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होर्मुज पर 20% टोल से ट्रंप का यू-टर्न, कैसे करेंगे टैक्स की भरपाई? Inside Story

होर्मुज पर 20% टोल से ट्रंप का यू-टर्न, कैसे करेंगे टैक्स की भरपाई? Inside Story

अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर संघर्ष फिर तेज हो गया है, जिसमें दोनों ओर से हमले और जवाबी हमले किए गए हैं। ...और पढ़ें








होर्मुज पर 20% टोल से ट्रंप का यू-टर्न(फोटो: रॉयटर्स)

न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज पर कब्जे की लड़ाई एक बार फिर शुरू हो गई। दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर जोरदार हमले और जवाबी हमले का दावा किया है। होर्मुज स्ट्रेट में यूएई के दो व्यापारिक जहाजों पर ईरानी हमले के बाद अमेरिका ने मंगलवार को हमलों का नया दौर शुरू करते हुए दर्जनभर ठिकानों पर बमबारी की।


दोनों पक्षों के बीच बढ़ते घमासान के चलते पिछले महीने तय हुए युद्धविराम समझौते (एमओयू) के अस्तित्व पर संकट छा गया है। ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी लागू हो गई है।

हालांकि, राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप होर्मुज में जहाजों को सुरक्षा प्रदान करने की एवज में खाड़ी देशों से 20 प्रतिशत शुल्क वसूलने की बात से पीछे हट गए हैं। उन्होंने कहा कि खाड़ी देश अमेरिका के साथ निवेश और व्यापार समझौते करके ये भरपाई करेंगे। संयुक्त राष्ट्र और भारत समेत कई देशों ने इस योजना का विरोध किया था, जबकि ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा ने ट्रंप के इस फैसले का मजाक उड़ाते हुए कहा था कि वह अमेरिका को डकैती के लिए तैयार कर रहे हैं। सोमवार को केवल 10 जहाजों ने होर्मुज स्ट्रेट पार किया है।


न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि मंगलवार को ईरान पर लगातार पांच घंटे तक बम बरसाए गए। सेंटकाम ने कहा कि ईरान के तटीय डिफेंस सिस्टम, मिसाइल और ड्रोन साइटों और मैरिटाइम क्षमताओं पर हमले किए गए। सेंटकाम ने कहा कि ये हमले आगे भी जारी रहेंगे ताकि ईरानी बलों को भारी कीमत चुकानी पड़े और उनकी निर्दोष नागरिकों और व्यापारिक जहाजों पर हमले की क्षमता कमजोर की जाए।



हमलों के कुछ देर बाद ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान पर एक और भीषण हमला किया गया है। उन्होंने ये भी कहा कि ईरान के खिलाफ फिर से नौसैनिक नाकेबंदी लागू की जा रही है।

सेंटकाम ने ओमान की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट के रास्तों पर चलने वाले सभी जहाजों को सलाह दी है कि वे 'नोटिस टू मैरिनर्स' प्रसारण पर नजर रखें और 'ब्रिज-टू-ब्रिज चैनल 16' पर अमेरिकी नौसेना से संपर्क करें। कमांड ने यह भी कहा कि व्यापारिक जहाजों के लिए आगे की विस्तृत जानकारी एक औपचारिक नोटिस के जरिए जारी की जाएगी।


ईरानी मीडिया ने बताया कि कई शहरों पर अमेरिकी हमले हुए, जिसमें चार लोग घायल हुए हैं। सेंटकाम ने एक्स पर जानकारी दी कि ईरान के बंदर अब्बास, चाबहार, जास्क, कोनारक, अबादान, किश, केशम और अबू मूसा द्वीपों पर भारी बमबारी की गई। वहीं बुशहर के जाम शहर और जोगडक में कई धमाके सुने गए। इसके अलावा दक्षिण पश्चिम ईरान के खुजेस्तान में भी अमेरिकी मिसाइलें गिरीं।


एपी के अनुसार, आइआरजीसी ने दावा किया कि अमेरिकी हमलों के जवाब में मंगलवार को नस्र 2 सैन्य अभियान चलाया गया। इसके तहत जार्डन, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। जार्डन पर अमेरिकी एयर बेस पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया गया।


जार्डन की तरफ से बताया गया कि चार ईरानी मिसाइल हमलों को विफल किया गया है। वहीं, बहरीन में स्थित अमेरिकी अड्डों पर भी मिसाइल से हमला हुआ। बहरीन में तीन बार सायरन बजे। कुवैत में भी अमेरिका के क्रूज मिसाइल ठिकानों पर हमले हुए। कुवैत ने भी हमले विफल करने का दावा किया। साथ ही, एक अमेरिकी एमक्यू-1 ड्रोन को होर्मुज के ऊपर मार गिराया गया।
ट्रंप ने नहीं दोहराई पिछली गलती

एएनआइ के अनुसार, ट्रंप ने 10 जुलाई को सीनेट के कार्यवाहक अध्यक्ष चक ग्रासले को भेजे पत्र में बताया कि अमेरिकी सैन्य अभियान सात जुलाई से फिर शुरू हो गया है। यह कदम अमेरिका और ईरान के बीच कई महीनों से लागू युद्धविराम समाप्त होने के बाद उठाया गया। पिछली बार उन्होंने ईरान पर हमले की जानकारी कांग्रेस को नहीं दी थी, जिसके चलते उनकी काफी आलोचना हो रही थी।


अमेरिकी प्रशासन ने यह सूचना 1973 के वार पावर्स रिजोल्यूशन के तहत कांग्रेस को दी है, जिसके अनुसार किसी भी सैन्य कार्रवाई शुरू होने के 48 घंटे के भीतर राष्ट्रपति को कांग्रेस को सूचित करना अनिवार्य होता है।
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