियों और टाटा कर्मचारियों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बन गई। वह केवल कंपनी के शीर्ष अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि जमशेदपुर की औद्योगिक परंपरा और टाटा परिवार की विरासत से जुड़े एक महत्वपूर्ण चेहरे के रूप में पहचाने जाने लगे।
2021 में रतन टाटा के साथ फिर आए थे
वर्ष 2021 में भी चंद्रशेखरन और रतन टाटा एक साथ जमशेदपुर पहुंचे थे। दो मार्च को संस्थापक दिवस की पूर्व संध्या पर दोनों ने शहर में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। टाटा स्टील के अनुसार, इसी दिन रतन टाटा और चंद्रशेखरन ने नौसेना टाटा हॉकी अकादमी के भवन सहित कई परियोजनाओं का उद्घाटन किया था। जुबिली पार्क में संस्थापक की प्रतिमा के समक्ष विद्युत सज्जा का उद्घाटन भी चंद्रशेखरन ने किया था।
रतन टाटा के साथ उनका यह जुड़ाव उनके जमशेदपुर दौरे की खास पहचान रहा। वर्ष 2018 में भी दोनों ने संस्थापक दिवस के अवसर पर जुबिली पार्क की विद्युत सज्जा का उद्घाटन किया था। उस दौरान दोनों के बटन दबाते ही जुबिली पार्क रोशनी से जगमगा उठा था।
हर साल संस्थापक दिवस पर बढ़ता गया जुड़ाव
समय के साथ चंद्रशेखरन जमशेदपुर के लिए टाटा समूह की योजनाओं का प्रमुख चेहरा बन गए। तीन मार्च को संस्थापक दिवस के अवसर पर उनका शहर आना एक परंपरा की तरह बन गया। मार्च 2026 में वे संस्थापक जमशेदजी टाटा की 187वीं जयंती के अवसर पर जमशेदपुर पहुंचे थे।
दो मार्च की शाम उन्होंने जुबिली पार्क में विद्युत सज्जा का उद्घाटन किया था। इस अवसर पर टाटा ट्रस्ट के अध्यक्ष नोएल टाटा और टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी टीवी नरेंद्रन भी मौजूद थे।
जमशेदपुर हमेशा टाटा समूह के विकास और इतिहास के केंद्र में रहेगा
संस्थापक दिवस के मुख्य समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत में चंद्रशेखरन ने जमशेदपुर के साथ टाटा समूह के रिश्ते को लेकर बेहद महत्वपूर्ण बात कही थी। उन्होंने कहा था कि जमशेदपुर हमेशा टाटा समूह के विकास और इतिहास के केंद्र में रहेगा।
उनका यह बयान महज औपचारिक टिप्पणी नहीं था। जमशेदपुर टाटा समूह की औद्योगिक यात्रा का वह शहर है, जहां समूह के इस्पात उद्योग के साथ एक नियोजित औद्योगिक नगर की कल्पना आकार लेती गई। टाटा समूह के अनुसार, साकची में नियोजित औद्योगिक शहर की नींव पड़ी और बाद में इसे जमशेदजी टाटा के सम्मान में जमशेदपुर नाम दिया गया।
11 हजार करोड़ के निवेश की घोषणा भी की
अपने अंतिम जमशेदपुर दौरे में चंद्रशेखरन ने झारखंड में करीब 11 हजार करोड़ रुपये के निवेश की जानकारी दी थी। इस निवेश के माध्यम से नई तकनीक, उन्नत इस्पात उत्पादन और कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में काम किए जाने की बात कही गई थी।
उन्होंने हाइड्रोजन आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने और टाटा मोटर्स के जमशेदपुर संयंत्र से हाइड्रोजन से चलने वाले वाहनों के निर्माण की योजना का भी संकेत दिया था।
टाटा वर्कर्स यूनियन भी पहुंचे थे
तीन मार्च 2026 को चंद्रशेखरन टाटा वर्कर्स यूनियन कार्यालय भी पहुंचे थे। उन्होंने टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक टीवी नरेंद्रन के साथ यूनियन नेताओं से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने यूनियन के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय वीजी गोपाल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और कर्मचारियों के कल्याण से जुड़े विषयों पर चर्चा की।
