निधन के 30 साल बाद हिट हुआ 'गजल का शहजादा', Lata Mangeshkar की आवाज में अमर हुए इनके कल्ट गाने
निधन के 30 साल बाद हिट हुआ 'गजल का शहजादा', Lata Mangeshkar की आवाज में अमर हुए इनके कल्ट गाने
भारतीय सिनेमा के एक ऐसे संगीतकार जिन्हें अपनी गजलों, गानों और कंपोजिशन के लिए उनके निधन के 20 साल बाद पॉपुलैरिटी मिली। ...और पढ़ें
-1784013561837_v.webp)
निधन के 30 साल बाद हिट हुए संगीतकार
HIGHLIGHTS
निधन के 30 साल बाद हिट हुए संगीतकार
लता मंगेशकर ने दी थी इनके गानों को आवाज
संगीतकार को मिला था 'गजल के बादशाह' का ताज
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। 'कहते हैं ना कि मेहनत इतनी खामोशी से करो कि सफलता शोर मचा दे'- इस कहावत को सच किया है एक भारतीय संगीतकार ने लेकिन अफसोस बस एक ही बात का है कि अपनी ये सफलता देखने के लिए वे संगीतकार इस दुनिया में ही नहीं रहे।
भारतीय सिनेमा ने कई दिग्गज सिंगर, संगीतकारों का दौर देखा है जिन्होंने इस इंडस्ट्री को कई सदाबहार और कल्ट गाने दिए। लेकिन इनके बीच एक ऐसे संगीतकार थे जो चुपचाप अपनी धुने बना रहे थे लेकिन वे धुनें कभी रिलीज नहीं हुई। उनके निधन के बाद उनके बेटे ने धुनों को सहेजकर रखा जिन्हें कभी फिल्मों में इस्तेमाल नहीं किया गया था।
निधन के 30 साल बाद हिट हुए संगीतकार
जब निर्देशक यश चोपड़ा वीर जारा (Veer Zaara) बना रहे थे तो उन्होंने इस संगीतकार की सहेजी गई धुनों को फिल्म में इस्तेमाल किया और फिर भारतीय सिनेमा को तेरे लिए, ऐसा देश है मेरा और मैं यहां हूं जैसे बेहतरीन और यादगार गाने मिले। ये संगीतकार थे मदन मोहन (Madan Mohan) जिन्हें गजल का शहजादा भी कहा जाता था।
उनका निधन 14 जुलाई 1975 में हो गया था और 30 साल बाद वीर जारा के गानों में उनकी धुनों ने अपार सफलता हासिल की। उन्हें 2005 में 'वीर-जारा' के लिए मरणोपरांत बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का IIFA पुरस्कार दिया गया।
साल 2023 में, प्रीतम ने फिल्म 'रॉकी और रानी की प्रेम कहानी' के लिए 'व्हाट झुमका?' गाना तैयार किया। यह गाना मदन के 1966 के गाने 'झुमका गिरा रे' (फिल्म 'मेरा साया' से) पर आधारित था। इसे अरिजीत सिंह और जोनिता गांधी ने गाया था और इसके बोल अमिताभ भट्टाचार्य ने लिखे थे।
लता मंगेशकर की आवाज में बने अमर
वीर जारा के गानों के बोल जावेद अख्तर (Javed Akhtar) ने लिखे थे और इन्हें लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) ने अपनी जादुई आवाज दी थी। इसके अलावा मदन मोहन के अन्य सदाबहार गीतों को लता मंगेशकर की आवाज में पिरोया गया। जिनमें लग जा गले, नैनों में बदरा छाए, वो चुप रहे तो शामिल थे।
मदन मोहन कोहली के बारे में
मदन मोहन कोहली (Madan Mohan Kohli) जिन्हें मदन मोहन के नाम से जाना जाता है, 1950, 1960 और 1970 के दशक के भारतीय संगीत निर्देशक थे। उन्हें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे मधुर और कुशल संगीत निर्देशकों में से एक माना जाता है। उन्हें खास तौर पर हिंदी फिल्मों के लिए बनाई गई उनकी अमर गजलों (Ghazals) के लिए याद किया जाता है। उनके कुछ बेहतरीन काम लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी (Mohammed Rafi) और तलत महमूद (Talat Mehmood) जैसे गायकों के साथ हैं।
Labels
Mirchmasala
Post A Comment
No comments :