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'दाखिल-खारिज करो; नहीं तो कूद जाऊंगा', हजारीबाग में CO कार्यालय से परेशान युवक मोबाइल टावर पर चढ़ा

'दाखिल-खारिज करो; नहीं तो कूद जाऊंगा', हजारीबाग में CO कार्यालय से परेशान युवक मोबाइल टावर पर चढ़ा

कटकमदाग के बानादाग में एक युवक दाखिल-खारिज में देरी से परेशान होकर एयरटेल टावर पर चढ़ गया और कूदने की धमकी दी। पुलिस और अधिकारियों के आश्वासन के बाद व ...और पढ़ें








भारी मशक्कत और अधिकारियों के आश्वासन पर युवक टावर से सुरक्षित नीचे उतरा।


युवक दाखिल-खारिज में देरी से परेशान होकर टावर पर चढ़ा।


छह महीने से कार्यालय के चक्कर काट रहा था विकास कुमार।



संवाद सूत्र, कटकमदाग (हजारीबाग)। मंगलवार की सुबह बानादाग में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक युवक अपनी जमीन के दाखिल-खारिज की मांग को लेकर सीधे एयरटेल के मोबाइल टावर पर चढ़ गया।

करीब सौ फीट ऊंचाई पर खड़े युवक की आवाज नीचे खड़े लोगों तक गूंज रही थी— "छह महीने से कार्यालय का चक्कर काट रहा हूं, अगर आज मेरा दाखिल-खारिज नहीं हुआ तो मैं यहीं से कूदकर जान दे दूंगा।"

युवक की पहचान चतरा जिले के टंडवा प्रखंड के कटही गांव निवासी स्वर्गीय गोविंद महतो के 28 वर्षीय पुत्र विकास कुमार के रूप में हुई है। विकास ने कटकमदाग अंचल क्षेत्र के फतहा गांव में जमीन खरीदी थी। जमीन खरीदने के बाद उसने दाखिल-खारिज के लिए आवेदन दिया, लेकिन उसका आरोप है कि पिछले छह माह से उसे केवल आश्वासन ही मिल रहा था।


कभी फाइल देखने की बात कही जाती, तो कभी किसी अन्य प्रक्रिया का हवाला देकर उसे वापस भेज दिया जाता। मंगलवार सुबह जब उसकी सहनशक्ति जवाब दे गई तो वह सीधे बानादाग स्थित एयरटेल के मोबाइल टावर पर चढ़ गया।

देखते ही देखते वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई। राहगीरों के कदम थम गए और हर किसी की नजर टावर की चोटी पर खड़े युवक पर टिक गई। नीचे खड़े लोग उसे समझाने का प्रयास करते रहे, लेकिन वह अपनी मांग पर अड़ा रहा।


हाल के दिनों में ये ट्रेंड खतरनाक बन रहा

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। काफी देर तक चले मान-मनौव्वल और बातचीत के बाद अधिकारियों ने उसकी समस्या का समाधान कराने का भरोसा दिया। इसके बाद युवक टावर से नीचे उतरने को तैयार हुआ, तब जाकर प्रशासन और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली।


घटना के बाद लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा कि यदि एक साधारण दाखिल-खारिज के लिए किसी व्यक्ति को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़े, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। झारखंड के सीओ कार्यालय में बिना रिश्वत कोई काम नहीं होता।


स्थानीय लोगों का कहना है कि समय पर सुनवाई होती तो शायद युवक को अपनी आवाज बुलंद करने के लिए टावर की ऊंचाई का सहारा नहीं लेना पड़ता। झारखंड में हाल के दिनों में ये ट्रेंड खतरनाक बन रहा है।
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