'स्कीम या स्कैम', खुद की कहानी लगेगी ये सीरीज; हर एपिसोड के साथ बढ़ता है सस्पेंस
स्कीम या स्कैम', खुद की कहानी लगेगी ये सीरीज; हर एपिसोड के साथ बढ़ता है सस्पेंस
The Pyramid Scheme Review: वेब सीरीज 'द पिरामिड स्कीम' रिलीज हो चुकी है। 'पंचायत' के मेकर्स इस बार क्या कहानी ऑडियंस के लिए लेकर आए और कैसे आपका अनुभव ...और पढ़ें

'द पिरामिड स्कीम' रिव्यू/ फोटो- Jagran Graphics
तान्या अरोड़ा, नई दिल्ली। 'पंचायत' पसंद आई...तो TVF की नई सीरीज 'द पिरामिड स्कीम' (The Pyramid Scheme Season 1 Review) को तो आप बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं कर सकते, क्योंकि कहानी कहीं न कहीं आपकी-हमारी और हर उस इंसान की जिंदगी से जुड़ी हुई है, जो कभी न कभी स्कैम का शिकार हुए हैं। स्टॉक मार्केटिंग से लेकर देश में बड़े-बड़े स्कैम पर बेस्ड सीरीज और शोज हमने कई बार देखें हैं, लेकिन 'द पिरामिड स्कीम' की कहानी इन सभी से अलग है, जिसे मेकर्स ने बहुत ही मजेदार तरीके से पेश किया है।
क्या है 'द पिरामिड स्कीम' की कहानी?
कहानी की शुरुआत होती है 'कंचन चौहान' (स्मिता बंसल) के घर से, जहां उनके फैमिली फ्रैंड का बेटा अपने काम के सिलसिले में आता है, लेकिन बेटी कृतिका (अल्फिया जाफरी) और सुनील चौहान (सदानंद पाटिल) उसे मेंगों शेक पिलाकर एक 'विनिंग वर्ल्ड' बिजनेस की स्कीम सुनाते हैं। जब वह उसे अपने सीनियर से मिलवाता है, तो लड़का स्कैम समझ जाता है और उनके घर से नौ-दो ग्यारह हो जाता है। कहानी आगे बढ़ती है और एक दिन चुनमुन और कंचन को उनका बलि का बकरा मिल जाता है और वह होता है मोबाइल शॉप चलाने वाला गोल्डी चौहान (परमवीर चीमा)।
अपने बाबू (दादा जी) के तानों से परेशान, रिश्तेदारों में सबसे गरीब और पापा की ली उधारी से थका-हारा गोल्डी कुछ करना चाहता है। तभी उसकी मुलाकात चुनमुन से उसकी शॉप के बाहर होती है, जो एक छोटे से बैंक का मैनेजर है और साथ ही पिरामिड बनाने के बिजनेस में है।
-1780633019449.jpg)
चुनमुन इस पूरी सिचुएशन का फायदा उठाता है और बड़े-बड़े ख्वाब दिखाकर 11,000 लेकर उसे अपनी टीम में शामिल कर लेता है और उससे चार लोगों को जोड़ने को कहता है। चुनमुन से दादा जी का बैंक अकाउंट में आए इंशोरेंस के पैसे का पता लगाकर गोल्डी बाबू को ब्लैकमेल करके उनसे 50 हजार निकाल लेता है और चुनमुन को देकर वह नई कंपनी 'जंबोलाइफ' का हिस्सा बन जाता है। शुरुआत में तो गोल्डी बिजनेस समझ नहीं पाता और एक्साइटमेंट में अपलाइन के बिना ही वह कंपनी का सिस्टम समझे बिना दोस्तों से चार लोगों को जोड़ने की बात कर लेता है। उसके दोस्त और रिश्तेदार इसे 'लोगों को जोड़ने' का धंधा समझ कर रिजेक्ट कर देते हैं। वह हार मानता है, लेकिन उसे सीनियर अपलाइन दिव्य ज्योति (इंद्रेश मलिक) मोटिवेट करते हैं।
एक तरफ जहां गोल्डी बिजनेस में शामिल हो जाता है, वहीं दूसरी तरफ ,म्यूजिक टीचर मनोज श्रीवास्तव (Ranvir Shorey) को गोल्डी के जीजा स्कूल में बच्चों को गाना बजाना और म्यूजिक सिखाने की वजह से निकलवा देते हैं। शुरुआत में तीन लोगों को तो गोल्डी मां की मदद से जोड़ लेता है, लेकिन चौथा वह बड़ी सोच समझकर लोगों को मोटिवेट करने के लिए श्रीवास्तव जी को टीम में शामिल कर लेता है, ताकि उनकी बातों से लोग मेन्यूपुलेट हो सके। दोनों उधारी की गाड़ी लेकर निकलते हैं और झूठ-मूठ की शान दिलाकर लोगों को अट्रेक्ट करते हैं। लोगों को जोड़ने (नेटवर्क मार्केटिंग) के इस बिजनेस में गोल्डी और श्रीवास्तव लगातार ग्रो करते हैं और तकरीबन 700 से 800 लोगों की बड़ी टीम बनाते हैं।
-1780633122527.jpg)
