अहमदाबाद विमान हादसा: एक साल बाद भी अधर में न्याय, पीड़ित ने मांगी जांच में ईमानदारी और पारदर्शिता
अहमदाबाद विमान हादसा: एक साल बाद भी अधर में न्याय, पीड़ित ने मांगी जांच में ईमानदारी और पारदर्शिता
अहमदाबाद विमान हादसे को एक साल पूरा हो गया है, लेकिन ब्रिटिश नागरिक विश्वास कुमार रमेश जैसे पीड़ितों को अब भी न्याय और मुआवजे का इंतजार है। ...और पढ़ें
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अहमदाबाद विमान हादसे की बरसी आज (फाइल फोटो)
अहमदाबाद विमान हादसे को आज एक साल पूरा हुआ।
ब्रिटिश नागरिक विश्वास कुमार रमेश ने खोया भाई, मानसिक आघात।
पीड़ितों ने ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबों की मांग की।
डिजिटल डेस्क, अहमदाबाद। अहमदाबाद विमान दुर्घटना को आज एक साल पूरे हो गए हैं। इस हादसे में एक मात्र बचने वाले ब्रिटिश नागरिक विश्वास कुमार रमेश का दर्द आज भी उतना ही हरा है। विश्वास कुमार ने कहा कि मैं बच तो गया, लेकिन इस जिंदा रहने की कीमत मैं हर रोज अपनी आत्मा का एक हिस्सा देकर चुका रहा हूं।
हालांकि, उन्होंने इस दुर्घटना में विश्वास कुमार रमेश ने अपने भाई को भी इस क्रैश मैं खो दिया था। उन्होंने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि आज भी आंखें बंद करता हूं, तो मुझे वो चीखें, आग और वो खौफनाक मंजर दिखाई देता है। मैं बच तो गया, लेकिन गहरे मानसिक जख्मों के साथ। आज मेरे विश्वास त्रासदी की पहली बरसी है।
नागरिक उड्डयन मंत्री ने पिछले महीने कहा था कि जांच अंतिम चरण में है और रिपोर्ट बरसी तक आने की संभावना है। लेकिन ऐसा क्यों हुआ? यह तकनीकी खराबी थी या किसी की लापरवाही? इस सवाल का जवाब सालभर बाद भी नहीं मिला है।
विश्वास कुमार रमेश ने कहा कि हमें और हमारे जैसे सैकड़ों पीड़ित परिवारों को सिर्फ तीन चीजें चाहिए ईमानदारी, पारदर्शिता और हमारे सवालों के जवाब। क्योंकि कोई भी रिपोर्ट मेरे भाई को लौटा नहीं सकती और न ही उन 260 लोगों को जिंदा कर सकती है।
लेकिन पीड़ित परिवारों को यह जानने का अधिकार है कि उनके अपनों के साथ उस दिन क्या हुआ था।
एक तरफ जहां एअर इंडिया और टाटा समूह अधिकांश परिवारों को मुआवजा देने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विश्वास कुमार और अहमदाबाद के अजय परमार जैसे सर्वाइवर्स आज भी अधूरे मुआवजे, मानसिक आघात (PTSD) और सामाजिक उपेक्षा के कारण नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।
ब्रिटिश नागरिक होने के बावजूद मुझे या अन्य ब्रिटिश पीड़ित परिवारों को यूके सरकार से मदद नहीं मिली। हाल में एअर इंडिया अधिकारियों व टाटा समूह प्रतिनिधियों से मुलाकात हुई, पर मुआवजे और मदद से जुड़े अहम मुद्दे अब भी अधर में हैं। एअर इंडिया ने कहा है कि मृतकों के 96% परिवारों को 25 लाख अंतरिम मुआवजा दे दिया गया है। बाकि 4 प्रतिशत मामलों में दस्तावेज अधूरे या पारिवारिक विवाद के कारण फंसे हैं।
अहमदाबाद विमान हादसे को एक साल पूरा हो गया है, लेकिन ब्रिटिश नागरिक विश्वास कुमार रमेश जैसे पीड़ितों को अब भी न्याय और मुआवजे का इंतजार है। ...और पढ़ें
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अहमदाबाद विमान हादसे की बरसी आज (फाइल फोटो)
अहमदाबाद विमान हादसे को आज एक साल पूरा हुआ।
ब्रिटिश नागरिक विश्वास कुमार रमेश ने खोया भाई, मानसिक आघात।
पीड़ितों ने ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबों की मांग की।
डिजिटल डेस्क, अहमदाबाद। अहमदाबाद विमान दुर्घटना को आज एक साल पूरे हो गए हैं। इस हादसे में एक मात्र बचने वाले ब्रिटिश नागरिक विश्वास कुमार रमेश का दर्द आज भी उतना ही हरा है। विश्वास कुमार ने कहा कि मैं बच तो गया, लेकिन इस जिंदा रहने की कीमत मैं हर रोज अपनी आत्मा का एक हिस्सा देकर चुका रहा हूं।
हालांकि, उन्होंने इस दुर्घटना में विश्वास कुमार रमेश ने अपने भाई को भी इस क्रैश मैं खो दिया था। उन्होंने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि आज भी आंखें बंद करता हूं, तो मुझे वो चीखें, आग और वो खौफनाक मंजर दिखाई देता है। मैं बच तो गया, लेकिन गहरे मानसिक जख्मों के साथ। आज मेरे विश्वास त्रासदी की पहली बरसी है।
नागरिक उड्डयन मंत्री ने पिछले महीने कहा था कि जांच अंतिम चरण में है और रिपोर्ट बरसी तक आने की संभावना है। लेकिन ऐसा क्यों हुआ? यह तकनीकी खराबी थी या किसी की लापरवाही? इस सवाल का जवाब सालभर बाद भी नहीं मिला है।
विश्वास कुमार रमेश ने कहा कि हमें और हमारे जैसे सैकड़ों पीड़ित परिवारों को सिर्फ तीन चीजें चाहिए ईमानदारी, पारदर्शिता और हमारे सवालों के जवाब। क्योंकि कोई भी रिपोर्ट मेरे भाई को लौटा नहीं सकती और न ही उन 260 लोगों को जिंदा कर सकती है।
लेकिन पीड़ित परिवारों को यह जानने का अधिकार है कि उनके अपनों के साथ उस दिन क्या हुआ था।
एक तरफ जहां एअर इंडिया और टाटा समूह अधिकांश परिवारों को मुआवजा देने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विश्वास कुमार और अहमदाबाद के अजय परमार जैसे सर्वाइवर्स आज भी अधूरे मुआवजे, मानसिक आघात (PTSD) और सामाजिक उपेक्षा के कारण नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।
ब्रिटिश नागरिक होने के बावजूद मुझे या अन्य ब्रिटिश पीड़ित परिवारों को यूके सरकार से मदद नहीं मिली। हाल में एअर इंडिया अधिकारियों व टाटा समूह प्रतिनिधियों से मुलाकात हुई, पर मुआवजे और मदद से जुड़े अहम मुद्दे अब भी अधर में हैं। एअर इंडिया ने कहा है कि मृतकों के 96% परिवारों को 25 लाख अंतरिम मुआवजा दे दिया गया है। बाकि 4 प्रतिशत मामलों में दस्तावेज अधूरे या पारिवारिक विवाद के कारण फंसे हैं।
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