NASA ने शेयर की झूमर की तरह चमकते पुराने तारों के समूह की तस्वीर, हबल टेलिस्कोप ने कैद की खूबसूरती
NASA ने शेयर की झूमर की तरह चमकते पुराने तारों के समूह की तस्वीर, हबल टेलिस्कोप ने कैद की खूबसूरती
नासा के हबल टेलीस्कोप ने हजारों चमकीले तारों वाले NGC 6723 क्लस्टर की शानदार तस्वीर खींची है, जिसे शैंडेलियर क्लस्टर भी कहते हैं। ...और पढ़ें

झूमर की तरह चमकते पुराने तारों के समूह की तस्वीर(फोटो: एक्स/@NASAHubble)
हबल ने NGC 6723 शैंडेलियर क्लस्टर की शानदार तस्वीर जारी की।
यह ग्लोबुलर क्लस्टर धनु तारामंडल में 27,000 प्रकाश वर्ष दूर है।
क्लस्टर में मिल्की वे के 10 अरब वर्ष पुराने तारे शामिल हैं।
डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। हमारी आकाशगंगा की गहराइयों में मौजूद सितारों के प्राचीन समूह आज भी ब्रह्मांड के कई नए रहस्यों से परदा उठा रहे हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के हबल स्पेस टेलिस्कोप ने हाल ही में एक ऐसे ही तारा प्रणाली की एक शानदार तस्वीर खींची है, जिसमें हजारों चमकीले सितारों का एक विशाल झुंड दिखाई दे रहा है।
तस्वीर में दिख रहे इस क्लस्टर का नाम NGC 6723 है, जिसे शैंडेलियर क्लस्टर के नाम से भी जाना जाता है। यह पृथ्वी से लगभग 27,000 प्रकाश वर्ष दूर धनु तारामंडल में स्थित है। अंतरिक्ष में यह किसी अनगिनत दीयों से सजे झूमर की तरह चमकता है, जहां चमकने वाली हर एक रोशनी वास्तव में एक विशाल तारा है।
क्या होते हैं ग्लोबुलर क्लस्टर?
हबल द्वारा ली गई इस तस्वीर में एक ग्लोबुलर क्लस्टर दिखाई दे रहा है। यह दरअसल हजारों से लेकर लाखों सितारों का एक ऐसा समूह होता है, जो गुरुत्वाकर्षण बल के कारण आपस में बहुत मजबूती से बंधे होते हैं।
हमारी आकाशगंगा में ऐसे 150 से अधिक ग्लोबुलर क्लस्टर मौजूद हैं, हालांकि अंतरिक्ष की धूल और सितारों की भारी भीड़ के कारण इनमें से कुछ अभी भी हमारी नजरों से छिपे हो सकते हैं।
आकाशगंगा के सबसे पुराने निवासी
इन ग्लोबुलर क्लस्टर्स में मिल्की वे आकाशगंगा के कुछ सबसे पुराने सितारे मौजूद हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, इनमें से कई सितारों की उम्र 10 अरब वर्ष से भी अधिक है, यानी ये लगभग उतने ही पुराने हैं जितना कि हमारा ब्रह्मांड।
माना जाता है कि ये क्लस्टर्स हमारी आकाशगंगा में बनने वाली सबसे शुरुआती संरचनाओं में से थे। इनका निर्माण उस पतली डिस्क के बनने से भी पहले हुआ था, जहां आज हमारा सूर्य चक्कर लगा रहा है। हालांकि, इनके निर्माण की सटीक प्रक्रिया आज भी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है।
पहले खगोलविदों का मानना था कि एक ग्लोबुलर क्लस्टर के सभी सितारे एक ही समय पर बने थे और उनका रासायनिक संगठन भी एक जैसा था। लेकिन हबल जैसे आधुनिक टेलिस्कोपों के नए अवलोकनों ने इस धारणा को बदल दिया है। अब यह साफ हो गया है कि इन तारा समूहों का इतिहास हमारी सोच से कहीं अधिक जटिल और दिलचस्प रहा है।
हबल का विशेष सर्वेक्षण
हबल ने मिल्की वे के ग्लोबुलर क्लस्टर्स पर किए गए एक विस्तृत सर्वेक्षण के हिस्से के रूप में पहली बार NGC 6723 का अध्ययन किया था। इस कार्यक्रम के तहत शोधकर्ताओं ने दृश्य और निकट-अवरक्त प्रकाश का उपयोग करके 65 अलग-अलग ग्लोबुलर क्लस्टर्स का बारीकी से अध्ययन किया।
इस डेटा ने वैज्ञानिकों को इन क्लस्टर्स की उम्र को समझने और यह जानने में मदद की कि कैसे भारी सितारे क्लस्टर के केंद्र की ओर चले जाते हैं, जबकि हल्के सितारे बाहरी क्षेत्रों की ओर खिसक जाते हैं। नासा का यह सर्वेक्षण विज्ञान जगत के लिए बेहद मूल्यवान साबित हुआ है, जिससे अब तक सैकड़ों वैज्ञानिक शोध पत्र तैयार किए जा चुके हैं
