जंगल में दंगल है मजेदार, एक्शन-रोमांस और देशभक्ति मिलेगा सबका स्वाद
जंगल में दंगल है मजेदार, एक्शन-रोमांस और देशभक्ति मिलेगा सबका स्वाद
अक्षय कुमार की फिल्म 'वेलकम टू द जंगल' सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। यह कॉमेडी फिल्म बेवकूफी से भरी हुई, लेकिन काफी मजेदार है, जिसमें फुल ऑन मसाला ...और पढ़े
टू द जंगल मूवी रिव्यू/ फोटो- Instagram
सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्म 'वेलकम टू द जंगल'
एक्शन-कॉमेडी देशभक्ति और फुल ऑन कॉमेडी से भरी फिल्म
अपने किरदार में बखूबी छाए अक्षय कुमार और ये सितारे
स्मिता श्रीवास्तव, मुंबई। वेलकम फ्रेंचाइजी अपने अनोखे पात्रों और मनोरंजक अंदाज के कारण आज भी दर्शकों की पसंदीदा बनी हुई है। निर्माता फिरोज नाडियाडवाला इस फ्रेंचाइजी की तीसरी फिल्म 'वेलकम टू द जंगल' लेकर आए हैं, जिसे फिल्म की शुरुआत में वेलकम 3 बताया गया है। ढेर सारे कलाकारों से सजी यह मल्टीस्टारर फिल्म अपनी घोषणा के समय से ही चर्चा में रही है। प्रचार के दौरान इसे शुद्ध मनोरंजन प्रधान फिल्म बताया गया था और यह दावा काफी हद तक सही भी साबित होता है।
सिनेमाघरों में आज रिलीज हुई इस फिल्म में हास्य का आधार पात्रों की मूर्खतापूर्ण हरकतें, फिल्म के अंदर फिल्म बनना और अजीबोगरीब परिस्थितियां हैं। पात्र कई बार बेहद बेवकूफ नजर आते हैं, लेकिन उनकी यही नासमझी हंसाने का काम करती है। अच्छी बात यह है कि फिल्म में पैदा करने के लिए न तो दोअर्थी संवादों का सहारा लिया गया है न ही उसमें कोई अश्लीलता है, लेकिन कहानी में लाजिक ढूंढने या दिमाग लगाने की गलती कतई न करे।
हालांकि वेलकम फ्रेंचाइज के दो सबसे लोकप्रिय किरदार उदय शेट्टी(नाना पाटेकर) और मजनू भाई (अनिल कपूर) इसका हिस्सा नहीं है। उनकी जगह इनके भाई येडा अन्ना (सुनील शेट्टी) और रोमियो (अरशद वारसी) को शामिल किया गया है।
टैक्स चोरी से लेकर फिल्म बनाने की मजेदार कहानी
कहानी यूं हैं कि बिजनेसमैन आमिर सिन्हा (जाकिर हुसैन) ने काफी टैक्स चोरी किया है। राजनेता (बृजेंद्र काला) उसे चेताता है कि सरकार बदलने पर वह उसका साथ नहीं दे पाएगा। ऐसे में सिन्हा का पीए दुबे (जानी लीवर) उसे एक फ्लॉप फिल्म बनाने का आइडिया देता है जिसमें धुरंधर कलाकारों की जगह दलिंदर कलाकारों को कास्ट करेंगे। दुबे इसके लिए फ्लॉप निर्देशक जोड़ी दास (परेश रावल) और देव (राजपाल यादव) को साइन करता है।
वह 'वेलकम टू द जंगल' शीर्षक वाली फिल्म की कहानी सुनाते हैं। उसकी कहानी यूं है कि जंगल में एक गांव है। हिंदुस्तानी फौज के जाबांज सैनिक वहां जाते हैं और खूंखार आतंकी से बचाते हैं। इसके लिए सिनेमेटोग्राफर नयनसुख (श्रेयस तलपड़े) को लिया जाता है जिसके नयन को सीधा कुछ नहीं दिखता।

