भारत के अंतरिक्ष सेक्टर में बड़ी उछाल, निजी निवेश 618 मिलियन डॉलर तक पहुंचा
भारत के अंतरिक्ष सेक्टर में बड़ी उछाल, निजी निवेश 618 मिलियन डॉलर तक पहुंचा
भारत के अंतरिक्ष सेक्टर में सरकार के बड़े सुधारों के बाद निजी निवेश में 6 गुना वृद्धि हुई है, जो 2026 तक 618.5 मिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। ...और पढ़ें

भारत के अंतरिक्ष सेक्टर में उछाल (फोटो-फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राज्यसभा में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एंव पृथ्वी विज्ञान मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार के बड़े सुधारों के बाद भारत के अंतरिक्ष सेक्टर में बहुत तेजी आई है। अब निजी कंपनियां भी इस क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा रही हैं।
निजी निवेश 6 गुना बढ़ामंत्री ने बताया कि पिछले कुछ सालों में निजी फंडिंग करीब 6 गुना बढ़ गई है।
2021-22 में 100.5 मिलियन डॉलर, 2023-24 में 348.5 मिलियन डॉलर, 31 मार्च 2026 तक 618.5 मिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। यह दिखाता है कि भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में घरेलू और विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है।
सिंह ने कहा कि 2014 में देश में सिर्फ 1 अंतरिक्ष स्टार्टअप था। अब यह संख्या 400 से ज्यादा हो गई है। IN-SPACe ने अब तक 17 स्टार्टअप्स को अंतरिक्ष में काम करने की मंजूरी दी है। कुल मिलाकर निजी कंपनियों को 105 मंजूरी दी जा चुकी हैं।
भारतीय निजी कंपनियों ने अब तक 30 से ज्यादा सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजा है। PSLV के POEM प्लेटफॉर्म के जरिए करीब 45 पेलोड भी भेजे गए हैं।
देश का पहला निजी स्वामित्व वाला अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट ग्रुप बनाने के लिए कई बड़ी कंपनियां साथ आई हैं। इसके लिए लगभग 1,200 करोड़ रुपये का निजी निवेश तय हुआ है।
मंत्री ने साफ किया कि निजी कंपनियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा का भी ध्यान रखा जा रहा है। हर आवेदन की जांच IN-SPACe के नियमों के तहत होती है। मंजूरी से पहले रणनीतिक और सुरक्षा पहलुओं को देखा जाता है।
सरकार अब IN-SPACe के जरिए स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर स्पेस गतिविधियों के लिए नई सुरक्षा गाइडलाइंस भी बना रही है।
भारत के अंतरिक्ष सेक्टर में सरकार के बड़े सुधारों के बाद निजी निवेश में 6 गुना वृद्धि हुई है, जो 2026 तक 618.5 मिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। ...और पढ़ें

भारत के अंतरिक्ष सेक्टर में उछाल (फोटो-फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राज्यसभा में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एंव पृथ्वी विज्ञान मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार के बड़े सुधारों के बाद भारत के अंतरिक्ष सेक्टर में बहुत तेजी आई है। अब निजी कंपनियां भी इस क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा रही हैं।
निजी निवेश 6 गुना बढ़ामंत्री ने बताया कि पिछले कुछ सालों में निजी फंडिंग करीब 6 गुना बढ़ गई है।
2021-22 में 100.5 मिलियन डॉलर, 2023-24 में 348.5 मिलियन डॉलर, 31 मार्च 2026 तक 618.5 मिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। यह दिखाता है कि भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में घरेलू और विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है।
सिंह ने कहा कि 2014 में देश में सिर्फ 1 अंतरिक्ष स्टार्टअप था। अब यह संख्या 400 से ज्यादा हो गई है। IN-SPACe ने अब तक 17 स्टार्टअप्स को अंतरिक्ष में काम करने की मंजूरी दी है। कुल मिलाकर निजी कंपनियों को 105 मंजूरी दी जा चुकी हैं।
भारतीय निजी कंपनियों ने अब तक 30 से ज्यादा सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजा है। PSLV के POEM प्लेटफॉर्म के जरिए करीब 45 पेलोड भी भेजे गए हैं।
देश का पहला निजी स्वामित्व वाला अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट ग्रुप बनाने के लिए कई बड़ी कंपनियां साथ आई हैं। इसके लिए लगभग 1,200 करोड़ रुपये का निजी निवेश तय हुआ है।
मंत्री ने साफ किया कि निजी कंपनियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा का भी ध्यान रखा जा रहा है। हर आवेदन की जांच IN-SPACe के नियमों के तहत होती है। मंजूरी से पहले रणनीतिक और सुरक्षा पहलुओं को देखा जाता है।
सरकार अब IN-SPACe के जरिए स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर स्पेस गतिविधियों के लिए नई सुरक्षा गाइडलाइंस भी बना रही है।
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