जब लोग Suman Kalyanpur को समझ लेते थे लता मंगेशकर, 'स्वर साम्राज्ञी' से तुलना पर छलका था सिंगर का दर्द
जब लोग Suman Kalyanpur को समझ लेते थे लता मंगेशकर, 'स्वर साम्राज्ञी' से तुलना पर छलका था सिंगर का दर्द
भारतीय सिनेमा की बेहतरीन प्लेबैक सिंगर Suman Kalyanpur का 31 मई 2026 को 89 की उम्र में निधन हो गया। ...और पढ़ें
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लता मंगेशकर से होती थी सुमन कल्याणपुर की तुलना
सुमन कल्याणपुर का जन्म 28 जनवरी 1937 को हुआ था, वे एक भारतीय प्लेबैक सिंगर थीं जो मुख्य रूप से हिंदी सिनेमा में अपने काम के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने हिंदी के अलावा बंगाली, मराठी, असमिया, गुजराती, कन्नड़, अंगिका, भोजपुरी, राजस्थानी, ओडिया और पंजाबी जैसी कई अन्य भाषाओं की फिल्मों के लिए भी गीत रिकॉर्ड किए।
लता मंगेशकर जैसी थी सुमन कल्याणपुर की आवाज
उनकी आवाज की टोन और बनावट लता मंगेशकर से मिलती-जुलती होने के कारण, अक्सर उनकी आवाज को लता मंगेशकर की आवाज समझ लिया जाता था। सुमन कल्याणपुर के करियर की शुरुआत 1954 में हुई थी, और 1960 और 1970 के दशक में वे एक लोकप्रिय गायिका बन गईं।
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उनके कई गानों में लता के अंदाज और उनके अंदाज में फर्क करना मुश्किल होता है, क्योंकि उन्होंने लता के ही जैसी बेहतरीन क्वालिटी के साथ गाया था। कल्याणपुर अपनी आवाज और लता की आवाज में इस समानता को लेकर काफी असहज महसूस करती थीं। एक बार उन्होंने इस बारे में जवाब देते हुए कहा था, 'मैं उनसे काफी प्रभावित थी। अपने कॉलेज के दिनों में, मैं उनके गाने गाया करती थी। मेरी आवाज नाज़ुक और पतली थी। मैं और क्या कर सकती थी?
उन्होंने आगे कहा था, 'इसके अलावा, जब रेडियो सीलोन इन गानों को प्रसारित करता था, तो उनके नाम कभी नहीं बताए जाते थे। यहां तक कि रिकॉर्ड्स पर भी कभी-कभी गलत नाम लिखे होते थे। शायद इसी वजह से और भी ज्यादा भ्रम पैदा हुआ'।
मोहम्मद रफी के साथ दिए खूब हिंट सॉन्ग्स
सुमन कल्याणपुर (Suman Kalyanpur) ने अपने पूरे करियर में 740 गानों को आवाज दी वहीं मोहम्मद रफी (Mohammed Rafi) के साथ सबसे ज्यादा डुएट गाने वाली सिंगर्स में उनका नाम आता है। उन्होंने रफी के साथ 140 से ज्यादा डुएट गाने गाए थे। उनका सबसे पॉपुलर गाना है 'आज कल तेरे मेरे प्यार के चर्चे'। जिसे शम्मी कपूर और मुमताज पर फिल्माया गया था। यह गाना फिल्म बह्मचारी का है।
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तलत महमूद के साथ गाने का मिला पहला मौका
सुमन कल्याणपुर का पहला फिल्मी गीत, फिल्म 'दरवाजा' (1954) में तलत महमूद के साथ गाया गया एक युगल गीत था। तलत महमूद ने एक संगीत समारोह में कल्याणपुर को गाते हुए सुना और उनकी गायकी से बेहद प्रभावित हुए। उस समय फिल्म जगत में बिल्कुल नई होने के बावजूद, उनके करियर को तब एक बड़ी उड़ान मिली जब तलत ने उनके साथ युगल गीत गाने की सहमति दी; इस घटना ने फिल्म इंडस्ट्री का ध्यान उनकी ओर आकर्षित किया और उन्हें पहचान दिलाई।
सुमन कल्याणपुर के कुछ बेहतरीन गीत
कल्याणपुर ने संगीतकार हेमन्त कुमार के निर्देशन में लता मंगेशकर के साथ युगल गीत 'कभी आज, कभी कल, कभी पारसों' गाया। इसके साथ ही उन्होंने किशोर कुमार, मोहम्मद रफ़ी, मन्ना डे, मुकेश, तलत महमूद और हेमंत कुमार के साथ कुछ लोकप्रिय युगल गीत रिकॉर्ड किए। रफी के साथ उनके कुछ यादगार युगल गीत हैं 'आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे', 'ना ना करते प्यार', 'तुमसे ओ हसीना', 'रहें ना रहें हम', 'पर्बतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा हे', 'अजहुना ऐ बलमा', 'तुमने पुकारा और हम चले आये', 'बद मुद्दत के ये घड़ी आई', 'मुझे ये भूल ना', 'दिल ने' फिर याद किया'', ''तुझको दिलबरी की कसम'' और ''चांद ताकता है इधर''।
मन्ना डे के साथ उन्होंने दत्ताराम के संगीत निर्देशन में लोकप्रिय युगल गीत 'ना जाने कहां हम थे' गाया। मुकेश के साथ उन्होंने कई लोकप्रिय युगल गीत गाए हैं, जैसे 'ये किसने गीत छेड़ा', 'अखियों का नूर है तू', 'मेरा प्यार भी तू है', 'दिल ने फिर याद किया', 'शमा से कोई कहदे' आदि।
