'तलाक की मांग करना एक बात, पति की आजीविका छीनना और भी बदतर'; पत्नी की याचिका पर SC की टिप्पणी
'तलाक की मांग करना एक बात, पति की आजीविका छीनना और भी बदतर'; पत्नी की याचिका पर SC की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों में पत्नियों द्वारा पति के नियोक्ताओं को शामिल करने पर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि इससे पति की नौकरी जा सकती है, ज ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट ने पति के खिलाफ पत्नी की याचिका पर जताई चिंता। (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। क्या पत्नी को शादी के झगड़े में अपने पति के नियोक्ता को शामिल करना चाहिए? सुप्रीम कोर्ट ने शादी के केस के दौरान पत्नियों के अपने पति के नियोक्ताओं को लिखने पर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा है कि ऐसी शिकायतों से नौकरी जा सकती है और आखिर में मेंटेनेंस क्लेम पर असर पड़ सकता है।
यह बात जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने पिछले हफ्ते एक महिला की ट्रांसफर पिटीशन पर सुनवाई करते हुए कही। महिला ने अपने पति के दोस्त द्वारा दायर मानहानि के केस को असम से गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश ट्रांसफर करने की मांग की थी।
किस आधार पर की केस ट्रांसफर की मांग?
पत्नी ने केस ट्रांसफर करने की मांग इस आधार पर की कि वह पहले से ही गाजियाबाद में अपने पति के खिलाफ कई कानूनी मामलों में उलझी हुई है। जस्टिस नागरत्ना ने गौर किया कि कई पत्नियां अपने पतियों के नियोक्ताओं को पत्र लिखने का तरीका अपना रही हैं, जिससे उनकी नौकरी चली जाती है।
उन्होंने कहा कि तलाक लेना एक बात है लेकिन जीवनसाथी की रोजी-रोटी छीन लेना उससे भी बुरा है। सुनवाई के दौरान पत्नी के वकील ने कहा कि वह पहले से ही गाजियाबाद में अपने पति के साथ कई केस में शामिल थी और उसके पति के कहने पर उसके करीबी दोस्त और कलीग ने उसके खिलाफ मानहानि का केस किया था।
पत्नी ने एयरफोर्स ऑफिसर पति पर किया केस
मानहानि का केस पत्नी के दिल्ली में एयर फोर्स अधिकारियों को दिए गए एक रिप्रेजेंटेशन से शुरू हुआ, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उसका पति एक एयर फोर्स ऑफिसर है और सर्विस नियमों का उल्लंघन करके एक इंडिपेंडेंट बिजनेस चला रहा है।
जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा, "वैवाहिक विवादों के दौरान जीवनसाथी के नियोक्ता को पत्र लिखना पत्नी द्वारा की जा सकने वाली 'सबसे बुरी चीजों' में से एक है, क्योंकि इससे पति की नौकरी जा सकती है और भविष्य में गुजारा-भत्ता के दावे का आधार भी बहुत कम रह जाता है।"
पत्नी के वकील ने कहा कि एयर फोर्स अधिकारियों को शिकायत तब की गई जब पति ने एयर फोर्स का सामान चोरी होने की झूठी शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें खास तौर पर पत्नी और उसके भाई पर एयर फोर्स का हेलमेट चुराने का आरोप लगाया गया था।
उन्होंने कहा कि यह बात उस चीज के आवंटन के बाद उसकी स्थिति का पता लगाने के लिए कही गई थी और साफ किया कि मानहानि का केस पति ने खुद नहीं, बल्कि उसके दोस्त ने दायर किया था।
अदालत ने पक्षों के बीच समझौते की संभावना तलाशने के लिए मामले को सुप्रीम कोर्ट मध्यस्थता केंद्र को भेज दिया। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने पत्नी के वकील से उसे सभी विवादों को सुलझाने और आरोप वापस लेने की सलाह देने को भी कहा।
सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों में पत्नियों द्वारा पति के नियोक्ताओं को शामिल करने पर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि इससे पति की नौकरी जा सकती है, ज ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट ने पति के खिलाफ पत्नी की याचिका पर जताई चिंता। (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। क्या पत्नी को शादी के झगड़े में अपने पति के नियोक्ता को शामिल करना चाहिए? सुप्रीम कोर्ट ने शादी के केस के दौरान पत्नियों के अपने पति के नियोक्ताओं को लिखने पर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा है कि ऐसी शिकायतों से नौकरी जा सकती है और आखिर में मेंटेनेंस क्लेम पर असर पड़ सकता है।
यह बात जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने पिछले हफ्ते एक महिला की ट्रांसफर पिटीशन पर सुनवाई करते हुए कही। महिला ने अपने पति के दोस्त द्वारा दायर मानहानि के केस को असम से गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश ट्रांसफर करने की मांग की थी।
किस आधार पर की केस ट्रांसफर की मांग?
पत्नी ने केस ट्रांसफर करने की मांग इस आधार पर की कि वह पहले से ही गाजियाबाद में अपने पति के खिलाफ कई कानूनी मामलों में उलझी हुई है। जस्टिस नागरत्ना ने गौर किया कि कई पत्नियां अपने पतियों के नियोक्ताओं को पत्र लिखने का तरीका अपना रही हैं, जिससे उनकी नौकरी चली जाती है।
उन्होंने कहा कि तलाक लेना एक बात है लेकिन जीवनसाथी की रोजी-रोटी छीन लेना उससे भी बुरा है। सुनवाई के दौरान पत्नी के वकील ने कहा कि वह पहले से ही गाजियाबाद में अपने पति के साथ कई केस में शामिल थी और उसके पति के कहने पर उसके करीबी दोस्त और कलीग ने उसके खिलाफ मानहानि का केस किया था।
पत्नी ने एयरफोर्स ऑफिसर पति पर किया केस
मानहानि का केस पत्नी के दिल्ली में एयर फोर्स अधिकारियों को दिए गए एक रिप्रेजेंटेशन से शुरू हुआ, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उसका पति एक एयर फोर्स ऑफिसर है और सर्विस नियमों का उल्लंघन करके एक इंडिपेंडेंट बिजनेस चला रहा है।
जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा, "वैवाहिक विवादों के दौरान जीवनसाथी के नियोक्ता को पत्र लिखना पत्नी द्वारा की जा सकने वाली 'सबसे बुरी चीजों' में से एक है, क्योंकि इससे पति की नौकरी जा सकती है और भविष्य में गुजारा-भत्ता के दावे का आधार भी बहुत कम रह जाता है।"
पत्नी के वकील ने कहा कि एयर फोर्स अधिकारियों को शिकायत तब की गई जब पति ने एयर फोर्स का सामान चोरी होने की झूठी शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें खास तौर पर पत्नी और उसके भाई पर एयर फोर्स का हेलमेट चुराने का आरोप लगाया गया था।
उन्होंने कहा कि यह बात उस चीज के आवंटन के बाद उसकी स्थिति का पता लगाने के लिए कही गई थी और साफ किया कि मानहानि का केस पति ने खुद नहीं, बल्कि उसके दोस्त ने दायर किया था।
अदालत ने पक्षों के बीच समझौते की संभावना तलाशने के लिए मामले को सुप्रीम कोर्ट मध्यस्थता केंद्र को भेज दिया। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने पत्नी के वकील से उसे सभी विवादों को सुलझाने और आरोप वापस लेने की सलाह देने को भी कहा।
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