गंभीर को क्यों बनाया जा रहा 'पंचिंग बैग', वैभव के डेब्यू और संजू को ड्रॉप करने से लेकर अंदरूनी कलह तक की क्या है सच्चाई?
गंभीर को क्यों बनाया जा रहा 'पंचिंग बैग', वैभव के डेब्यू और संजू को ड्रॉप करने से लेकर अंदरूनी कलह तक की क्या है सच्चाई?
गौतम गंभीर को भारतीय टीम का मुख्य कोच बनने के बाद से लगातार आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है, चाहे वह खिलाड़ियों के चयन का मामला हो या टीम की हार-जीत ...और पढ़ें

गौतम गंभीर
अभिषेक त्रिपाठी, जागरण, नई दिल्ली। पिछले दो साल से भारतीय टीम जीते या हारे मुख्य कोच गौतम गंभीर को पंचिंग बैग की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। लगातार दो आईसीसी ट्रॉफी दिलाने वाले पहले भारतीय कोच बनने के बावजूद उन पर लगातार हमले हो रहे हैं।
सूर्यकुमार यादव को खराब प्रदर्शन के बावजूद टीम का कप्तान बनाए रखना हो या उनको हटाना, विराट कोहली-रोहित शर्मा का भविष्य हो या वॉशिंगटन सुंदर, प्रसिद्ध कृष्णा, हर्षित राणा का वर्तमान... हर चीज का दोष गंभीर पर मढ़ दिया जाता है। हाल में एक ट्वीट देखने को मिला जिसमें एक फैन क्लब अभ्यास सत्र में विराट कोहली के एक सीधी गेंद पर आउट होने का दोष भी गंभीर के ऊपर मढ़ रहा था क्योंकि वह बगल वाले नेट पर तिरछी नजर से भारत के पूर्व कप्तान की बल्लेबाजी को देखकर उन पर दबाव डाल रहे थे।
वैभव सूर्यवंशी के खेलने और ड्रॉप होने पर गंभीर को दोष
यही नहीं वैभव सूर्यवंशी को आयरलैंड में नहीं खिलाने का दोष भी गंभीर पर गया और उसके बाद उन्हें ड्रॉप करके इंग्लैंड में आखिरी टी-20 में संजू सैमसन को खिलाने का पाप भी मुख्य कोच पर डाला गया। विराट, रोहित, संजू, गिल और अब तो वैभव कैंप में बंट चुके इंटरनेट मीडिया को पता ही नहीं कि अंदर चल क्या रहा है?
यह वीडियो भी देखें
वैभव कैसे खेले और क्यों ड्रॉप हुए?
आईपीएल में 700 से ज्यादा रन बनाकर ऑरेंज कैप हासिल करने वाले 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को चयनकर्ताओं ने आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के लिए चुना जरूर था लेकिन शुरुआती छह मैचों में संजू को ही मौका मिलना तय हुआ था। अगर संजू छह मैच में नहीं चलते तो आखिरी मैच में वैभव को मौका दिया जाता और इसको लेकर मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर और गंभीर की सोच एक थी।
आयरलैंड के विरुद्ध दो मैच और इंग्लैंड के विरुद्ध पहले टी-20 मैच में संजू के नहीं चलने के बावजूद यही तय था कि दूसरा टी-20 भी संजू खेलेंगे लेकिन एक अप्रत्यक्ष दबाव के कारण वैभव को मौका दिया गया। वैभव तीन मैच में कुछ खास नहीं कर पाए। चयनकर्ताओं से जुड़े सूत्र ने कहा कि जब वैभव को मौका दे ही दिया था तो फिर आखिरी मैच में भी उसे ही खिला देना चाहिए था। इसके बाद अगले मैच में फिर संजू को खिलाना गड़बड़ फैसला हो गया।
अगरकर और गंभीर में मतभेद नहीं
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के मेंटोर और विराट के करीबी दोस्त पूर्व विकेटकीपर दिनेश कार्तिक ने इंग्लैंड में एक शो में कहा कि अगरकर और गंभीर की सोच अलग है लेकिन दोनों से जुड़े लोगों ने इससे इन्कार किया। सूत्र ने कहा कि गंभीर और अगरकर दिन में दो बार बात करते हैं। ये जरूर है कि ये दोनों दो अन्य चयनकर्ताओं के जरूरत से ज्यादा एक्टिव होने से नाराज हैं। वे दो चयनकर्ता हुक्मरानों को ये जताने में तुले हैं कि उनकी वजह से टीम चयन काफी अच्छा हो गया है।
