जिस पाइपलाइन के कारण अटका रांची का महत्वपूर्ण बाईपास रोड, पथ निर्माण और पेयजल विभाग को पता ही नहीं वह किसकी
जिस पाइपलाइन के कारण अटका रांची का महत्वपूर्ण बाईपास रोड, पथ निर्माण और पेयजल विभाग को पता ही नहीं वह किसकी
रांची में मेकॉन अंडरपास से डिबडीह क्रासिंग तक बनने वाली वैकल्पिक सड़क का निर्माण एक अज्ञात पाइपलाइन के कारण आठ साल से अटका है। ...और पढ़ें

मेकॉन अंडरपासवे
HIGHLIGHTS
मेकॉन अंडरपास-डिबडीह क्रासिंग वैकल्पिक सड़क निर्माण आठ साल से लंबित।
40 फीट लंबी अज्ञात पाइपलाइन बनी सड़क निर्माण में बाधा।
पथ निर्माण और पेयजल विभाग को पाइपलाइन की जानकारी नहीं।
रांची। मेकॉन अंडरपासवे से डिबडीह क्रासिंग तक बनने वाली वैकल्पिक सड़क पर अड़चनों का दौर खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। जाम से राहत दिलाने और डिबडीह रेलवे क्रासिंग पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से शुरू हुई इस परियोजना का निर्माण कार्य आठ वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो सका है।
वर्तमान स्थिति यह है कि सड़क पर गिट्टी बिछाने का कार्य लगभग पूरा हो चुका है और केवल कालीकरण का काम शेष है, लेकिन डिबडीह क्रासिंग के समीप करीब 40 फीट लंबी पाइपलाइन शिफ्ट नहीं होने के कारण पूरा मामला फिर अटक गया है।
विभागों को नहीं है जानकारी
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस पाइपलाइन को हटाने के कारण निर्माण कार्य रुका हुआ है, वह आखिर किस विभाग की है, इसकी स्पष्ट जानकारी न तो पथ निर्माण विभाग को है और न ही पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को।
दोनों विभागों के बीच समन्वय के अभाव में सड़क निर्माण अधर में लटका हुआ है। ऐसे में जब तक पाइपलाइन की पहचान और शिफ्टिंग नहीं होती, तब तक सड़क का कालीकरण संभव नहीं होगा। इसके साथ ही डिबडीह रेलवे क्रासिंग को भी बंद नहीं किया जा सकेगा।
वर्षों तक इस्पात मंत्रालय में अटका रहा मामला
दरअसल, यह परियोजना लंबे समय से बाधाओं से घिरी रही है। रेलवे ने वर्षों पहले मेकॉन अंडरपासवे का निर्माण करा दिया था। अतिक्रमण हटाने के लिए करीब 25 घरों को भी हटाया गया था, लेकिन अंडरपासवे तक पहुंचने वाली एप्रोच रोड के निर्माण के लिए मेकॉन की जमीन उपलब्ध नहीं होने से मामला वर्षों तक इस्पात मंत्रालय में अटका रहा।
रेलवे को करीब छह वर्षों तक जमीन हस्तांतरण के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी थी। लंबे इंतजार और फाइलों के दौर के बाद जमीन का मामला सुलझा, लेकिन अब पाइपलाइन नई बाधा बनकर सामने आ गई है।
सड़क परियोजना पर लगभग 10.5 करोड़ रुपये खर्च
डीपीएस स्कूल की ओर से अंडरपासवे तक एप्रोच रोड और पुल का निर्माण पहले ही पूरा हो चुका है। दूसरी ओर डिबडीह क्रासिंग लाइन तक समानांतर सड़क का निर्माण किया जाना है। कुल 890 मीटर लंबी सड़क परियोजना पर लगभग 10.5 करोड़ रुपये खर्च होने हैं।

यह सड़क बनने के बाद डिबडीह से डोरंडा जाने वाले वाहनों को रेलवे फाटक से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा। साथ ही बिरसा चौक और डिबडीह क्षेत्र में लगने वाले जाम से भी लोगों को राहत मिलेगी।
तालमेल की कमी के कारण परियोजना फिर सुस्त
हालांकि, वर्तमान में विभागीय तालमेल की कमी के कारण परियोजना फिर सुस्त पड़ गई है। पथ निर्माण विभाग का कहना है कि पाइपलाइन शिफ्टिंग के लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से एस्टीमेट मांगा गया है, जबकि पेयजल विभाग इस संबंध में किसी आधिकारिक पत्र से इनकार कर रहा है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि आखिर पाइपलाइन किस विभाग की है और इसे हटाने की जिम्मेदारी कौन लेगा।
पाइपलाइन शिफ्ट करने के लिए एस्टीमेट पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से मांगा गया है। एस्टीमेट मिलने के बाद इस दिशा में काम शुरू हो जाएगा।- विनोद कच्छप, कार्यपालक अभियंता, पथ निर्माण विभाग, शहरी डिवीजन
मुझे ऐसी कोई जानकारी नहीं है। इस संबंध में कोई पत्र पथ निर्माण विभाग से नहीं मिला है। संबंधित पाइपलाइन संभवतः जुडको की हो सकती है।- चंद्रशेखर कुमार, कार्यपालक अभियंता, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, शहरी डिवीजन
रांची में मेकॉन अंडरपास से डिबडीह क्रासिंग तक बनने वाली वैकल्पिक सड़क का निर्माण एक अज्ञात पाइपलाइन के कारण आठ साल से अटका है। ...और पढ़ें