श्रीवास्तव जी स्पीकर हैं और गोल्डी टीम का लीडर। सीनियर अपलाइन और 'जंबो लाइफ' का को-फाउंडर दलजीत टीम के डायमंड स्टार, गोल्ड स्टार के साथ मिलकर दोनों के बीच जलन पैदा करवाते हैं और यहीं से उनकी टीम टूटना शुरू होती है। हालांकि, वह दोनों सब साइड में रखकर जैसे अपनी टीम को री-बिल्ड करने की कोशिश करते हैं, उन्हें पता चलता है कि 'जंबो किंग' बंद हो चुकी है और उनके पैसे डूब चुके हैं। जब तक उन्हें स्कैम का पता चलता है, तब तक गाड़ी निकल चुकी होती है। हालांकि, नेटवर्क मार्केटिंग के बिजनेस के नाम पर क्या स्कैम चल रहा है और उनको फंसाने वाला असली खिलाड़ी कौन है, इस सस्पेंस से पर्दा उठाने के लिए आपको 'द पिरामिड स्कीम' अमेजन प्राइम वीडियो पर देखनी होगी।
7 एपिसोड सीरीज में क्या है बोरिंग और दिलचस्प प्वाइंट?
जैसा हमने शुरुआत में आपको बता दिया था कि ये कहानी किसी बड़ी हस्ती की नहीं,लेकिन आपकी खुद की है, क्योंकि हर साल देश में हजारों की संख्या में लोग 'नेटवर्क मार्केटिंग' के नाम पर ठगी का शिकार हो रहे हैं। 7 एपिसोड की 'द पिरामिड स्कीम' के निर्देशन की कमान आशीष आर शुक्ला ने संभाली है, जिन्होंने बिजनेस में जुड़ने से लेकर किस तरह से अपलाइन अपने सीनियर्स के कहने पर डाउनलाइन को दौलत, जॉब की परेशानी और आरामदायक जिंदगी का लालच देकर मेन्युप्लेट करते है, इसे बड़ी डिटेलिंग में दिखाया है।
सीरीज की सबसे खूबसूरत बात ये है कि इसमें डायरेक्टर ने सिर्फ नेटवर्क मार्केटिंग की बुराई करते हुए यह नहीं बताया कि ये बिजनेस सिर्फ पैसा कमाने का शॉर्टकट है, बल्कि यह भी दिखाया है कि लोग इस बिजनेस में भी प्रोडक्ट बेचकर ईमानदारी से आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन ऊपर बैठे लोग इसमें इतनी ठगी करते हैं, जिसकी वजह से लोग नेटवर्क मार्केटिंग के बिजनेस पर भरोसा नहीं करते और इसे सही तरह से नहीं समझ पाते। इस सीरीज में हर एपिसोड के खत्म होने के बाद आपको अगला पार्ट देखने का मन जरूर करेगा, क्योंकि हर कॉनमैन के किरदार में आपको शायद वह चेहरा नजर आएगा, जिसने आपको नेटवर्क मार्केटिंग के स्कैम में फंसाने की कोशिश की है।
-1780633205053.jpg)
हालांकि, 'द पिरामिड स्कीम' में कुछ जगह ऐसी हैं, जहां मेकर्स ने बेवजह का एफर्ट लगाया है, जैसे अपलाइन चुनमुन की बेटी बाप से बदला लेने के लिए गोल्डी के भाई 'सत्कार' से अफेयर करती है, जिसकी कहानी में कोई जरूरत नहीं लगती। वहीं दूसरी तरफ गोल्डी और श्रीवास्तव जी के 4th और 5th एपिसोड में सीन थोड़े खींचे गए हैं, जो बीच में थोड़ी उबासी जरूर लाते हैं।
इसके अलावा बाबू का किरदार भी थोड़ा कंफ्यूजिंग है, क्योंकि यह समझने में मुश्किल होती है कि वह बच्चों को पैसे कंजूसी में नहीं देता या फिर उन्हें कोई सबक सिखाना चाहता है। कभी वह पैसे के पीछे भागता है, तो कभी प्यार सबसे कीमती है का पाठ पढ़ाता है। नेटवर्क मार्केटिंग के बिजनेस के बड़े स्कैम को बहुत ही अच्छे से TVF ने पिरोया है, जो आपको बिल्कुल बोर नहीं होने देगा। साथ ही सेकंड सीजन आने की हिंट भी दे दी है।
The Pyramid Scheme Review: वेब सीरीज 'द पिरामिड स्कीम' रिलीज हो चुकी है। 'पंचायत' के मेकर्स इस बार क्या कहानी ऑडियंस के लिए लेकर आए और कैसे आपका अनुभव ...और पढ़ें

'द पिरामिड स्कीम' रिव्यू/ फोटो- Jagran Graphics
तान्या अरोड़ा, नई दिल्ली। 'पंचायत' पसंद आई...तो TVF की नई सीरीज 'द पिरामिड स्कीम' (The Pyramid Scheme Season 1 Review) को तो आप बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं कर सकते, क्योंकि कहानी कहीं न कहीं आपकी-हमारी और हर उस इंसान की जिंदगी से जुड़ी हुई है, जो कभी न कभी स्कैम का शिकार हुए हैं। स्टॉक मार्केटिंग से लेकर देश में बड़े-बड़े स्कैम पर बेस्ड सीरीज और शोज हमने कई बार देखें हैं, लेकिन 'द पिरामिड स्कीम' की कहानी इन सभी से अलग है, जिसे मेकर्स ने बहुत ही मजेदार तरीके से पेश किया है।
क्या है 'द पिरामिड स्कीम' की कहानी?