हालांकि पिछले सात मैचों में छह मैच हारने की जिम्मेदारी लेने से वे बच रहे हैं क्योंकि जब अच्छे प्रदर्शन के जिम्मेदार वे हैं तो खराब की जिम्मेदारी गंभीर पर क्यों? संजू को जिंबाब्वे दौरे के लिए घोषित टीम में नहीं रखने पर जरूर मुख्य कोच और चयनकर्ताओं में सहमति नहीं थी।
रेयान टेन डोएशे और टी. दिलीप का मसला
जब गंभीर कोच बने थे तो उन्होंने अपने सहयोगी स्टाफ में गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल और क्षेत्ररक्षण कोच रेयान टेन डोएशे के साथ एक बल्लेबाजी कोच का नाम दिया था। एक खिलाड़ी के कहने पर अभिषेक नायर और टी. दिलीप को बरकरार रखा गया। ऑस्ट्रेलिया में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के दौरान ड्रेसिंग रूम की खबरें बाहर आने के बाद नायर का भारतीय टीम से पत्ता कट गया।
पिछले साल टीम प्रबंधन ने दिलीप को हटाने पर सहमति जताई लेकिन फिर एक प्रारूप खेलने वाले एक क्रिकेटर ने बीसीसीआई के शीर्ष पदाधिकारी से दिलीप को बरकरार रखने की सिफारिश की और क्षेत्ररक्षण कोच की नौकरी बच गई। सूत्र ने कहा कि दिलीप और डोएशे का काम एक ही है। ऐसे में दो साल से डोएशे के पास कोई विशेष काम ही नहीं है। वह थोड़ा थ्रोडाउन कराते हैं और बाकी अभ्यास।
भारतीय टीम की फील्डिंग का स्तर गिरा
थ्रो डाउन तो रघु भी करा लेता है। इंग्लैंड के विरुद्ध पांचवें टी-20 में चार-पांच कैच छूटे। जूनियर खिलाड़ियों की फील्डिंग का स्तर गिर रहा है तो इसकी जिम्मेदारी डोएशे क्यों ले। यही कारण है कि उन्होंने निराश होकर टीम से अलग होने का आवेदन दिया है। दिलीप के क्षेत्ररक्षण कोच रहते हुए क्षेत्ररक्षण का स्तर काफी गिरा है और बाहर होने की नौबत डोएशे की आ रही है। अब दिलीप रुकते हैं या डोएशे इसका फैसला जल्द होगा लेकिन इतना तय है कि 2027 विश्व कप तक गौतम गंभीर की कुर्सी पर कोई खतरा नहीं है।
कोच गंभीर का कार्यकाल
गंभीर की सफलताएं2026 में घर में टी-20 विश्व कप ट्रॉफी जीती
2025 में चैंपियंस ट्रॉफी जीती, 12 साल बाद मिला खिताब
2025 में एशिया कप जीता, टूर्नामेंट में पाकिस्तान को तीन बार हराया
2025 में इंग्लैंड में पांच टेस्ट मैचों की सीरीज 2-2 से ड्रॉ करवाई
आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में टी-20 सीरीज जीती
गंभीर की विफलताएं2025 में न्यूजीलैंड से घर पर 0-3 से टेस्ट सीरीज गंवाई
2024-25 में ऑस्ट्रेलिया से बॉर्डर-गावस्कर ट्राफी में मिली हार
2025 में दक्षिण अफ्रीका ने टेस्ट सीरीज में 0-2 से हराया
2024 में श्रीलंका में 27 साल बाद वनडे सीरीज 0-2 से हारे
2024 कैलेंडर वर्ष में एक भी वनडे मुकाबले में नहीं मिली जीत
2026 में न्यूजीलैंड ने भारत को घर में ही 2-1 से वनडे सीरीज हराई
2026 में पहली बार आयरलैंड से टी-20 सीरीज में 0-2 से मिली हार
2026 में इंग्लैंड ने पांच मैचों की सीरीज में 0-4 से किया सूपड़ा साफ
Labels
Sports
Post A Comment
No comments :