वह भोजपुरी फिल्मों में आइटम सॉन्ग करने वाले राजीव (अक्षय कुमार) को साइन करता है जो कभी टॉप का हीरो रहा होता है। उसकी पूर्व प्रेमिका और शीर्ष अभिनेत्री नाडिया (दिशा पाटनी) को भी साइन किया जाता है। हीरोइन के लिए सिन्हा की बेटी जेनी (जैकलीन फर्नांडिज) को लेते हैं। उदय का भाई येड़ा और मजनू का भाई रोमियो अब भारत में उसका फिरौती, वसूली का धंधा संभाल रहे हैं। वह भी जबरन फिल्म का हिस्सा बन जाते हैं।
उनके साथ कई और कलाकारों को जोड़ा जाता है। शूटिंग आरंभ होती है। इस बीच आयकर विभाग की छापेमारी के बाद आमिर सिन्हा फिल्म को एक दिन में पूरा करने को कहता है। सभी बॉर्डर के पास एक गांव जाते हैं, वहां वाकई आतंकी जतारा (जैकी श्रॉफ) का आतंक है, लेकिन कलाकारों को इसके बारे में कुछ भी पता नहीं होता।
निर्देशक ने बेवजह नहीं भटकने दी कहानी
निर्देशक अहमद खान की तारीफ बनती है कि उन्होंने ढेर सारे कलाकारों को बखूबी संभाला है। उन्होंने कहानी को कहीं गंभीर या बेवजह भटकने नहीं दिया है। दिवंगत नीरज वोरा की लिखी कहानी में रोमांस, भ्रष्टाचार, देशभक्ति, नाच-गाना जैसे सभी मसाले हैं, लेकिन हल्के फुल्के अंदाज में। फिल्म में कुछ पात्रों का अजीबोगरीब अंदाज जैसे दुबे की आवाज अति उत्साहित होने या डर में चली जाती है। येड़ा अन्ना सीधे कुछ बोलता नहीं।
गांव में मुराद चाचा (किरण कुमार) उर्दू बहुत शुद्ध बोलते हैं, बड़ी बी (फरीदा जलाल) गडमड बोलती हैं। उनकी यही खूबी फिल्म में कई हंसी के पल लेकर आती है। पैपराजी कल्चर पर व्यंग्य, कलाकारों की फिल्म या टीवी सीरियल के पात्रों से भी हंसी के पलों को गढ़ा गया है। अच्छी बात यह है कि फरहाद सामजी के संवाद व्हाटसअप जोक नहीं है।
अक्षय कुमार सहित इन सितारों का काम सराहनीय
कलाकारों की फौज में अक्षय कुमार की परफॉर्मेंस लाजवाब है। उनकी कॉमिक टाइमिंग शानदार है। यहां उन्होंने भोजपुरी गाने से लेकर फिल्म के दृश्यों में बाजी मारने के राजीव के प्रयासों को बखूबी जिया है। उनका एक और रोचक अंदाज फिल्म में दिखेगा। येड़ा अन्ना की भूमिका में सुनील शेट्टी भी छा जाते हैं। अरशद वारसी मिले दृश्यों में छाप छोड़ते हैं। करीब बीस साल बाद स्क्रीन पर साथ आए अक्षय और रवीना टंडन की जोड़ी को देखना अच्छा लगता है।
जोया की भूमिका में रवीना के हिस्से में दमदार सीन आए हैं। उन्हें वह शिद्दत से निभा ले जाती हैं। आतंकी की भूमिका में जैकी श्रॉफ जंचते हैं। फिल्म में संवाद है कि मैं यहां क्यों हूं तो जवाब आता है ग्लैमर के लिए। तो जैकलीन उसके लिए ही है। उनकी बेवकूफी हंसाती है। दिशा पाटनी के हिस्से में गाने हैं, लेकिन संवाद कम हैं वह भावहीन लगी हैं। अक्षय के साथ उनकी केमिस्ट्री नहीं जमती।