नासा के हबल टेलीस्कोप ने हजारों चमकीले तारों वाले NGC 6723 क्लस्टर की शानदार तस्वीर खींची है, जिसे शैंडेलियर क्लस्टर भी कहते हैं। ...और पढ़ें

झूमर की तरह चमकते पुराने तारों के समूह की तस्वीर(फोटो: एक्स/@NASAHubble)
हबल ने NGC 6723 शैंडेलियर क्लस्टर की शानदार तस्वीर जारी की।
यह ग्लोबुलर क्लस्टर धनु तारामंडल में 27,000 प्रकाश वर्ष दूर है।
क्लस्टर में मिल्की वे के 10 अरब वर्ष पुराने तारे शामिल हैं।
डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। हमारी आकाशगंगा की गहराइयों में मौजूद सितारों के प्राचीन समूह आज भी ब्रह्मांड के कई नए रहस्यों से परदा उठा रहे हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के हबल स्पेस टेलिस्कोप ने हाल ही में एक ऐसे ही तारा प्रणाली की एक शानदार तस्वीर खींची है, जिसमें हजारों चमकीले सितारों का एक विशाल झुंड दिखाई दे रहा है।
तस्वीर में दिख रहे इस क्लस्टर का नाम NGC 6723 है, जिसे शैंडेलियर क्लस्टर के नाम से भी जाना जाता है। यह पृथ्वी से लगभग 27,000 प्रकाश वर्ष दूर धनु तारामंडल में स्थित है। अंतरिक्ष में यह किसी अनगिनत दीयों से सजे झूमर की तरह चमकता है, जहां चमकने वाली हर एक रोशनी वास्तव में एक विशाल तारा है।
क्या होते हैं ग्लोबुलर क्लस्टर?
हबल द्वारा ली गई इस तस्वीर में एक ग्लोबुलर क्लस्टर दिखाई दे रहा है। यह दरअसल हजारों से लेकर लाखों सितारों का एक ऐसा समूह होता है, जो गुरुत्वाकर्षण बल के कारण आपस में बहुत मजबूती से बंधे होते हैं।
हमारी आकाशगंगा में ऐसे 150 से अधिक ग्लोबुलर क्लस्टर मौजूद हैं, हालांकि अंतरिक्ष की धूल और सितारों की भारी भीड़ के कारण इनमें से कुछ अभी भी हमारी नजरों से छिपे हो सकते हैं।
आकाशगंगा के सबसे पुराने निवासी
इन ग्लोबुलर क्लस्टर्स में मिल्की वे आकाशगंगा के कुछ सबसे पुराने सितारे मौजूद हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, इनमें से कई सितारों की उम्र 10 अरब वर्ष से भी अधिक है, यानी ये लगभग उतने ही पुराने हैं जितना कि हमारा ब्रह्मांड।
माना जाता है कि ये क्लस्टर्स हमारी आकाशगंगा में बनने वाली सबसे शुरुआती संरचनाओं में से थे। इनका निर्माण उस पतली डिस्क के बनने से भी पहले हुआ था, जहां आज हमारा सूर्य चक्कर लगा रहा है। हालांकि, इनके निर्माण की सटीक प्रक्रिया आज भी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है।
पहले खगोलविदों का मानना था कि एक ग्लोबुलर क्लस्टर के सभी सितारे एक ही समय पर बने थे और उनका रासायनिक संगठन भी एक जैसा था। लेकिन हबल जैसे आधुनिक टेलिस्कोपों के नए अवलोकनों ने इस धारणा को बदल दिया है। अब यह साफ हो गया है कि इन तारा समूहों का इतिहास हमारी सोच से कहीं अधिक जटिल और दिलचस्प रहा है।
हबल का विशेष सर्वेक्षण
हबल ने मिल्की वे के ग्लोबुलर क्लस्टर्स पर किए गए एक विस्तृत सर्वेक्षण के हिस्से के रूप में पहली बार NGC 6723 का अध्ययन किया था। इस कार्यक्रम के तहत शोधकर्ताओं ने दृश्य और निकट-अवरक्त प्रकाश का उपयोग करके 65 अलग-अलग ग्लोबुलर क्लस्टर्स का बारीकी से अध्ययन किया।
इस डेटा ने वैज्ञानिकों को इन क्लस्टर्स की उम्र को समझने और यह जानने में मदद की कि कैसे भारी सितारे क्लस्टर के केंद्र की ओर चले जाते हैं, जबकि हल्के सितारे बाहरी क्षेत्रों की ओर खिसक जाते हैं। नासा का यह सर्वेक्षण विज्ञान जगत के लिए बेहद मूल्यवान साबित हुआ है, जिससे अब तक सैकड़ों वैज्ञानिक शोध पत्र तैयार किए जा चुके हैं
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