Doordarshan के कल्ट शो के लिए संडे का इंतजार करते थे 90s के बच्चे, सुबह-सुबह हर घर में बजता था इसका आईकॉनिक गाना
Doordarshan के कल्ट शो के लिए संडे का इंतजार करते थे 90s के बच्चे, सुबह-सुबह हर घर में बजता था इसका आईकॉनिक गाना
37 साल पुराने इस कल्ट शो के लिए 90 के दशक में बच्चे खास तौर पर रविवार का इंतजार करते थे। ...और पढ़ें
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कल्ट था दूरदर्शन का ये शो
कल्ट था दूरदर्शन का ये शो
आईकॉनिक बन गया था इसका गाना
गुलजार साहब ने लिखे गाने के लिरिक्स
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। 90 के दशक में जब टेलीविजन पर ज्यादा चैनल नहीं हुआ करते थे तब दूरदर्शन एकमात्र एंटरटेनमेंट का साधन बना हुआ था। जिस पर बूढ़ों से लेकर बच्चों तक का कंटेंट आता था और जिसके लिए सब बेसब्री से इंतजार कर रहे होते थे।
शो के लिए करते थे रविवार का इंतजार
Doordarshan पर प्रसारित होने वाले शोज की यादें आज भी 80-90 के दशक के बच्चों के जहन में बसी हुई है। इन्हीं में से एक शो था जो सिर्फ रविवार को प्रसारित होता था और इसके लिए बच्चे खास तौर पर संडे की छुट्टी का इंतजार किया करते थे। इस शो में एक आईकॉनिक गाना भी था जिसे बच्चे मजे के साथ गुनगुनाते थे।
आईकॉनिक था 37 साल पुराना शो
37 साल पहले यह शो पहले जापान में प्रसारित हुआ और फिर 1993 में भारत में हर रविवार की सुबह इसका प्रसारण होने लगा। शो का नाम है द जंगल बुक (The Jungle Book) जिसे पहली बार 2 अक्तूबर 1989 को जापान में प्रसारित किया गया और बाद में इसका टेलीकास्ट भारत में दूरदर्शन पर किया गया। वहीं लॉकडाउन के वक्त 2020 में इसका दोबारा प्रसारण दोपहर 1 बजे किया गया।

90s के बच्चे गुनगुनाते थे ये गाना
इस शो का गाना 'चड्डी पहन के फूल खिला है' 90 के दशक के बच्चे खूब गुनगुनाते थे। इस गाने के लिरिक्स गुलजार साहब ने लिखे थे और इसे विशाल भारद्वाज ने कंपोज किया था वहीं इसे अमोल सहदेव ने गाया था।
क्या है शो की कहानी?
टेलीविजन सीरीज की कहानी 'मोगली' के ईर्द गिर्द घूमती है जो है तो इंसानी बच्चा लेकिन उसे भेड़ियों के एक ग्रुप ने पाला है। वह भालू और बघीरा के साथ जंगल में बड़ा होता है। जिसे शेर खान की साजिशों का सामना करना पड़ता है। 'द जंगल बुक' रुडयार्ड किपलिंग की कहानियों का एक संग्रह है, जो 1894 में प्रकाशित हुआ था। ज्यादातर कहानियां भारत के एक जंगल पर आधारित हैं; इनमें बार-बार मध्य प्रदेश राज्य में स्थित 'सिवनी' (Seoni) का जिक्र आता है।
37 साल पुराने इस कल्ट शो के लिए 90 के दशक में बच्चे खास तौर पर रविवार का इंतजार करते थे। ...और पढ़ें
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कल्ट था दूरदर्शन का ये शो
कल्ट था दूरदर्शन का ये शो
आईकॉनिक बन गया था इसका गाना
गुलजार साहब ने लिखे गाने के लिरिक्स
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। 90 के दशक में जब टेलीविजन पर ज्यादा चैनल नहीं हुआ करते थे तब दूरदर्शन एकमात्र एंटरटेनमेंट का साधन बना हुआ था। जिस पर बूढ़ों से लेकर बच्चों तक का कंटेंट आता था और जिसके लिए सब बेसब्री से इंतजार कर रहे होते थे।
शो के लिए करते थे रविवार का इंतजार
Doordarshan पर प्रसारित होने वाले शोज की यादें आज भी 80-90 के दशक के बच्चों के जहन में बसी हुई है। इन्हीं में से एक शो था जो सिर्फ रविवार को प्रसारित होता था और इसके लिए बच्चे खास तौर पर संडे की छुट्टी का इंतजार किया करते थे। इस शो में एक आईकॉनिक गाना भी था जिसे बच्चे मजे के साथ गुनगुनाते थे।
आईकॉनिक था 37 साल पुराना शो
37 साल पहले यह शो पहले जापान में प्रसारित हुआ और फिर 1993 में भारत में हर रविवार की सुबह इसका प्रसारण होने लगा। शो का नाम है द जंगल बुक (The Jungle Book) जिसे पहली बार 2 अक्तूबर 1989 को जापान में प्रसारित किया गया और बाद में इसका टेलीकास्ट भारत में दूरदर्शन पर किया गया। वहीं लॉकडाउन के वक्त 2020 में इसका दोबारा प्रसारण दोपहर 1 बजे किया गया।

90s के बच्चे गुनगुनाते थे ये गाना
इस शो का गाना 'चड्डी पहन के फूल खिला है' 90 के दशक के बच्चे खूब गुनगुनाते थे। इस गाने के लिरिक्स गुलजार साहब ने लिखे थे और इसे विशाल भारद्वाज ने कंपोज किया था वहीं इसे अमोल सहदेव ने गाया था।
क्या है शो की कहानी?
टेलीविजन सीरीज की कहानी 'मोगली' के ईर्द गिर्द घूमती है जो है तो इंसानी बच्चा लेकिन उसे भेड़ियों के एक ग्रुप ने पाला है। वह भालू और बघीरा के साथ जंगल में बड़ा होता है। जिसे शेर खान की साजिशों का सामना करना पड़ता है। 'द जंगल बुक' रुडयार्ड किपलिंग की कहानियों का एक संग्रह है, जो 1894 में प्रकाशित हुआ था। ज्यादातर कहानियां भारत के एक जंगल पर आधारित हैं; इनमें बार-बार मध्य प्रदेश राज्य में स्थित 'सिवनी' (Seoni) का जिक्र आता है।
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