सख्त ट्रेनर तेजस्विनी की संक्षिप्त भूमिका में लारा दत्ता प्रभाव छोड़ती हैं। परेश रावल और राजपाल यादव बीच-बीच में फिसलती फिल्म को संभालते हैं। दुबे की भूमिका में जॉनी लीवर शानदार लगते हैं। जतारा के सहयोगी की भूमिका में बिंदु दारा सिंह भी जंचते हैं। दलेर मेहंदी का पात्र गायक का ही है, लेकिन मजेदार है। राजीव के मैनेजर बने तुषार कपूर अपनी भूमिका साथ न्याय करते हैं। हालांकि यशपाल शर्मा, अभिषेक कृष्णा, मुकेश तिवारी, कीकू शारदा की प्रतिभा का लेखक और निर्देशक सदुपयोग नहीं कर पाए हैं।
थिएटर में देखने लायक है वेलकम टू द जंगल
फिल्म में भोजपुरी गाना पीठिया दबाए रानी.... ऊंचा लंबा कद का रीमिक्स, वेलकम फिल्म की सिग्नेचर ट्यून समां बांधती है। इंटरवल में तलविंदर का गाया क्यों और अंत में तेरा पैसा मेरा पैसा प्रमोशनल गाने हैं एक्शन डायरेक्टर अब्बास अली मुगल ने एक्शन को विश्वसनीय बनाया है। खास तौर पर येड़ा अन्ना का हेलीकाप्टर से नीचे उतारने को लेकर गिड़गिड़ाना, राजीव नाडिया का जमीन पर लोटकर गोली चलाना फिर उनकी देखादेखी जंबू (कीकू शारदा) और देव का जमीन पर गोली चलाना। सिनेमेटोग्राफर कबीर लाल का काम भी सराहनीय है। कुल मिलाकर वेलकम टू द जंगल का दंगल मजेदार है।
अक्षय कुमार की फिल्म 'वेलकम टू द जंगल' सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। यह कॉमेडी फिल्म बेवकूफी से भरी हुई, लेकिन काफी मजेदार है, जिसमें फुल ऑन मसाला ...और पढ़े
टू द जंगल मूवी रिव्यू/ फोटो- Instagram
सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्म 'वेलकम टू द जंगल'
एक्शन-कॉमेडी देशभक्ति और फुल ऑन कॉमेडी से भरी फिल्म
अपने किरदार में बखूबी छाए अक्षय कुमार और ये सितारे
स्मिता श्रीवास्तव, मुंबई। वेलकम फ्रेंचाइजी अपने अनोखे पात्रों और मनोरंजक अंदाज के कारण आज भी दर्शकों की पसंदीदा बनी हुई है। निर्माता फिरोज नाडियाडवाला इस फ्रेंचाइजी की तीसरी फिल्म 'वेलकम टू द जंगल' लेकर आए हैं, जिसे फिल्म की शुरुआत में वेलकम 3 बताया गया है। ढेर सारे कलाकारों से सजी यह मल्टीस्टारर फिल्म अपनी घोषणा के समय से ही चर्चा में रही है। प्रचार के दौरान इसे शुद्ध मनोरंजन प्रधान फिल्म बताया गया था और यह दावा काफी हद तक सही भी साबित होता है।
सिनेमाघरों में आज रिलीज हुई इस फिल्म में हास्य का आधार पात्रों की मूर्खतापूर्ण हरकतें, फिल्म के अंदर फिल्म बनना और अजीबोगरीब परिस्थितियां हैं। पात्र कई बार बेहद बेवकूफ नजर आते हैं, लेकिन उनकी यही नासमझी हंसाने का काम करती है। अच्छी बात यह है कि फिल्म में पैदा करने के लिए न तो दोअर्थी संवादों का सहारा लिया गया है न ही उसमें कोई अश्लीलता है, लेकिन कहानी में लाजिक ढूंढने या दिमाग लगाने की गलती कतई न करे।
