कतर के पीएम से मिले विदेश मंत्री जयशंकर, अमेरिका-ईरान वार्ता में मध्यस्थता की सराहना की
कतर के पीएम से मिले विदेश मंत्री जयशंकर, अमेरिका-ईरान वार्ता में मध्यस्थता की सराहना की
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कतर के प्रधानमंत्री से मुलाकात कर अमेरिका-ईरान वार्ता में कतर की मध्यस्थता प्रयासों की सराहना की। ...और पढ़ें

जयशंकर ने कतर की अमेरिका-ईरान वार्ता मध्यस्थता की सराहना की (फोटो- ANI)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे सैन्य टकराव और सीमा पार हमलों के बाद दोनों देशों के बीच वार्ता फिर से शुरू हुई है। इस वार्ता को फिर से शुरू कराने के लिए कतर द्वारा किए गए सक्रिय मध्यस्थता प्रयासों की विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सराहना की है।
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल की शुरुआत में जब दोनों देशों के बीच युद्धविराम टूटने के कगार पर था, तब तब पाकिस्तान की अपेक्षित भूमिका के बजाय कतर की शांत कूटनीति ने इस संवाद को पुनर्जीवित करने में अहम भूमिका निभाई।
कतर की भूमिका की दुनियाभर में चर्चा
इस दौरान कतर अपने विवेक, पहुंच और निरंतर सहभागिता को मिलाकर एक प्रमुख मध्यस्थ के रूप में उभर कर सामने आया, जबकि वार्ता आखिरकार तटस्थ स्विट्जरलैंड के पारंपरिक स्थल पर लौट आई।
हालांकि, कतर की पर्दे के पीछे वाली राजनयिक भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है, जिसने बातचीत को फिर से पटरी पर लाने में अहम भूमिका निभाई।
कतर के पीएम से मिले भारत के विदेश मंत्री
अपनी कतर यात्रा के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने ऊर्जा, व्यापार, निवेश और लोगों के बीच संपर्क जैसे मुद्दों पर बात करते हुए द्विपक्षीय रिश्तों की पूरी समीक्षा की। साथ ही आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
गौरतलब है कि भारत के विदेश मंत्री जयशंकर की यह यात्रा ये खाड़ी यात्रा ऐसे समय हुई जब पश्चिम एशिया में राजनीतिक हालात तेजी से बदल रहे हैं। ये बदलाव अमेरिका-ईरान के बीच हुए नए समझौते के बाद आए हैं। इस समझौते का उद्देश्य संघर्ष खत्म करना और वाशिंगटन-तेहरान के बीच बातचीत को फिर से शुरू करना है।
11 जुलाई को हो सकती है अगले दौर की वार्ता
अगले दौर की तकनीकी बातचीत 11 जुलाई को हो सकती है, लेकिन यह वार्ता कहां होगी यह अभी तय नहीं हुआ है। इस बैठक के दौरान सुरक्षा मुद्दों पर बातचीत होने की उम्मीद है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य में शांति बनाए रखने के प्रयास शामिल हैं।
11 जुलाई की बैठक का उद्देश्य दो सप्ताह पहले हस्ताक्षरित इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के तहत स्थापित ढांचे को आगे बढ़ाना है। इस समझौते के तहत दोनों पक्षों को ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक डील के लिए 60 दिन का समय दिया गया है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कतर के प्रधानमंत्री से मुलाकात कर अमेरिका-ईरान वार्ता में कतर की मध्यस्थता प्रयासों की सराहना की। ...और पढ़ें

जयशंकर ने कतर की अमेरिका-ईरान वार्ता मध्यस्थता की सराहना की (फोटो- ANI)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे सैन्य टकराव और सीमा पार हमलों के बाद दोनों देशों के बीच वार्ता फिर से शुरू हुई है। इस वार्ता को फिर से शुरू कराने के लिए कतर द्वारा किए गए सक्रिय मध्यस्थता प्रयासों की विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सराहना की है।
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल की शुरुआत में जब दोनों देशों के बीच युद्धविराम टूटने के कगार पर था, तब तब पाकिस्तान की अपेक्षित भूमिका के बजाय कतर की शांत कूटनीति ने इस संवाद को पुनर्जीवित करने में अहम भूमिका निभाई।
कतर की भूमिका की दुनियाभर में चर्चा
इस दौरान कतर अपने विवेक, पहुंच और निरंतर सहभागिता को मिलाकर एक प्रमुख मध्यस्थ के रूप में उभर कर सामने आया, जबकि वार्ता आखिरकार तटस्थ स्विट्जरलैंड के पारंपरिक स्थल पर लौट आई।
हालांकि, कतर की पर्दे के पीछे वाली राजनयिक भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है, जिसने बातचीत को फिर से पटरी पर लाने में अहम भूमिका निभाई।
कतर के पीएम से मिले भारत के विदेश मंत्री
अपनी कतर यात्रा के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने ऊर्जा, व्यापार, निवेश और लोगों के बीच संपर्क जैसे मुद्दों पर बात करते हुए द्विपक्षीय रिश्तों की पूरी समीक्षा की। साथ ही आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
गौरतलब है कि भारत के विदेश मंत्री जयशंकर की यह यात्रा ये खाड़ी यात्रा ऐसे समय हुई जब पश्चिम एशिया में राजनीतिक हालात तेजी से बदल रहे हैं। ये बदलाव अमेरिका-ईरान के बीच हुए नए समझौते के बाद आए हैं। इस समझौते का उद्देश्य संघर्ष खत्म करना और वाशिंगटन-तेहरान के बीच बातचीत को फिर से शुरू करना है।
11 जुलाई को हो सकती है अगले दौर की वार्ता
अगले दौर की तकनीकी बातचीत 11 जुलाई को हो सकती है, लेकिन यह वार्ता कहां होगी यह अभी तय नहीं हुआ है। इस बैठक के दौरान सुरक्षा मुद्दों पर बातचीत होने की उम्मीद है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य में शांति बनाए रखने के प्रयास शामिल हैं।
11 जुलाई की बैठक का उद्देश्य दो सप्ताह पहले हस्ताक्षरित इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के तहत स्थापित ढांचे को आगे बढ़ाना है। इस समझौते के तहत दोनों पक्षों को ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक डील के लिए 60 दिन का समय दिया गया है।
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