जमशेदपुर से चंद्रशेखरन का रिश्ता इस मायने में भी खास रहा कि उनके शहर से परिचय की शुरुआत ही रतन टाटा के साथ हुई थी। 2017 में जिस शहर के सामने रतन टाटा ने उन्हें टाटा समूह के नए नेतृत्वकर्ता के रूप में प्रस्तुत किया था, उसी शहर में नौ साल बाद उन्होंने यह भरोसा दोहराया कि जमशेदपुर टाटा समूह के विकास और इतिहास के केंद्र में हमेशा बना रहेगा। उनके अंतिम दौरे ने इस रिश्ते को एक यादगार अध्याय के रूप में दर्ज कर दिया है।
एन. चंद्रशेखरन के टाटा संस चेयरमैन पद से इस्तीफे के बाद जमशेदपुर से उनके गहरे रिश्ते की यादें ताजा हो गईं। रतन टाटा ने 2017 में उन्हें शहरवासियों से प ...और पढ़ें

रतन टाटा के साथ चंद्रशेखरन और बगल मे टी वी नरेन्द्रन ( फाइल फोटो )
रतन टाटा ने 2017 में चंद्रशेखरन को जमशेदपुर से परिचित कराया।
संस्थापक दिवस समारोह में उनकी नियमित उपस्थिति बनी रही।
अंतिम दौरे (2026) में 11,000 करोड़ के निवेश की घोषणा की।
संवाददाता, जमशेदपुर। टाटा संस के चेयरमैन पद से एन. चंद्रशेखरन के इस्तीफे की घोषणा के बाद जमशेदपुर से उनके गहरे रिश्ते की यादें एक बार फिर ताजा हो गई हैं। करीब एक दशक के दौरान चंद्रशेखरन जमशेदपुर के संस्थापक दिवस समारोह का अभिन्न हिस्सा बन गए।
खास बात यह है कि वे पहली बार वर्ष 2017 में रतन टाटा के साथ जमशेदपुर आए थे। इसी दौरान रतन टाटा ने संस्थापक दिवस के अवसर पर शहरवासियों से उनका परिचय टाटा समूह के नए अध्यक्ष के रूप में कराया था।
वर्ष 2017 का वह अवसर इसलिए भी खास था क्योंकि जनवरी में चंद्रशेखरन को टाटा संस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था और फरवरी में उन्होंने पदभार संभाला था। इसके तुरंत बाद मार्च में वे पहली बार जमशेदपुर पहुंचे।
रतन टाटा ने शहरवासियों के सामने चंद्रशेखरन पर भरोसा जताते हुए कहा था कि उनके नेतृत्व में टाटा समूह और जमशेदपुर विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचेंगे।
रतन टाटा ने कराया था शहर से परिचय
जमशेदपुर के वरिष्ठ उद्यमी शेषनाथ पाठक ने वर्ष 2017 की उस मुलाकात को याद करते हुए बताया था कि संस्थापक दिवस समारोह में रतन टाटा ने ही नवनियुक्त अध्यक्ष एन. चंद्रशेखरन का शहरवासियों से परिचय कराया था। रतन टाटा ने उस समय चंद्रशेखरन के नेतृत्व में शहर की प्रगति को लेकर विश्वास जताया था।
इसके बाद चंद्रशेखरन का जमशेदपुर से रिश्ता लगातार मजबूत होता गया। संस्थापक दिवस पर उनकी नियमित मौजूदगी शहरवासियों और टाटा कर्मचारियों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बन गई। वह केवल कंपनी के शीर्ष अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि जमशेदपुर की औद्योगिक परंपरा और टाटा परिवार की विरासत से जुड़े एक महत्वपूर्ण चेहरे के रूप में पहचाने जाने लगे।
2021 में रतन टाटा के साथ फिर आए थे
वर्ष 2021 में भी चंद्रशेखरन और रतन टाटा एक साथ जमशेदपुर पहुंचे थे। दो मार्च को संस्थापक दिवस की पूर्व संध्या पर दोनों ने शहर में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। टाटा स्टील के अनुसार, इसी दिन रतन टाटा और चंद्रशेखरन ने नौसेना टाटा हॉकी अकादमी के भवन सहित कई परियोजनाओं का उद्घाटन किया था। जुबिली पार्क में संस्थापक की प्रतिमा के समक्ष विद्युत सज्जा का उद्घाटन भी चंद्रशेखरन ने किया था।
