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56 साल पुरानी Manoj Kumar की फिल्म करवाती है देश पर गर्व, 'गदर' से 'बॉर्डर 2' तक; इन फिल्मों ने दुनियाभर में फहराया परचम

56 साल पुरानी Manoj Kumar की फिल्म करवाती है देश पर गर्व, 'गदर' से 'बॉर्डर 2' तक; इन फिल्मों ने दुनियाभर में फहराया परचम

सिनेमा सिर्फ मनोरंजन का माध्‍यम नहीं है अपितु दुनिया की नजर में देश की पहचान गढ़ने में अहम भूमिका निभाता है। स्‍वतंत्रता दिवस पर भारतीय फिल्‍मों की सॉ ...और पढ़ें








भारतीय फिल्मों में दिखती है देशभक्ति


भारतीय फिल्मों में दिखती है देशभक्ति


सनी देओल ने शेयर किया अपना एक्सपीरियंस


गदर से लेकर बॉर्डर 2 जैसी फिल्में दर्शकों को करती हैं प्रेरित


स्मिता श्रीवास्‍तव, मुंबई ब्‍यूरो। यही तो खासियत है इस वर्दी की कि कोई राह चलता इंसान थोड़े न इसे खरीद कर पहन सकता है। इसके लिए अपनी जान हिंदस्‍तान के नाम करनी पड़ती है। हालिया रिलीज वेब सीरीज आपरेशन सफेद सागर (Operation Safed Sagar) के एक दृश्‍य में स्‍क्‍वाड्रन लीडर अजय आहूजा (सिद्धार्थ) जब यह बात निडर होकर पाकिस्‍तानी अधिकारी से कहते हैं तो हर हिंदुस्‍तानी का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।


दरअसल, फिल्में और वेब सीरीज सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि देश की पहचान और लोगों की सोच को प्रभावित करने के साथ-साथ उसकी वैश्विक छवि गढ़ने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। साथ-साथ भारतीय संस्कृति, विविधता, विचारों और जीवनशैली को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाकर उसकी साफ्ट पावर (बिना दबाव या ताकत के अपनी संस्कृति, विचारों और प्रभाव के जरिए दुनिया को प्रभावित करने की क्षमता) को मजबूत करता है।

देशभक्ति फिल्में महसूस करवाती हैं गर्व

साफ्ट पावर के तौर पर भारत की छवि को मजबूत बनाने में सिनेमा की भूमिका को लेकर गदर और गदर 2 फिल्‍मों के निर्देशक अनिल शर्मा कहते हैं कि फिल्‍में हो या साहित्य हमारी फिल्‍मों में हम हीरो को सकारात्‍मक, देशभक्त और संस्कारों वाला दिखाते हैं तो उसका प्रभाव लोगों पर पड़ता है। हमारे लिए तो मनोज कुमार (Manoj Kumar) की फिल्‍म पूरब और पश्चिम का का गाना जब जीरो दिया मेरे भारत ने, दुनिया को तब गिनती आई। यह बात हमें कितना गर्व महसूस कराती है।


लोगों की भावनाओं से जुड़ी गदर से लेकर बॉर्डर 2

गदर फिल्‍म ने भी देश की छवि को मजबूत किया आगे भी फिल्‍में करती रहेंगी। गदर 2 (Gadar 2) के बाद हम कहीं भी जाते हैं तो सिर्फ एक ही आवाज गूजती हैं हिंदुस्तान जिंदाबाद। आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को केंद्र में रखकर बनी फिल्‍म बेबी, 1971 के युद्ध में भारतीय वायुसेना और स्थानीय लोगों के साहस पर आधारित फिल्‍म भुज द प्राइड आफ इंडिया, कूटनीति और राष्ट्रीय हित के एक संवेदनशील पहलू को सामने रखने वाली द डिप्‍लोमैट, और बार्डर 2 (Border 2) समेत कई देशभक्ति फिल्‍में बना चुके फिल्‍म निर्माता भूषण कुमार कहते है हमारी कोशिश रही है कि ऐसी कहानियां दर्शकों तक पहुंचें जिनमें देश और उसके लोगों की भावनाएं जुड़ी हों।