हालांकि वेलकम फ्रेंचाइज के दो सबसे लोकप्रिय किरदार उदय शेट्टी(नाना पाटेकर) और मजनू भाई (अनिल कपूर) इसका हिस्सा नहीं है। उनकी जगह इनके भाई येडा अन्ना (सुनील शेट्टी) और रोमियो (अरशद वारसी) को शामिल किया गया है।
टैक्स चोरी से लेकर फिल्म बनाने की मजेदार कहानी
कहानी यूं हैं कि बिजनेसमैन आमिर सिन्हा (जाकिर हुसैन) ने काफी टैक्स चोरी किया है। राजनेता (बृजेंद्र काला) उसे चेताता है कि सरकार बदलने पर वह उसका साथ नहीं दे पाएगा। ऐसे में सिन्हा का पीए दुबे (जानी लीवर) उसे एक फ्लॉप फिल्म बनाने का आइडिया देता है जिसमें धुरंधर कलाकारों की जगह दलिंदर कलाकारों को कास्ट करेंगे। दुबे इसके लिए फ्लॉप निर्देशक जोड़ी दास (परेश रावल) और देव (राजपाल यादव) को साइन करता है।
वह 'वेलकम टू द जंगल' शीर्षक वाली फिल्म की कहानी सुनाते हैं। उसकी कहानी यूं है कि जंगल में एक गांव है। हिंदुस्तानी फौज के जाबांज सैनिक वहां जाते हैं और खूंखार आतंकी से बचाते हैं। इसके लिए सिनेमेटोग्राफर नयनसुख (श्रेयस तलपड़े) को लिया जाता है जिसके नयन को सीधा कुछ नहीं दिखता।

वह भोजपुरी फिल्मों में आइटम सॉन्ग करने वाले राजीव (अक्षय कुमार) को साइन करता है जो कभी टॉप का हीरो रहा होता है। उसकी पूर्व प्रेमिका और शीर्ष अभिनेत्री नाडिया (दिशा पाटनी) को भी साइन किया जाता है। हीरोइन के लिए सिन्हा की बेटी जेनी (जैकलीन फर्नांडिज) को लेते हैं। उदय का भाई येड़ा और मजनू का भाई रोमियो अब भारत में उसका फिरौती, वसूली का धंधा संभाल रहे हैं। वह भी जबरन फिल्म का हिस्सा बन जाते हैं।
उनके साथ कई और कलाकारों को जोड़ा जाता है। शूटिंग आरंभ होती है। इस बीच आयकर विभाग की छापेमारी के बाद आमिर सिन्हा फिल्म को एक दिन में पूरा करने को कहता है। सभी बॉर्डर के पास एक गांव जाते हैं, वहां वाकई आतंकी जतारा (जैकी श्रॉफ) का आतंक है, लेकिन कलाकारों को इसके बारे में कुछ भी पता नहीं होता।
निर्देशक ने बेवजह नहीं भटकने दी कहानी
निर्देशक अहमद खान की तारीफ बनती है कि उन्होंने ढेर सारे कलाकारों को बखूबी संभाला है। उन्होंने कहानी को कहीं गंभीर या बेवजह भटकने नहीं दिया है। दिवंगत नीरज वोरा की लिखी कहानी में रोमांस, भ्रष्टाचार, देशभक्ति, नाच-गाना जैसे सभी मसाले हैं, लेकिन हल्के फुल्के अंदाज में। फिल्म में कुछ पात्रों का अजीबोगरीब अंदाज जैसे दुबे की आवाज अति उत्साहित होने या डर में चली जाती है। येड़ा अन्ना सीधे कुछ बोलता नहीं।