रतन टाटा के साथ उनका यह जुड़ाव उनके जमशेदपुर दौरे की खास पहचान रहा। वर्ष 2018 में भी दोनों ने संस्थापक दिवस के अवसर पर जुबिली पार्क की विद्युत सज्जा का उद्घाटन किया था। उस दौरान दोनों के बटन दबाते ही जुबिली पार्क रोशनी से जगमगा उठा था।
हर साल संस्थापक दिवस पर बढ़ता गया जुड़ाव
समय के साथ चंद्रशेखरन जमशेदपुर के लिए टाटा समूह की योजनाओं का प्रमुख चेहरा बन गए। तीन मार्च को संस्थापक दिवस के अवसर पर उनका शहर आना एक परंपरा की तरह बन गया। मार्च 2026 में वे संस्थापक जमशेदजी टाटा की 187वीं जयंती के अवसर पर जमशेदपुर पहुंचे थे।
दो मार्च की शाम उन्होंने जुबिली पार्क में विद्युत सज्जा का उद्घाटन किया था। इस अवसर पर टाटा ट्रस्ट के अध्यक्ष नोएल टाटा और टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी टीवी नरेंद्रन भी मौजूद थे।
जमशेदपुर हमेशा टाटा समूह के विकास और इतिहास के केंद्र में रहेगा
संस्थापक दिवस के मुख्य समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत में चंद्रशेखरन ने जमशेदपुर के साथ टाटा समूह के रिश्ते को लेकर बेहद महत्वपूर्ण बात कही थी। उन्होंने कहा था कि जमशेदपुर हमेशा टाटा समूह के विकास और इतिहास के केंद्र में रहेगा।
उनका यह बयान महज औपचारिक टिप्पणी नहीं था। जमशेदपुर टाटा समूह की औद्योगिक यात्रा का वह शहर है, जहां समूह के इस्पात उद्योग के साथ एक नियोजित औद्योगिक नगर की कल्पना आकार लेती गई। टाटा समूह के अनुसार, साकची में नियोजित औद्योगिक शहर की नींव पड़ी और बाद में इसे जमशेदजी टाटा के सम्मान में जमशेदपुर नाम दिया गया।
11 हजार करोड़ के निवेश की घोषणा भी की
अपने अंतिम जमशेदपुर दौरे में चंद्रशेखरन ने झारखंड में करीब 11 हजार करोड़ रुपये के निवेश की जानकारी दी थी। इस निवेश के माध्यम से नई तकनीक, उन्नत इस्पात उत्पादन और कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में काम किए जाने की बात कही गई थी।
उन्होंने हाइड्रोजन आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने और टाटा मोटर्स के जमशेदपुर संयंत्र से हाइड्रोजन से चलने वाले वाहनों के निर्माण की योजना का भी संकेत दिया था।
टाटा वर्कर्स यूनियन भी पहुंचे थे
तीन मार्च 2026 को चंद्रशेखरन टाटा वर्कर्स यूनियन कार्यालय भी पहुंचे थे। उन्होंने टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक टीवी नरेंद्रन के साथ यूनियन नेताओं से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने यूनियन के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय वीजी गोपाल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और कर्मचारियों के कल्याण से जुड़े विषयों पर चर्चा की।
जमशेदपुर से चंद्रशेखरन का रिश्ता इस मायने में भी खास रहा कि उनके शहर से परिचय की शुरुआत ही रतन टाटा के साथ हुई थी। 2017 में जिस शहर के सामने रतन टाटा ने उन्हें टाटा समूह के नए नेतृत्वकर्ता के रूप में प्रस्तुत किया था, उसी शहर में नौ साल बाद उन्होंने यह भरोसा दोहराया कि जमशेदपुर टाटा समूह के विकास और इतिहास के केंद्र में हमेशा बना रहेगा। उनके अंतिम दौरे ने इस रिश्ते को एक यादगार अध्याय के रूप में दर्ज कर दिया है।
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