कहानी की शुरुआत होती है 'कंचन चौहान' (स्मिता बंसल) के घर से, जहां उनके फैमिली फ्रैंड का बेटा अपने काम के सिलसिले में आता है, लेकिन बेटी कृतिका (अल्फिया जाफरी) और सुनील चौहान (सदानंद पाटिल) उसे मेंगों शेक पिलाकर एक 'विनिंग वर्ल्ड' बिजनेस की स्कीम सुनाते हैं। जब वह उसे अपने सीनियर से मिलवाता है, तो लड़का स्कैम समझ जाता है और उनके घर से नौ-दो ग्यारह हो जाता है। कहानी आगे बढ़ती है और एक दिन चुनमुन और कंचन को उनका बलि का बकरा मिल जाता है और वह होता है मोबाइल शॉप चलाने वाला गोल्डी चौहान (परमवीर चीमा)।
अपने बाबू (दादा जी) के तानों से परेशान, रिश्तेदारों में सबसे गरीब और पापा की ली उधारी से थका-हारा गोल्डी कुछ करना चाहता है। तभी उसकी मुलाकात चुनमुन से उसकी शॉप के बाहर होती है, जो एक छोटे से बैंक का मैनेजर है और साथ ही पिरामिड बनाने के बिजनेस में है।
-1780633019449.jpg)
चुनमुन इस पूरी सिचुएशन का फायदा उठाता है और बड़े-बड़े ख्वाब दिखाकर 11,000 लेकर उसे अपनी टीम में शामिल कर लेता है और उससे चार लोगों को जोड़ने को कहता है। चुनमुन से दादा जी का बैंक अकाउंट में आए इंशोरेंस के पैसे का पता लगाकर गोल्डी बाबू को ब्लैकमेल करके उनसे 50 हजार निकाल लेता है और चुनमुन को देकर वह नई कंपनी 'जंबोलाइफ' का हिस्सा बन जाता है। शुरुआत में तो गोल्डी बिजनेस समझ नहीं पाता और एक्साइटमेंट में अपलाइन के बिना ही वह कंपनी का सिस्टम समझे बिना दोस्तों से चार लोगों को जोड़ने की बात कर लेता है। उसके दोस्त और रिश्तेदार इसे 'लोगों को जोड़ने' का धंधा समझ कर रिजेक्ट कर देते हैं। वह हार मानता है, लेकिन उसे सीनियर अपलाइन दिव्य ज्योति (इंद्रेश मलिक) मोटिवेट करते हैं।
एक तरफ जहां गोल्डी बिजनेस में शामिल हो जाता है, वहीं दूसरी तरफ ,म्यूजिक टीचर मनोज श्रीवास्तव (Ranvir Shorey) को गोल्डी के जीजा स्कूल में बच्चों को गाना बजाना और म्यूजिक सिखाने की वजह से निकलवा देते हैं। शुरुआत में तीन लोगों को तो गोल्डी मां की मदद से जोड़ लेता है, लेकिन चौथा वह बड़ी सोच समझकर लोगों को मोटिवेट करने के लिए श्रीवास्तव जी को टीम में शामिल कर लेता है, ताकि उनकी बातों से लोग मेन्यूपुलेट हो सके। दोनों उधारी की गाड़ी लेकर निकलते हैं और झूठ-मूठ की शान दिलाकर लोगों को अट्रेक्ट करते हैं। लोगों को जोड़ने (नेटवर्क मार्केटिंग) के इस बिजनेस में गोल्डी और श्रीवास्तव लगातार ग्रो करते हैं और तकरीबन 700 से 800 लोगों की बड़ी टीम बनाते हैं।
-1780633122527.jpg)
