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बीजेपी के लिए Win-Win वाली स्थिति... बंगाल-तमिलनाडु में होने वाले बदलाव से संसद में NDA को कैसे मिलेगा फायदा?

बीजेपी के लिए Win-Win वाली स्थिति... बंगाल-तमिलनाडु में होने वाले बदलाव से संसद में NDA को कैसे मिलेगा फायदा?


पश्चिम बंगाल में टीएमसी के आंतरिक कलह और तमिलनाडु में डीएमके के गठबंधन संबंधी बदलावों से विपक्ष कमजोर हो रहा है। इससे संसद में बीजेपी के नेतृत्व वाले ...और पढ़ें






पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह। (फाइल फोटो)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। संसद के पिछले सत्र के दौरान लोकसभा में महिला आरक्षण कानून में संशोधन वाला बिल विपक्ष की खिलाफ वोटिंग की वजह से पास नहीं पाया। उस समय ऐसा लग रहा था कि एक एकजुट विपक्ष सरकार के महत्वाकांक्षी विधायी एजेंडे को पटरी से उतार सकता है और उसके नैरेटिव को बिगाड़ सकता है। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है।


अब बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के लिए संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह राह आसान होती दिख रही है क्योंकि उसके दो सबसे मजबूत क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं।
राजनीतिक चुनौतियों से जूझता विपक्ष

जहां एक तरफ बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी अपने अस्तित्व पर संकट का सामना कर रही है। उसके कुल 80 विधायकों में से 58 के एक बागी गुट ने ममता की पसंद के खिलाफ जाकर ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुन लिया है। यह 1998 में ममता द्वारा स्थापित पार्टी में पहली बड़ी फूट है।

वहीं दूसरी तरफ डीएमके तमिलनाडु में कांग्रेस द्वारा विजय के नेतृत्व वाली टीवीके के लिए उसे (DMK को) छोड़ दिए जाने के बाद अपने विकल्पों पर विचार कर रही है।

तीन क्षेत्रीय पार्टियों टीएमसी और डीएमके के अलावा समाजवादी पार्टी का कांग्रेस के साथ आना ही था, जिसने लोकसभा में सरकार के संविधान संशोधन विधेयक का भविष्य तय कर दिया था क्योंकि इन सभी के कुल 185 सांसद सदन की कुल सदस्य संख्या के एक-तिहाई से ज्यादा हैं और किसी भी विधायी कदम को रोकने के लिए जरूरी संख्या है।

बीजेपी की मजबूत होती स्थिति

टीएमसी के बिखराव और डीएमके के कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रति पहले जैसा उत्साह न दिखाने की संभावना को देखते हुए 2024 के चुनावों के बाद से अब बीजेपी सदन में पहले से कहीं ज्यादा बेहतर स्थिति में है। यहां वह विपक्ष की आपसी फूट का फायदा अपने पक्ष में उठा सकती है।


पहले से ही ऐसी सुगबुगाहटें सुनाई दे रही हैं कि महाराष्ट्र के विपक्ष के कुछ सांसद अपनी बागी होने के लिए तैयार हैं। वहीं टीएमसी के 28 लोकसभा और 13 राज्यसभा के सांसद हैं और जब पार्टी में बगावत हो चुकी है तो इसका असर इन सांसदों पर भी देखने को मिल सकता है।


तमिलनाडु में डीएमके की मुख्य प्रतिद्वंद्विता अब टीवीके से है और कांग्रेस ने उसे सपोर्ट किया है। ऐसे में यह राय यह बन रही है कि अब डीएमके केंद्र सरकार के प्रति अपनी स्वाभाविक शत्रुता को छोड़कर अब ज्यादा व्यावहारिक रवैया अपनाएगी।


विपक्ष के भीतर बदले हुए समीकरणों और हालिया विधानसभा चुनावों में बीजेपी की मजबूत स्थिति के सामने आने के बाद अब सरकार को उम्मीद है कि वह अपने महत्वाकांक्षी विधायी एजेंडे को अब और भी ज्यादा जोर-शोर से आगे बढ़ा पाएगी।
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