भारतीय सिनेमा की बेहतरीन प्लेबैक सिंगर Suman Kalyanpur का 31 मई 2026 को 89 की उम्र में निधन हो गया। ...और पढ़ें
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लता मंगेशकर से होती थी सुमन कल्याणपुर की तुलना
सुमन कल्याणपुर का जन्म 28 जनवरी 1937 को हुआ था, वे एक भारतीय प्लेबैक सिंगर थीं जो मुख्य रूप से हिंदी सिनेमा में अपने काम के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने हिंदी के अलावा बंगाली, मराठी, असमिया, गुजराती, कन्नड़, अंगिका, भोजपुरी, राजस्थानी, ओडिया और पंजाबी जैसी कई अन्य भाषाओं की फिल्मों के लिए भी गीत रिकॉर्ड किए।
लता मंगेशकर जैसी थी सुमन कल्याणपुर की आवाज
उनकी आवाज की टोन और बनावट लता मंगेशकर से मिलती-जुलती होने के कारण, अक्सर उनकी आवाज को लता मंगेशकर की आवाज समझ लिया जाता था। सुमन कल्याणपुर के करियर की शुरुआत 1954 में हुई थी, और 1960 और 1970 के दशक में वे एक लोकप्रिय गायिका बन गईं।
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उनके कई गानों में लता के अंदाज और उनके अंदाज में फर्क करना मुश्किल होता है, क्योंकि उन्होंने लता के ही जैसी बेहतरीन क्वालिटी के साथ गाया था। कल्याणपुर अपनी आवाज और लता की आवाज में इस समानता को लेकर काफी असहज महसूस करती थीं। एक बार उन्होंने इस बारे में जवाब देते हुए कहा था, 'मैं उनसे काफी प्रभावित थी। अपने कॉलेज के दिनों में, मैं उनके गाने गाया करती थी। मेरी आवाज नाज़ुक और पतली थी। मैं और क्या कर सकती थी?
उन्होंने आगे कहा था, 'इसके अलावा, जब रेडियो सीलोन इन गानों को प्रसारित करता था, तो उनके नाम कभी नहीं बताए जाते थे। यहां तक कि रिकॉर्ड्स पर भी कभी-कभी गलत नाम लिखे होते थे। शायद इसी वजह से और भी ज्यादा भ्रम पैदा हुआ'।
मोहम्मद रफी के साथ दिए खूब हिंट सॉन्ग्स
सुमन कल्याणपुर (Suman Kalyanpur) ने अपने पूरे करियर में 740 गानों को आवाज दी वहीं मोहम्मद रफी (Mohammed Rafi) के साथ सबसे ज्यादा डुएट गाने वाली सिंगर्स में उनका नाम आता है। उन्होंने रफी के साथ 140 से ज्यादा डुएट गाने गाए थे। उनका सबसे पॉपुलर गाना है 'आज कल तेरे मेरे प्यार के चर्चे'। जिसे शम्मी कपूर और मुमताज पर फिल्माया गया था। यह गाना फिल्म बह्मचारी का है।
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तलत महमूद के साथ गाने का मिला पहला मौका
सुमन कल्याणपुर का पहला फिल्मी गीत, फिल्म 'दरवाजा' (1954) में तलत महमूद के साथ गाया गया एक युगल गीत था। तलत महमूद ने एक संगीत समारोह में कल्याणपुर को गाते हुए सुना और उनकी गायकी से बेहद प्रभावित हुए। उस समय फिल्म जगत में बिल्कुल नई होने के बावजूद, उनके करियर को तब एक बड़ी उड़ान मिली जब तलत ने उनके साथ युगल गीत गाने की सहमति दी; इस घटना ने फिल्म इंडस्ट्री का ध्यान उनकी ओर आकर्षित किया और उन्हें पहचान दिलाई।
सुमन कल्याणपुर के कुछ बेहतरीन गीत
कल्याणपुर ने संगीतकार हेमन्त कुमार के निर्देशन में लता मंगेशकर के साथ युगल गीत 'कभी आज, कभी कल, कभी पारसों' गाया। इसके साथ ही उन्होंने किशोर कुमार, मोहम्मद रफ़ी, मन्ना डे, मुकेश, तलत महमूद और हेमंत कुमार के साथ कुछ लोकप्रिय युगल गीत रिकॉर्ड किए। रफी के साथ उनके कुछ यादगार युगल गीत हैं 'आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे', 'ना ना करते प्यार', 'तुमसे ओ हसीना', 'रहें ना रहें हम', 'पर्बतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा हे', 'अजहुना ऐ बलमा', 'तुमने पुकारा और हम चले आये', 'बद मुद्दत के ये घड़ी आई', 'मुझे ये भूल ना', 'दिल ने' फिर याद किया'', ''तुझको दिलबरी की कसम'' और ''चांद ताकता है इधर''।
मन्ना डे के साथ उन्होंने दत्ताराम के संगीत निर्देशन में लोकप्रिय युगल गीत 'ना जाने कहां हम थे' गाया। मुकेश के साथ उन्होंने कई लोकप्रिय युगल गीत गाए हैं, जैसे 'ये किसने गीत छेड़ा', 'अखियों का नूर है तू', 'मेरा प्यार भी तू है', 'दिल ने फिर याद किया', 'शमा से कोई कहदे' आदि।
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Mirchmasala
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