श्रीवास्तव जी स्पीकर हैं और गोल्डी टीम का लीडर। सीनियर अपलाइन और 'जंबो लाइफ' का को-फाउंडर दलजीत टीम के डायमंड स्टार, गोल्ड स्टार के साथ मिलकर दोनों के बीच जलन पैदा करवाते हैं और यहीं से उनकी टीम टूटना शुरू होती है। हालांकि, वह दोनों सब साइड में रखकर जैसे अपनी टीम को री-बिल्ड करने की कोशिश करते हैं, उन्हें पता चलता है कि 'जंबो किंग' बंद हो चुकी है और उनके पैसे डूब चुके हैं। जब तक उन्हें स्कैम का पता चलता है, तब तक गाड़ी निकल चुकी होती है। हालांकि, नेटवर्क मार्केटिंग के बिजनेस के नाम पर क्या स्कैम चल रहा है और उनको फंसाने वाला असली खिलाड़ी कौन है, इस सस्पेंस से पर्दा उठाने के लिए आपको 'द पिरामिड स्कीम' अमेजन प्राइम वीडियो पर देखनी होगी।
7 एपिसोड सीरीज में क्या है बोरिंग और दिलचस्प प्वाइंट?
जैसा हमने शुरुआत में आपको बता दिया था कि ये कहानी किसी बड़ी हस्ती की नहीं,लेकिन आपकी खुद की है, क्योंकि हर साल देश में हजारों की संख्या में लोग 'नेटवर्क मार्केटिंग' के नाम पर ठगी का शिकार हो रहे हैं। 7 एपिसोड की 'द पिरामिड स्कीम' के निर्देशन की कमान आशीष आर शुक्ला ने संभाली है, जिन्होंने बिजनेस में जुड़ने से लेकर किस तरह से अपलाइन अपने सीनियर्स के कहने पर डाउनलाइन को दौलत, जॉब की परेशानी और आरामदायक जिंदगी का लालच देकर मेन्युप्लेट करते है, इसे बड़ी डिटेलिंग में दिखाया है।
सीरीज की सबसे खूबसूरत बात ये है कि इसमें डायरेक्टर ने सिर्फ नेटवर्क मार्केटिंग की बुराई करते हुए यह नहीं बताया कि ये बिजनेस सिर्फ पैसा कमाने का शॉर्टकट है, बल्कि यह भी दिखाया है कि लोग इस बिजनेस में भी प्रोडक्ट बेचकर ईमानदारी से आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन ऊपर बैठे लोग इसमें इतनी ठगी करते हैं, जिसकी वजह से लोग नेटवर्क मार्केटिंग के बिजनेस पर भरोसा नहीं करते और इसे सही तरह से नहीं समझ पाते। इस सीरीज में हर एपिसोड के खत्म होने के बाद आपको अगला पार्ट देखने का मन जरूर करेगा, क्योंकि हर कॉनमैन के किरदार में आपको शायद वह चेहरा नजर आएगा, जिसने आपको नेटवर्क मार्केटिंग के स्कैम में फंसाने की कोशिश की है।
-1780633205053.jpg)
हालांकि, 'द पिरामिड स्कीम' में कुछ जगह ऐसी हैं, जहां मेकर्स ने बेवजह का एफर्ट लगाया है, जैसे अपलाइन चुनमुन की बेटी बाप से बदला लेने के लिए गोल्डी के भाई 'सत्कार' से अफेयर करती है, जिसकी कहानी में कोई जरूरत नहीं लगती। वहीं दूसरी तरफ गोल्डी और श्रीवास्तव जी के 4th और 5th एपिसोड में सीन थोड़े खींचे गए हैं, जो बीच में थोड़ी उबासी जरूर लाते हैं।
इसके अलावा बाबू का किरदार भी थोड़ा कंफ्यूजिंग है, क्योंकि यह समझने में मुश्किल होती है कि वह बच्चों को पैसे कंजूसी में नहीं देता या फिर उन्हें कोई सबक सिखाना चाहता है। कभी वह पैसे के पीछे भागता है, तो कभी प्यार सबसे कीमती है का पाठ पढ़ाता है। नेटवर्क मार्केटिंग के बिजनेस के बड़े स्कैम को बहुत ही अच्छे से TVF ने पिरोया है, जो आपको बिल्कुल बोर नहीं होने देगा। साथ ही सेकंड सीजन आने की हिंट भी दे दी है।
Labels
Mirchmasala
Post A Comment
No comments :