क्या है U वीजा? जिसे पाने के लिए भारतीय ने रची फर्जी डकैती की साजिश, कबूला जुर्म
क्या है U वीजा? जिसे पाने के लिए भारतीय ने रची फर्जी डकैती की साजिश, कबूला जुर्म
मितुल पटेल ने बोस्टन में यू-वीजा धोखाधड़ी मामले में अपना जुर्म कबूल कर लिया है, जिसमें फर्जी डकैतियों का नाटक कर लोगों को यू-वीजा के लिए आवेदन करने मे ...और पढ़ें

HIGHLIGHTS
मितुल पटेल ने बोस्टन में यू-वीजा धोखाधड़ी स्वीकारी।
फर्जी डकैतियों का नाटक कर यू-वीजा आवेदन में मदद।
रंभाई पटेल के गिरोह में 10 अन्य लोग भी शामिल।
डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। 40 वर्षीय मितुल पटेल ने मैसाचुसेट्स के बोस्टन में वीजा धोखाधड़ी मामले में अपना जुर्म कबूल कर लिया है। इस मामले में एक संगठित गिरोह ने डकैती का नाटक रचा था, ताकि इसके पीड़ित यू-वीजा के लिए आवेदन कर सकें। मितुल पटेल भी इन्हीं तथाकथित पीड़ितों में से एक था। इस मामले में 29 जुलाई को सजा सुनाई जानी है। इससे पहले, मार्च 2026 में 10 अन्य लोगों पर भी आपराधिक शिकायत दर्ज की गई थी।
इस गिरोह का नेतृत्व रंभाई पटेल कर रहा था, जिसे मई 2025 में दोषी ठहराया जा चुका है। मितुल पटेल ने रंभाई पटेल को पैसे दिए थे ताकि वह अक्टूबर 2023 में वॉर्सेस्टर के एक स्टोर में रची गई हथियारों के बल पर डकैती में एक पीड़ित के रूप में शामिल हो सके।
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, रंभाई पटेल और उसके साथियों ने मार्च 2024 से मैसाचुसेट्स और अन्य जगहों पर कम से कम छह सुविधा/शराब की दुकानों और फास्ट-फूड रेस्तरां में डकैती की झूठी साजिश रची और उसे अंजाम दिया। स्टोर के मालिक और पीड़ित इस साजिश से पूरी तरह वाकिफ थे।
कैसे दिया जाता था घटना को अंजाम?
इन फर्जी डकैतियों के दौरान, एक लुटेरा कथित तौर पर स्टोर क्लर्क या मालिकों को बंदूक जैसे हथियार से धमकाता था और कैश रजिस्टर से पैसे निकालकर भाग जाता था। यह सब कुछ निगरानी कैमरे के ठीक सामने होना जरूरी था। ऐसा नहीं होने पर इस पूरी योजना का कोई फायदा नहीं था, क्योंकि यही फुटेज सबूत के तौर पर काम आती थी।
डकैती के बाद क्लर्क या मालिक पुलिस को इस अपराध की सूचना देने से पहले कम से कम पांच मिनट तक इंतजार करते थे ताकि लुटेरा आसानी से भाग सके। आरोप है कि सभी पीड़ितों ने इस योजना का हिस्सा बनने के लिए रंभाई पटेल को पैसे दिए थे।
इसके बदले में, रंभाई पटेल ने स्टोर मालिकों को डकैती का नाटक रचने के लिए उनकी दुकानों का उपयोग करने के एवज में भुगतान किया था।यू-वीजा पाने के लिए रंभाई पटेल की मदद लेने वाले अन्य 10 लोग अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे थे।
जितेंद्रकुमार पटेल (39), महेशकुमार पटेल (36), संजयकुमार पटेल, दीपिकाबेन पटेल (40) (इन्हें भारत डिपोर्ट कर दिया गया है।), रमेशभाई पटेल (52), अमिताभेन पटेल (43), रोनककुमार पटेल (28), संगीताबेन पटेल (36), मिंकेश पटेल (42), सोनल पटेल (42) इस मामले में लोग शामिल है।
क्या है यू-वीजा?