गांव में मुराद चाचा (किरण कुमार) उर्दू बहुत शुद्ध बोलते हैं, बड़ी बी (फरीदा जलाल) गडमड बोलती हैं। उनकी यही खूबी फिल्म में कई हंसी के पल लेकर आती है। पैपराजी कल्चर पर व्यंग्य, कलाकारों की फिल्म या टीवी सीरियल के पात्रों से भी हंसी के पलों को गढ़ा गया है। अच्छी बात यह है कि फरहाद सामजी के संवाद व्हाटसअप जोक नहीं है।
अक्षय कुमार सहित इन सितारों का काम सराहनीय
कलाकारों की फौज में अक्षय कुमार की परफॉर्मेंस लाजवाब है। उनकी कॉमिक टाइमिंग शानदार है। यहां उन्होंने भोजपुरी गाने से लेकर फिल्म के दृश्यों में बाजी मारने के राजीव के प्रयासों को बखूबी जिया है। उनका एक और रोचक अंदाज फिल्म में दिखेगा। येड़ा अन्ना की भूमिका में सुनील शेट्टी भी छा जाते हैं। अरशद वारसी मिले दृश्यों में छाप छोड़ते हैं। करीब बीस साल बाद स्क्रीन पर साथ आए अक्षय और रवीना टंडन की जोड़ी को देखना अच्छा लगता है।
जोया की भूमिका में रवीना के हिस्से में दमदार सीन आए हैं। उन्हें वह शिद्दत से निभा ले जाती हैं। आतंकी की भूमिका में जैकी श्रॉफ जंचते हैं। फिल्म में संवाद है कि मैं यहां क्यों हूं तो जवाब आता है ग्लैमर के लिए। तो जैकलीन उसके लिए ही है। उनकी बेवकूफी हंसाती है। दिशा पाटनी के हिस्से में गाने हैं, लेकिन संवाद कम हैं वह भावहीन लगी हैं। अक्षय के साथ उनकी केमिस्ट्री नहीं जमती।

सख्त ट्रेनर तेजस्विनी की संक्षिप्त भूमिका में लारा दत्ता प्रभाव छोड़ती हैं। परेश रावल और राजपाल यादव बीच-बीच में फिसलती फिल्म को संभालते हैं। दुबे की भूमिका में जॉनी लीवर शानदार लगते हैं। जतारा के सहयोगी की भूमिका में बिंदु दारा सिंह भी जंचते हैं। दलेर मेहंदी का पात्र गायक का ही है, लेकिन मजेदार है। राजीव के मैनेजर बने तुषार कपूर अपनी भूमिका साथ न्याय करते हैं। हालांकि यशपाल शर्मा, अभिषेक कृष्णा, मुकेश तिवारी, कीकू शारदा की प्रतिभा का लेखक और निर्देशक सदुपयोग नहीं कर पाए हैं।
थिएटर में देखने लायक है वेलकम टू द जंगल
फिल्म में भोजपुरी गाना पीठिया दबाए रानी.... ऊंचा लंबा कद का रीमिक्स, वेलकम फिल्म की सिग्नेचर ट्यून समां बांधती है। इंटरवल में तलविंदर का गाया क्यों और अंत में तेरा पैसा मेरा पैसा प्रमोशनल गाने हैं एक्शन डायरेक्टर अब्बास अली मुगल ने एक्शन को विश्वसनीय बनाया है। खास तौर पर येड़ा अन्ना का हेलीकाप्टर से नीचे उतारने को लेकर गिड़गिड़ाना, राजीव नाडिया का जमीन पर लोटकर गोली चलाना फिर उनकी देखादेखी जंबू (कीकू शारदा) और देव का जमीन पर गोली चलाना। सिनेमेटोग्राफर कबीर लाल का काम भी सराहनीय है। कुल मिलाकर वेलकम टू द जंगल का दंगल मजेदार है।
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