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झारखंड के रेलवे ट्रैक पर अब AI रखेगा हाथियों पर नजर, हादसे रोकने के लिए लग रहा खास सिस्टम




झारखंड के रेलवे ट्रैक पर अब AI रखेगा हाथियों पर नजर, हादसे रोकने के लिए लग रहा खास सिस्टम


भारतीय रेलवे ने झारखंड में हाथियों के कारण ट्रेनों के परिचालन में बाधा और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए 'मॉनिटरिंग ऑफ एलिफेंट मूवमेंट सिस्टम' लगाना शुरू ...और पढ़ें








झारखंड में हाथियों के लिए रेलवे ट्रैक पर निगरानी प्रणाली। जागरण

HIGHLIGHTS

झारखंड में हाथियों के लिए रेलवे ट्रैक पर निगरानी प्रणाली।


सिस्टम हाथियों की आवाजाही पर देगा तत्काल अलर्ट।



अरविंद चौधरी, झुमरीतिलैया (कोडरमा)। भारतीय रेलवे ने झारखंड में हाथियों की आवाजाही के कारण ट्रेनों के परिचालन पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए रेलवे ट्रैक के किनारे मॉनिटरिंग ऑफ ऐलीफेंट मोमेंट सिस्टम लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।


इसके तहत धनबाद रेल मंडल के कोडरमा से पारसनाथ रेलखंड में चौबे से चिचाकी के बीच लगभग 20 किलोमीटर क्षेत्र में इस सिस्टम को लगाने का कार्य से तेजी से चल रहा है।

जानकारी के अनुसार, कोडरमा और गिरिडीह जिले में इन दिनों हाथियों के झुंड गांवों के साथ-साथ रेलवे ट्रैक पर भी पहुंच जाते हैं। इससे स्थानीय ग्रामीणों के अलावा रेलवे अधिकारियों की चिंता बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में सुरक्षा के मद्देनजर वीवीआईपी ट्रेन राजधानी, दुरूंतो, वन्दे भारत सहित कई मेल और पेंसेंजर ट्रेनों का परिचालन अस्थायी रूप से रोकना पड़ता है।


रेल प्रशासन ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए पहले चरण में चौबे से चिचाकी के बीच मॉनिटरिंग ऑफ ऐलीफेंट मोमेंट सिस्टम लगाने का निर्णय लिया है। इस अत्याधुनिक प्रणाली की विशेषता यह है कि जैसे ही कोई हाथी रेलवे ट्रैक के पास या उस पर पहुंचेगा, धनबाद रेल कंट्रोल और हजारीबाग रोड रेल स्टेशन पर लगे कंट्रोल सिस्टम में आर्ल्म बजना शुरू हो जाएगा।


इससे जहां ट्रेनों के पहिये को रोका जाता है एवं कभी-कभी हाथी का ट्रेन की चपेट में आने से मौत की चपेट आने से बच सकता है। इससे मानव हाथी संघर्ष और जानमाल का नुकसान कम किया जा सकता है। रेलवे केबल के जरिये हजारीबाग रोड और चौबे के बीच कोरिडोर भी बना रहा है जिससे दोनों ट्रेक अप और डाउन में घटना को रोका जा सके।


इसके बाद संबंधित अधिकारियों और लोको पायलटों को तत्काल सूचना दी जाएगी, ताकि जरूरत पड़ने पर ट्रेनों की गति कम की जा सके या उन्हें सुरक्षित स्थान पर रोका जा सके। इससे हाथियों की ट्रेन की चपेट में आने की घटनाओं को रोका जा सकेगा और मानव-हाथी संघर्ष के साथ-साथ जान-माल के नुकसान में भी कमी आएगी।


रेलवे परियोजना के तहत हजारीबाग रोड और चौबे स्टेशन के बीच केबल आधारित संचार नेटवर्क भी विकसित कर रहा है, जिससे आप और डाउन दोनों रेल लाइनों पर निगरानी और सूचना का आदान-प्रदान तेजी और प्रभावी हो सके।

बताते चले कि करीब तीन वर्ष पूर्व चिचाकी और गरिया बिहार स्टेशन के बीच एक हाथी ट्रैक के बीचों-बीच आ गया था, जहां ट्रेन के चपेट में आने से उसकी मौत हो गई थी और कई घंटो तक रेल परिचालन बाधित रही।


इधर, भारतीय रेलवे दिल्ली-हावड़ा मुख्य रेलखंड पर ट्रेनों की अधिकतम गति 160 किलोमीटर प्रति घंटा तक बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए रेल लाइन के किनारे लंबी सुरक्षा दीवार (क्रैश बैरियर) का निर्माण किया जा रहा है, ताकि ट्रेनों का संचालन सुरक्षित और निर्बाध रूप से हो सके।


वहीं, झारखंड के चक्रधरपुर रेल मंडल में चांडिल से कोकिन के बीच लगभग 24 किलोमीटर रेलखंड पर भी एलिफेंट अलर्ट सिस्टम लगाया जा रहा है। इस परियोजना के तहत रेलवे और वन विभाग मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के माध्यम से हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखेंगे।


यदि ट्रैक के आसपास हाथियों की मौजूदगी का पता चलता है, तो संबंधित क्षेत्र में ट्रेनों की गति 25 से 30 किलोमीटर प्रति घंटा तक सीमित कर दी जाएगी, जिससे किसी भी दुर्घटना की संभावना को कम किया जा सके।
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