यू-वीजा गैर-आप्रवासी वीजा है। यह वीजा कुछ विशेष प्रकार के अपराधों के उन पीड़ितों के लिए उपलब्ध है, जिन्हें मानसिक या शारीरिक शोषण का सामना करना पड़ा हो और जिन्होंने आपराधिक गतिविधियों की जांच या मुकदमों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की मदद की हो।
मितुल पटेल ने बोस्टन में यू-वीजा धोखाधड़ी मामले में अपना जुर्म कबूल कर लिया है, जिसमें फर्जी डकैतियों का नाटक कर लोगों को यू-वीजा के लिए आवेदन करने मे ...और पढ़ें

HIGHLIGHTS
मितुल पटेल ने बोस्टन में यू-वीजा धोखाधड़ी स्वीकारी।
फर्जी डकैतियों का नाटक कर यू-वीजा आवेदन में मदद।
रंभाई पटेल के गिरोह में 10 अन्य लोग भी शामिल।
डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। 40 वर्षीय मितुल पटेल ने मैसाचुसेट्स के बोस्टन में वीजा धोखाधड़ी मामले में अपना जुर्म कबूल कर लिया है। इस मामले में एक संगठित गिरोह ने डकैती का नाटक रचा था, ताकि इसके पीड़ित यू-वीजा के लिए आवेदन कर सकें। मितुल पटेल भी इन्हीं तथाकथित पीड़ितों में से एक था। इस मामले में 29 जुलाई को सजा सुनाई जानी है। इससे पहले, मार्च 2026 में 10 अन्य लोगों पर भी आपराधिक शिकायत दर्ज की गई थी।
इस गिरोह का नेतृत्व रंभाई पटेल कर रहा था, जिसे मई 2025 में दोषी ठहराया जा चुका है। मितुल पटेल ने रंभाई पटेल को पैसे दिए थे ताकि वह अक्टूबर 2023 में वॉर्सेस्टर के एक स्टोर में रची गई हथियारों के बल पर डकैती में एक पीड़ित के रूप में शामिल हो सके।
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, रंभाई पटेल और उसके साथियों ने मार्च 2024 से मैसाचुसेट्स और अन्य जगहों पर कम से कम छह सुविधा/शराब की दुकानों और फास्ट-फूड रेस्तरां में डकैती की झूठी साजिश रची और उसे अंजाम दिया। स्टोर के मालिक और पीड़ित इस साजिश से पूरी तरह वाकिफ थे।
कैसे दिया जाता था घटना को अंजाम?
इन फर्जी डकैतियों के दौरान, एक लुटेरा कथित तौर पर स्टोर क्लर्क या मालिकों को बंदूक जैसे हथियार से धमकाता था और कैश रजिस्टर से पैसे निकालकर भाग जाता था। यह सब कुछ निगरानी कैमरे के ठीक सामने होना जरूरी था। ऐसा नहीं होने पर इस पूरी योजना का कोई फायदा नहीं था, क्योंकि यही फुटेज सबूत के तौर पर काम आती थी।
डकैती के बाद क्लर्क या मालिक पुलिस को इस अपराध की सूचना देने से पहले कम से कम पांच मिनट तक इंतजार करते थे ताकि लुटेरा आसानी से भाग सके। आरोप है कि सभी पीड़ितों ने इस योजना का हिस्सा बनने के लिए रंभाई पटेल को पैसे दिए थे।
इसके बदले में, रंभाई पटेल ने स्टोर मालिकों को डकैती का नाटक रचने के लिए उनकी दुकानों का उपयोग करने के एवज में भुगतान किया था।यू-वीजा पाने के लिए रंभाई पटेल की मदद लेने वाले अन्य 10 लोग अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे थे।
जितेंद्रकुमार पटेल (39), महेशकुमार पटेल (36), संजयकुमार पटेल, दीपिकाबेन पटेल (40) (इन्हें भारत डिपोर्ट कर दिया गया है।), रमेशभाई पटेल (52), अमिताभेन पटेल (43), रोनककुमार पटेल (28), संगीताबेन पटेल (36), मिंकेश पटेल (42), सोनल पटेल (42) इस मामले में लोग शामिल है।
क्या है यू-वीजा?
यू-वीजा गैर-आप्रवासी वीजा है। यह वीजा कुछ विशेष प्रकार के अपराधों के उन पीड़ितों के लिए उपलब्ध है, जिन्हें मानसिक या शारीरिक शोषण का सामना करना पड़ा हो और जिन्होंने आपराधिक गतिविधियों की जांच या मुकदमों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की मदद की हो।
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