‘2047 में मैं भारतीय सिनेमा को वहां देखना चाहता हूं जहां किसी भारतीय फिल्म के दुनिया में सफल होने पर हमें यह कहने की जरूरत न पड़े कि देखिए, हमारी फिल्म विदेश में भी चल रही है। मेरे लिए यही भारत की साफ्ट पावर का अगला कदम होगा।‘-भूषण कुमार फिल्‍म निर्माता


अब आपरेशन सिंदूर इसी यात्रा का एक और महत्वपूर्ण अध्याय है। मेरा मानना है कि जब सिनेमा ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ भारत की कहानियां दुनिया तक पहुंचाता है, तो वह मनोरंजन से आगे जाकर देश की सॉफ्ट पावर को मजबूत करता है। हमारे लिए बॉर्डर का अनुभव भी इसी मायने में महत्वपूर्ण रहा है।
क्या है देशभक्ति का असली मतलब

मुझे लगता है कि आने वाले समय में हमें सिर्फ यह नहीं देखना चाहिए कि हमारी फिल्म ने कितने पैसे कमाए, बल्कि यह भी देखना चाहिए कि हमारी कहानी भारत के बाहर कितने लोगों तक पहुंची और उन्होंने उस कहानी को कितना प्यार दिया। वहीं एयरलिफ्ट, पिप्‍पा फिल्‍म के निर्देशक राजा कृष्‍ण मेनन का मानना है कि देशभक्ति का मतलब सिर्फ युद्ध आधारित कहानी नहीं है।


वह कहते हैं हमने एयरलिफ्ट में दिखाया है कि देशभक्ति इसमें है हम भारतीय हैं और हमें उस पर गर्व है। जैसे अमेरिका किसी छोटी-सी घटना को लेकर कहानी बना देता है कि हम अपने लोगों के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। हमारे यहां भी ऐसी कहानियां ज्‍यादा बननी चाहिए। युद्ध आधारित फिल्‍मों के अतिरिक्‍त हम मंगलयान की सफलता, भारत में पहली स्वदेशी कार किसने बनाई, आर्यभट्ट की कहानी क्या थी, हमारे वैज्ञानिकों की उपलब्धियों आदि विषयों पर फिल्में बना सकते हैं।




हमारे साहित्य और इतिहास में अनगिनत कहानियां हैं। हमें भी अच्छा लगता है कि पर्दे पर हमारे देश और हमारे लोगों की कहानी दिखाई जा रही है। यह प्रेरित भी करती हैं।
हमारी फिल्में लोगों को प्रभावित करती हैं : सनी देओल

कई देशभक्ति आधारित फिल्‍मों का हिस्‍सा रहे अभिनेता सनी देओल (Sunny Deol) कहते हैं कि अच्छे सिनेमा की कहानियां हमेशा हमारे समाज से ही प्रेरित होकर आती हैं। फिल्म बार्डर के बाद मैं इंग्लैंड गया था। वहां मैं किसी जगह पर था कि एक छोटा सरदार बच्चा भागकर मेरे पास आया और कहा कि पाजी मुझे आपके पैर छूने हैं।


फिर उसने बार्डर के बारे में बात की, यह सिनेमा का प्रभाव दर्शाता है। इसी तरह मुझे याद है कि मैं बार्डर 2 की शूटिंग देहरादून में कर रहा था। वहां सेना के एक जवान ने मेरे पास आकर अपनी वर्दी दिखाते हुए कहा कि सर यह वर्दी आपके कारण है।


आपसे ही प्रेरित होकर मैंने सेना में जाने का निर्णय लिया था। मेरे लिए यह बहुत बड़ा पल था। हम जो फिल्में कर रहे हैं, लोगों पर उनका असर हो रहा है। इसलिए हमारी एक जिम्मेदारी है कि हम समाज को ऐसी चीजें दे जिससे युवाओं को सच्चाई, ईमानदारी और मानवता की तरफ बढ़ने की प्रेरणा मिले।
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