मेकॉन अंडरपासवे
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मेकॉन अंडरपास-डिबडीह क्रासिंग वैकल्पिक सड़क निर्माण आठ साल से लंबित।
40 फीट लंबी अज्ञात पाइपलाइन बनी सड़क निर्माण में बाधा।
पथ निर्माण और पेयजल विभाग को पाइपलाइन की जानकारी नहीं।
रांची। मेकॉन अंडरपासवे से डिबडीह क्रासिंग तक बनने वाली वैकल्पिक सड़क पर अड़चनों का दौर खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। जाम से राहत दिलाने और डिबडीह रेलवे क्रासिंग पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से शुरू हुई इस परियोजना का निर्माण कार्य आठ वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो सका है।
वर्तमान स्थिति यह है कि सड़क पर गिट्टी बिछाने का कार्य लगभग पूरा हो चुका है और केवल कालीकरण का काम शेष है, लेकिन डिबडीह क्रासिंग के समीप करीब 40 फीट लंबी पाइपलाइन शिफ्ट नहीं होने के कारण पूरा मामला फिर अटक गया है।
विभागों को नहीं है जानकारी
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस पाइपलाइन को हटाने के कारण निर्माण कार्य रुका हुआ है, वह आखिर किस विभाग की है, इसकी स्पष्ट जानकारी न तो पथ निर्माण विभाग को है और न ही पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को।
दोनों विभागों के बीच समन्वय के अभाव में सड़क निर्माण अधर में लटका हुआ है। ऐसे में जब तक पाइपलाइन की पहचान और शिफ्टिंग नहीं होती, तब तक सड़क का कालीकरण संभव नहीं होगा। इसके साथ ही डिबडीह रेलवे क्रासिंग को भी बंद नहीं किया जा सकेगा।
वर्षों तक इस्पात मंत्रालय में अटका रहा मामला
दरअसल, यह परियोजना लंबे समय से बाधाओं से घिरी रही है। रेलवे ने वर्षों पहले मेकॉन अंडरपासवे का निर्माण करा दिया था। अतिक्रमण हटाने के लिए करीब 25 घरों को भी हटाया गया था, लेकिन अंडरपासवे तक पहुंचने वाली एप्रोच रोड के निर्माण के लिए मेकॉन की जमीन उपलब्ध नहीं होने से मामला वर्षों तक इस्पात मंत्रालय में अटका रहा।
रेलवे को करीब छह वर्षों तक जमीन हस्तांतरण के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी थी। लंबे इंतजार और फाइलों के दौर के बाद जमीन का मामला सुलझा, लेकिन अब पाइपलाइन नई बाधा बनकर सामने आ गई है।
सड़क परियोजना पर लगभग 10.5 करोड़ रुपये खर्च
डीपीएस स्कूल की ओर से अंडरपासवे तक एप्रोच रोड और पुल का निर्माण पहले ही पूरा हो चुका है। दूसरी ओर डिबडीह क्रासिंग लाइन तक समानांतर सड़क का निर्माण किया जाना है। कुल 890 मीटर लंबी सड़क परियोजना पर लगभग 10.5 करोड़ रुपये खर्च होने हैं।

यह सड़क बनने के बाद डिबडीह से डोरंडा जाने वाले वाहनों को रेलवे फाटक से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा। साथ ही बिरसा चौक और डिबडीह क्षेत्र में लगने वाले जाम से भी लोगों को राहत मिलेगी।
तालमेल की कमी के कारण परियोजना फिर सुस्त
हालांकि, वर्तमान में विभागीय तालमेल की कमी के कारण परियोजना फिर सुस्त पड़ गई है। पथ निर्माण विभाग का कहना है कि पाइपलाइन शिफ्टिंग के लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से एस्टीमेट मांगा गया है, जबकि पेयजल विभाग इस संबंध में किसी आधिकारिक पत्र से इनकार कर रहा है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि आखिर पाइपलाइन किस विभाग की है और इसे हटाने की जिम्मेदारी कौन लेगा।
पाइपलाइन शिफ्ट करने के लिए एस्टीमेट पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से मांगा गया है। एस्टीमेट मिलने के बाद इस दिशा में काम शुरू हो जाएगा।- विनोद कच्छप, कार्यपालक अभियंता, पथ निर्माण विभाग, शहरी डिवीजन
मुझे ऐसी कोई जानकारी नहीं है। इस संबंध में कोई पत्र पथ निर्माण विभाग से नहीं मिला है। संबंधित पाइपलाइन संभवतः जुडको की हो सकती है।- चंद्रशेखर कुमार, कार्यपालक अभियंता, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, शहरी डिवीजन
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